जैविक उद्यान्न, पार्कों व संरक्षित स्थलों पर हानिकारक प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित

अब पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान्न, इको पार्क व वन विभाग के अधीन अन्य पार्कों तथा संरक्षित स्थानों पर 50 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक बैग व थर्मोकोल से बने सामान के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दिया गया है. ये जानकारी आज विश्व पर्यावरण दिवस समारोह 2018 को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री सह पर्यावरण व वन मंत्री सुशील कुमार मोदी ने दी.

नौकरशाही डेस्‍क

उन्‍होंने कहा कि पटना के 100 बड़े स्टोर, मॉल व व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ बैठक कर उन्हें वन टाइम यूज (ONE TIME USE ) वाले प्लास्टिक व थर्मोकोल के सामानों की बिक्री नहीं करने तथा कागज, जूट, कपड़े आदि के थैले के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जायेगा. इसके अलावा सरकारी कार्यक्रमों, बैठकों आदि में भी प्लास्टिक के पानी के बोतल व थर्मोकोल से बने सामानों का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा.

उन्‍होंने कहा प्लास्टिक के पाउच व बोतल आदि के रियूज को बढ़ावा देने के लिए निर्माताओं व बिक्रेताओं को BUY BACK स्कीम शुरू करने के लिए प्रेरित किया जायेगा. सुधा डेयरी व वाटर बोतल पैकेजिंग करने वालों से सरकार अपील करेगी कि वह अपने बूथ व स्टोर के जरिए पाउच व बोतल को वापस खरीद कर उसका दुबारा उपयोग करें. प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के तौर पर बिहार की निर्माणाधीन सड़कों में उसका उपयोग शुरू कर दिया गया है. केन्द्र सरकार ने तय किया है कि 2022 तक भारत को सिंगल यूज प्लास्टिक के कचरे से मुक्त करना है. महाराष्ट्र सहित करीब आधे दर्जन राज्य सरकारों ने 50 माइक्रोन से कम के प्लास्टिक के उपयोग को प्रतिबंधित कर दिया है. अन्य राज्यों के अनुभवों के आधार पर बिहार में भी आने वाले दिनों में प्लास्टिक व थर्मोकोल से बनी सामग्री पर प्रतिबंध लगाने पर सरकार विचार करेगी.

 

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