जीवन में ज्योतिष का योगदान

ज्योतिष एक विज्ञान है या आस्था से जुड़ा शास्त्र,यह एक बहस का मुद्दा रहा है पर यह तय है कि अपने भाग्य पर विश्वास करने वाले करोड़ों लोग ज्योतिषी और ज्योतिष शास्त्र में विश्वास करते हैं.

डा. राजन राज

डा. राजन राज

डा राजन राज पिछले 18 सालों से ज्योतिषी के रूप में अपनी सेवायें दे रहे हैं. वह कहते हैं, ज्योतिष वस्तुत: ग्रहों के जरिये जीवन को समझने का शास्त्र है, यह कॉस्मिक सायंस( Cosmic Science) है. पर इसे धर्म से जोड़ कर इसे आस्था की बंदिशों में कैद कर दिया गया जिससे ज्योतिष को काफी नुकसान हुआ.

डा. राजन ने महर्षि महेश योगी के नीदरलैंड स्थित वैदिक विश्वविद्यालय से 1998-99 में जुड़ कर कई सालों तक ज्योतिष शास्त्र का अध्यन किया है.मेडिसीन में एम.डी ( M.D) के साथ उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और योग विज्ञान में पी.एचडी( Ph.D) की उपाधि भी हासिल की है. वह कहते हैं- “जैसे ही ज्योतिष शास्त्र को धर्म और आस्था में कैद कर दिया गया, भारत में इस पर वैज्ञानिक शोध और अध्ययन का चलन कम हो गया.हालांकि निजी स्तर पर फिर इस पर अब शोध शुरू हुए हैं. लेकिन सरकारी सहयोग और फंडिंग नहीं मिल पा रहे हैं. परिणाम यह हुआ कि इसकी प्रगति बाधित हो गयी है”.

डा. राजन आगे कहते हैं- “पीछे मुड़ कर देखें तो नालंदा, तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों में सैकड़ों वर्ष पूर्व ज्योतिष शास्त्र पर अध्ययन और शोध होते थे, पर आधुनिक भारत में इस विषय पर अध्ययन और शोध की परिपाटी काफी कम हो गयी और इसका असर यह हुआ कि समय के अंतराल के साथ यह अपने मूल लक्ष्य से हट कर बाबागिरी के आवरण में आ गया, ज्योतिषी कर्मकांड में फंस गये सो उन्होंने खुद के लिए एक भेसभूसा भी विकसित कर लिया. लम्बी दाढ़ी, काले या गेरुआ वस्त्र उनकी पहचान बन गयी.आज टीवी चैनलों पर ऐसे ही बाबाओं की भरमार है. इस तरह इसका वैज्ञानिक पक्ष धुमिल होता गया और कर्मकांड हावी होता गया और यह बात गौण होती चली गयी कि ज्योतिष विद्या के लिए अनिवार्य अध्ययन और शोध की कोई जरूरत भी है.

डा. राजन कहते हैं ज्योतिष शास्त्र की हालत उसे बेगाने शास्त्र की हो गयी है जिसे चाहने वाले तो सब हैं पर उसका कोई अपना नहीं है. बड़े-बड़े मंत्री, राजनेता, फिल्मकार, अदाकार, क्रिकेटर सब इसके दीवाने हैं. सब अपने हर शुभकर्मों के पहले ज्योतिषीय सलाह लेते हैं पर इसकी वैज्ञानिकता को बढ़ावा देने के बजाये इसके कर्मकांड तक ही इसे सीमित रखा जाता है. स्थिति यह कि सरकार इसे स्यूडो सायंस कहती है और वह इसके शोध और अध्ययन पर पैसे नहीं खर्च करती.नतीजा यह है कि इस शास्त्र का दुरूपयोग होता चला गया .

आनुवांशिकी और ज्योतिष

ज्योतिष एक विज्ञान है और इसके सिद्धांत वैज्ञानिक शोध पर आधारित हैं. इस तर्क को विस्तार देते हुए डा. राजन कहते हैं, आनुवांशिकी या जेनेटिक्स(Genetics) एक विज्ञान है जो पूर्वजों के लक्षणों और गुणों के आधार पर आगामी पीढ़ियों को समझने का प्रयास करता है. इस विज्ञान के तहत पूर्वजों के जीन का विश्लेषण कर यह बताया जाता है कि अगली पीढ़ी में कौन सी बीमारी होने की संभावना है. पर जेनिटिक्स यह बताने में पूर्णरूप से सक्षम नहीं कि अमुक बीमारी उम्र के किस पड़ाव में हो सकती है पर डा. राजन का दावा है कि एस्ट्रोलॉजी( Astrology) यह बता सकता है कि आपके अंदर कौन से आनुवंशिक परिवर्तन या कौन सी बीमारी उम्र के किस पड़ाव में होगी. अगर ऐसा वास्तव में होता है तो यह मेडिकल सायंस के लिए एक क्रांतिकारी कदम होगा.

डा. राजन ज्योतिष के महत्व को आधुनिक दौर के वैज्ञानिक स्टिफेन हांकिंग (Steven Hawking) के कथन से जोड़ते हैं. वह कहते हैं हाकिंग जब भारत आये थे तो उनसे ज्योतिष के बारे में पूछा गया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा अगर हम अंतरिक्ष में ग्रहों और नक्षत्रों की वास्तविक गति को पता करने में सफल हो जायें तो ब्रह्मांड की कई घटनाओं का पूर्वानुमान कर सकते हैं. ज्योतिष इसमें एक सहायक कड़ी हो सकती है.

सरकारों के लिए ज्योतिष

डा.राजन तो यहां तक कहते हैं, अगर ज्योतिष शास्त्र के आधार पर सरकार के मंत्रियों का चयन हो तो भारत एक आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर सकता है. वह कहते हैं हालांकि यह विवादित मुद्दा हो सकता है. पर यह उनकी निजी राय है कि अगर हम मंत्रिमंडल का गठन करते समय ग्रह विशेष के विश्लेषण का ध्यान रखें तो देश का कई क्षेत्रो मे चतुर्दिक विकास हो सकता है.
उनके अनुसार प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह की कुंडली को देखें तो पता चलता है कि उनकी कुंडली में अर्थव्यवस्था से संबंधित ग्रह मजबूत अवस्था में हैं अत: वह अर्थव्युस्था से जुड़े मंत्रालय देखें तो देश को लाभ होगा. इसके पहले ऐसा हुआ भी. यह तर्क ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांत पर मुहर लगाता है.

वित्त् मंत्री के तौर पर उन्होंने काफी अच्छा काम किया भी है. जबकि आज मनमोहन सिंह पीएम के पद पर होने के बावजूद महत्वपूर्ण रोल नहीं निभा पा रहे हैं क्योंकि पीएम बनाने वाले योग, जिसमें दांवपेंच की भी जरूरत होती है, वह ग्रह उनमें नगण्य है. इस कारण वह सफल पीएम की जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं.

वह तर्क देते हुए कहते हैं मनमोहन सिंह के सितारे उनकी आर्थिक विशेषज्ञता बताते हैं. 1991 के बाद जिस तरह वह वित्त मंत्री बने तो देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया वह काफी सराहनीय है. इसका एक मात्र कारण उनके ग्रहों का अर्थव्यवस्था से संबंधित होना है.

डा.राजन के अनुसार जिस नेता का शनि स्ट्रांग हो अगर वह रेल मंत्री बने तो रेलवे का काफी विकास संभव है. इसी प्रकार मजबूत जुपिटर(Jupiter) वाले राजनेता अगर शिक्षामंत्री बनें तो शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावशाली विकास की संभावना है.

इसके अलावा ज्योतिष शास्त्र हमारे परिवार और हमारे बच्चों के भविष्य का पूर्व आकलन कर राष्ट्र के विकास में भी सहयोगकारी साबित हो सकता है बशर्ते इसका समुचित उपयोग किया जाये.

नोट: डा. राजन राज से ज्योतिष संबंधी कोई सलाह या सुझाव अगर आप लेना चाहें तो आप नीचे के कमेंट बॉक्स में लिखें. हम उनके जवाब के साथ प्रकाशित करेंगे. आप चाहें तो उनसे सीधा सम्पर्क भी कर सकते हैं.- dr.rajanraj@gmail.com, मोबाइल 09939279951. आप चाहें तो डा. राज की वेबसाइट. http://astroeffect.com/ का अवलोकन भी कर सकते हैं.

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