जोश में है जनता, जारी रहेगी जंग

1980 बैच के आईपीएस पीके ठाकुर ने पिछले दिनों विजीलैंस के महानिदेशक का पद संभाला. वह हमारे सम्पादक इर्शादुल हक से विशेष साक्षात्कार में बता रहे हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अनवरत जंग जारी रहेगी क्योंकि जनता जोश में है, यही जरूत भी है.

भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसी आम जनता की उम्मीदों के लिए रौशनी की एक छोटी लौ, निगरानी विभाग में दिखती है.हर खास व आम जब व्यवस्था के बाबुओं के भ्रष्ट व्यवहार से थक जाता है, तो वह एक बार निगरानी का दरवाजा जरूर खटखटाता है.पर क्या सचमुच बिहार की जनता का भरोसा इस संस्था पर बढ़ा है? समाज को घुन की तरह खोखला कर रहे भ्रष्टाचार के दानव से निपटने के लिए यह विभाग कितनी तत्परता और कितनी जवाबदेही से काम कर रहा है ? यह सवाल खास तौर पर तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब इस विभाग में लम्बे समय बाद 1980 बैच के आईपीएस अफसर पीके ठाकुर को महानिदेशक बनाया गया है.ठाकुर ने इन तमाम मुद्दों पर हम से बात की. पेश हैं इसके खास अंश-.

” 500 मांग रहा है.. ठीक है .. हम करेंगे छापा मारी”- पीके ठाकुर एक कॉलर को जवाब देते हुए

ठाकुर साहब, महानिदेशक की जिम्मेदारी स्वीकार करने पर बधाई!! भविष्य की क्या योजना है, आम लोग भ्रष्टाचार से कराह रहे हैं. ले दे कर उनकी उम्मीदें निगरानी पर आ ठहरती हैं.

पीके ठाकुर-थैंक्स. देखिए समाज दो स्तरों पर भ्रष्टाचार का शिकार है. एक माइक्रो लेवल पर, दूसरा मैकरो लेवल पर. आम जनता जिस भ्रष्टाचार की चक्की में पिस रही है वह माइक्रो लेवल के तहत आता है. मैक्रो लेवल का भ्रष्टाचार बड़ी कम्पनी, ठेकेदार और फर्म आदि से जुड़ा होता है. इस स्तर के भ्रष्टाचार का प्रभाव आम तौर पर सरकार और संवैधानिक संस्थायें होती हैं. अमूमन इस से सीधे तौर पर आम जन पर बहुत प्रभाव नहीं पड़ता.

हमारा जोर दोनों स्तर के भ्रष्टाचार पर निगरानी रखने का है. पर आम जन, दिन रात जिस तरह भ्रष्टाचार से आहत है, हमारा पूरा ध्यान माइक्रो लेवल पर भी है.( अभी अपनी बात जारी ही रखते हैं कि पीके ठाकुर को एक फोन आता है. वह फोन उठाते हैं)
पीके ठाकुर-हैलो..
हां हां बताइए… अच्छा मुंगेर से.
कॉलर……
पीके ठाकुर-कितने पैसे मांग रहा है…?
कॉलर….
पीके ठाकुर-अच्छा.. 500
कॉलर……..
पीके ठाकुर- बिहार बोर्ड का क्लर्क है.. ठीक है. तो आप ऐसा करिए कि पटना हमारे मुख्यालय में आ जाइए. पूरी जानकारी के साथ.हम जरूर इस पर कार्रवाई करेंगे. ठीक है.
कॉलर……….
पीके ठाकुर- अच्छा मैं? मैं निगरानी डीजी बोल रहा हूं.. पीके ठाकुर.

(इतना कह कर पीके ठाकुर फोन रख देते हैं. और फिर उस कॉलर से, रिश्वत क्यों और कैसे मांगा जा रहा है उसकी डीटेल बताते हैं. हम इस मामले को गोपनीय इस लिए रखना चाह रहे हैं कि इससे निगरानी की कार्रवाई बाधित न हो)

हमारी बात चीत जारी रहती है….

आम जनता सीधे पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी को फोन करे तो लोगों की जागरूकता और बेचैनी दोनों समझी जा सकती है, है न?

पीके ठाकुर- हां आप समझ सकते हैं. लोग कितने जागरूक हैं और कितने आहत भी.

2009 में एक्ट बनाकर निगरानी को और सशक्त किया गया है. पिछले दो तीन सालों में कितना फर्क पड़ा है, भ्रष्टाचार के सर को कुचलने में?

पीके ठाकुर- भ्रष्टाचारियों की सम्पत्ति जब्त करने का सीधा असर तो दिख रहा है. अभी तक पांच लोगों की सम्पत्ति जब्त की गई. दो के घरों में तो अब सरकारी स्कूल भी खुल गया. पर सबसे बड़ी बात यह है कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए कई स्तर पर कार्रवाई चल रही है. जैसे राइट टू सर्विस ऐक्ट के लागू होने से कई छोटे-छोटे भ्रषटाचार की शिकायते काफी कम हो गई हैं. जैसे दाखिल-खारिज, प्रमाण पत्र आदि के मामले में ही लें. बड़ी शिकायतें आती थीं. अब इस मामले में शिकायते न के बराबर आ रही हैं. मतलब लोगों का काम नियत समय पर बिना रिश्वत दिये होने लगा है.
सच कहें तो भ्रष्टाचार के मामले में टेंडरिंग की प्रक्रिया सार्वजनिक होने से बड़े भ्रष्टाचार में कमी आयी है.( यह निगरानी की उपलब्धि नहीं है). पर समाज में अब सिस्टेमेटिक चेंज आया है.

इसके लावा नगरानी की कार्रवाई से और क्या फर्क दिख रहा है?

पीके ठाकुर- भ्रष्टाचार से लड़ाई एक अनवरत जंग है. एक बार निगरानी का छापा कहीं पड़ता है. अधिकारी या कर्मचारी पकड़े जाते हैं तो उसका व्यापक प्रभाव कुछ दिनों और कुछ इलाकों में दिखता है. इस भ्रष्ट लोगों में खौफ बढ़ता है तो दूसरी तरफ जनता का उत्साह और भरोसा सिस्टम पर बढ़ता है. पर यह अनवरत जंग जारी रखने की जरूरत है.

साइबर युग ने जिस तरह से हमारे समाज पर प्रभाव डाला है, अब भ्रष्टाचार और अपराध भी हाइटेक हो गये हैं. इसके लिए आपका विभाग तकनीकी रूप से कितना तैयार है?

पीके ठाकुर- गाजीआबाद में सीबीआई एकेडमी है. हमारे अफसर नियत समय पर वहां जा कर साइबर क्राइम पर लेटेस्ट ट्रेनिंग लेते रहते हैं. इसके अलावा जो महत्वपूर्ण बात है वह यह कि हमारा अब डेडिकेटेड कैडर भी होगा. अगले अप्रैल से हम इसके लिए नियुक्ति भी करने वाले हैं. डेडिक्टेड कैडर की खास बात यह है कि हमारी मैन पावर की कुल स्ट्रेंथ का एक तिहाई अधिकारी डेडिकेटेड कैडर के तहत आयेंगे, यानी इनका तबादला नहीं होगा. क्योंकि तबादला होने के कारण विभाग उनकी विशफज्ञता से वंचित हो जाता है. ऐसा करने से हमारी टीम में दक्षता और बढ़ेगी.

तो क्या इतना बड़ा काम अंजाम देने के लिए आवश्यक मैन पावर और, संसाधन आदि हैं आपके पास ?

पीके ठाकुर- देखिए लगातार लोगों की उम्मेदें निगरानी से बढ़ती ही जा रही हैं. अभी आपने देखा कि कैसे एक आम आदमी ने सीधे मुझे फोन लगाया. वह चाहता है कि कार्रवाई शीघ्र हो. इसलिए मैन पावर संसाधन की जरूरत पर लगातार बढ़ती ही जा रही है. 2009 में हमारे विभाग की स्ट्रेंथ बढ़ी थी. संसाधन( आर्थिक भी) भी बढ़े हैं. लेकिन इसमें और इजाफा की जरूरत तो है ही.

आप कुछ ही दिन पहले निगरानी के महानिदेशक बने हैं. लेकिन इस विभाग में बतौर अपरमहानिदेशक आप दो साल से हैं. इन दो सालों की क्या उपलब्धि मानते हैं?

देखिए हमारी लड़ाई चोर उचक्कों, डाकुओं या लुटेरों से नहीं है. हमारी जंग पढ़े-लिखे, बौधिक तौर पर उच्च स्तर के वैसे भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मियों से है जो अपने अधिकारों को ब खूबी जानता है. वह जानता है कि कानूनी लड़ाई कैसे लड़ी जाती है. इसलिए लड़ाई की शुरूआत तो हम करते हैं. पर असल लड़ाई अदालतों तक जाती है. और यह निचली अदालत से होती हुई यह लड़ाई ऊपर की अदालत, कभी कभी सुप्रीम कोर्ट तक जा सकती है. ऐसे में उपलब्धियों को भौतिक रूप में गिनना उचित नहीं है. हम उपलब्धि यही मानते हैं कि पिछले दो सालों में आम जनता का भरोसा निगरानी पर बढ़ा है. लोगो सीधे हम तक शिकायत पहुंचाते हैं. कार्वाई होती है. हम अपने भरोसा को और मजबूत करना चाहते हैं.

आखरि सवाल. एक पुलिस अधिकारी से अलग भ्रष्टाचार के संस्कार और हमारे समाज के चरित्र पर आप क्या सोचते है, कितनी निराशा है, आगे क्या उम्मीदे हैं?

देखिए अब चीजें बड़ी तेजी से बदल रही हैं. आज के युवा ईमानदारी और मेहनत पर भरोसा करते हैं. उन्हें यह स्वीकार्य नहीं कि वह किसी को रिश्वत दे कर अपना काम करायें. जब रिश्वत नहीं देने की भावना प्रबल होने लगे तो निश्चित तौर पर ऐसे लोग रिश्वत लेना भी बुरा समझने लगे हैं. बल्कि मैं तो कह रहा हूं कि नई पीढ़ी अपने मां-बाप को यह कहने में संकोच नहीं करती कि वे रिश्वत न लें. हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोनलन में युवाओं ने जिस तर स बढ़चढ़ कर भाग लिया यह एक आशावादी भविष्य की निशानी है. पर यह भी सच है कि यह लड़ाई अभी बहुत लम्बी और अनवरत चलने वाली है.

ओके… बहुत बहुत शुक्रिया आपका
पीके ठाकुर- आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद.

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