जीते को देश तमाम, हारे को हरि नाम

सोलहवीं लोकसभा की चुनावी प्रक्रिया सम्पन्न हो गयी है इस चुनाव में कई ऐसे नेता भी शिकस्त के शिकार हुए जो मुख्यमंत्री रह चुके हैं वहीं कई पूर्व मुख्यमंत्रियों ने जीत का जश्न भी मनाया है.modi

रमेश सर्राफ धमोरा

वैसे तो नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए बनारस और बड़ोदा से चुनाव जीत कर सीधे प्रधान मंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं पर कई दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी जीत का जश्न मनाया है तो कइयों को हार का सामना करना पड़ा.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव ने भी मैनपुरी व आजमगढ़ दो सीटों पर जीत चुके हैं। उत्तर प्रदेश के ही पूर्व मुख्यमंत्री रहे राजनाथ सिंह भी लखनऊ से जीत चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री व कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके  एच.डी.देवगौड़ा भी हासन से जीत चुके हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे बी.एस.येदुरप्पा  शिमोगा से ,डी.वी.सदानन्द गौड़ा बैंगलोर उत्तर से,एम. वीरप्पा मोईली चिकबल्लापुर से चुनाव जीत गये हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रही सुषमा स्वराज विदिशा से मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री रही उमा भारती झांसी से, पंजाब के मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिन्द्र सिंह अमृतसर से,हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शांता कुमार कांगड़ा से,महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे अशोक चव्हाण नांदेड़ से,उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री रहे मेजर जनरल भुवनचन्द्र  खण्डूरी अल्मोड़ा से ,रमेश पोखरियाल हरिद्वार से,भगत सिंह कोश्यारी नैनीताल उधमसिंह नगर से चुनाव जीत चुके हैं। झारखरण्ड के मुख्यमंत्री रहे शिबू सोरेन दुमका से चुनाव जीत चुके हैं। मेघालय के मुख्यमंत्री रहे पी.ए.संगमा तुर्रा से,नागालैण्ड के मुख्यमंत्री रहे निपुय राय नागालैंड सीट से चुनाव जीत चुके हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री जो हारे

लोक सभा चुनाव में कई मुख्यमंत्री रह चुके नेताओं को हार का मुंह भी देखना पड़ा है। हारने वालों में जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे फारूक अब्दुल्ला,गुलाम नबी आजाद, दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे अरविन्द केजरीवाल,उड़ीसा के मुख्यमंत्री रहे गिरधर गोमांगो,झारखण्ड के मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मराण्डी,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे अजीतजोगी, गुजरात के मुख्यमंत्री रहे शंकर सिंह बाघेला, बिहार के मुख्यमंत्री रहे रामसुन्दर दास, राबड़ीदेवी,महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार शिन्दे, कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे कुमार स्वामी,धरमसिंह जैसे नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा है।

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