जो मोदी के खास, वही पास

मोदी की टीम में सब मर्द, ना किसी महिला को जगह ना किसी छत्तीसगढिय़ा को, यूपी से सबसे ज्यादा चेहरे, आडवाणी समेत सबके चहेतों को लगाया किनारे, यही टीम बांटेगी टिकट

नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी

देशपाल सिंह पंवार

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर जिस तरह भाजपा में गदर मचा था वो ऊपर से भले ही शांत नजर आता हो लेकिन अंदरखाने अब तक एल के आडवाणी कैंप में उबाल है। मोदी का पार्टी की चुनाव अभियान समिति का मुखिया बनना जितना दुखदायक इस खेमे के लिए रहा, अब उससे ज्यादा पीड़ा मोदी देने जा रहे हैं. मोदी ने अपनी टीम का ऐलान कर दिया है। टीम में वही चेहरे शामिल हैं जो मोदी को पसंद हैं और आडवाणी को नापसंद.
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आडवाणी को भी दिखाया ठेंगा

यूपी सबसे आगे है तो छत्तीसगढ़ से किसी चेहरे को मोदी की चुनाव अभियान समिति में जगह ही नहीं मिली है. आडवाणी समेत हर खेमे को ठेंगा दिखा दिया है. यानी अब भाजपा इस मौजूदा दल नायक के हिसाब से ही चलेगी. किसी महिला को भी जगह नहीं मिली है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस बार टिकट वितरण में केवल मोदी एंड कंपनी की ही चलेगी. खुद पार्टी में इस बात की किसी को उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी मोदी अपनी टीम का ऐलान कर देंगे. यह भी कहा जा रहा है कि टीम बनाते वक्त मोदी ने किसी से सलाह मश्विरा तक नहीं किया।.टीम में नरेंद्र मोदी जो खुद चेयरमैन हैं उनके अलावा अमित शाह, वरुण गांधी, राजीव प्रताप रूढ़ी, मुख्तार अब्बास नकवी, धर्मेंद्र प्रधान, सुधांशु मित्तल, मुरलीधर राव और राम लाल को रखा गया है.

एक भी नेता ऐसा नहीं है जो मोदी का खास ना हो और मोदी को टक्कर देने की स्थिति में हो. सब तकरीबन युवा हैं. सिर्फ वही जगह बना पाए जो मोदी के खास हैं या पिछले कुछ महीनों में मोदी की गुड बुक में शामिल हो गए. संघ कोटे से भी वही स्थान बना पाए जिनके रिश्ते मोदी के साथ ठीक-ठाक हैं. सुरेश सोनी जैसों को किनारे लगा दिया गया. आडवाणी सुरेश सोनी से ज्यादा रामलाल से नाराज थे लेकिन वो मोदी की टीम में हैं. रामलाल के अलावा मुरलीधर राव संघ से हैं. सुरेश सोनी से कम विवादित होने और मोदी के नजदीकी होने की वजह से वो इस टीम का हिस्सा हैं. हां ये कहा जा सकता है कि राजनाथ के समर्थन की वजह से ही सुधाशुं मित्तल जगह बना पाए. मित्तल के लिए ही राजनाथ सिंह ने पिछले कार्यकाल में अरुण जेटली से पंगा ले लिया था.

फिर हिंदुवाद की राह

इस टीम की पहली बैठक की डेट भी फाइनल हो गई है. 4 जुलाई-उस दिन सब बैठेंगे. रविशंकर प्रसाद और शाहनवाज हुसैन तक सब देखते रह गए. शाहनवाज और रविशंकर को आडवाणी समर्थक माना जाता है. इसी का खामियाजा उन्होंने उठाया. इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ से भी कोई नेता इस कमेटी में स्थान नहीं बना पाया. अमित शाह और वरुण गांधी का टीम में होना दर्शाता है कि अगले चुनाव में पार्टी की नीति और रीति कैसी होगी?यानी हिंदुवाद की राह पर. अमित शाह को यूपी सौंपा गया है. वहीं पर वरुण गांधी की आक्रामक छवि को पार्टी कैश कराएगी. वरुण गांधी को तराई बैल्ट के अलावा हर उस सीट पर भेजा जाएगा जहां वोटों के ध्रुवीकरण की जरा भी गुंजाइश है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस बार टिकट वितरण में ना तो संघ की चलेगी और ना ही राजनाथ और बाकी नेताओं की. कारण ये भी बताया जा रहा है कि शाह को टारगेट दिया गया है कि फ्री हैंड मिलेगा लेकिन मोदी के यूपी से लडऩे की वजह से सीटें तीन गुणा बढऩी चाहिएं. फिलहाल यहां भाजपा दस पर है. माना जा रहा है कि यूपी के जितने भी नेता हैं सब चुके हुए हैं. उनमें ना तो अखिलेश से टक्कर लेने की स्थिति है और ना ही मायावती से. लिहाजा युवा ही नैया पार लगाएंगे लिहाजा वरुण गांधी सबसे आगे। जातिगत समीकरणो की वजह से सांसद मुख्तार अब्बास नकवी को जगह दी गई. राजीव प्रताप भी निर्वासन से निकल आए हैं. यानी बिहार पर भी मोदी का खास ध्यान रहेगा लेकिन पुराने और आडवाणी समर्थक चेहरों से दूरी बनाते हुए.

धर्मेंद्र प्रधान ओडिशा के हैं और बिहार के प्रभारी इस वजह से मोदी संगठन के सिपाही होने के नाते टीम में हैं. मोदी के साथ उनकी टयूनिंग काफी पुरानी है और इसका इनाम प्रधान को मिला. मोदी की ये टीम देखकर लोग कह रहे हैं कि पहले जिस पर संघ का हाथ वो बड़ा पर अब जिस पर मोदी का हाथ वही भाजपा में जगन्नाथ. छत्तीसगढ़ से इस टीम में आने के लिए तो तकरीबन कई लालायित थे लेकिन किसी को जगह नहीं मिलने से ये माना जा रहा है कि मोदी की नजर में इस लायक कोई नहीं.

किसी महिला को टीम में ना लेना भी कुछ नेताओं को खटक रहा है।

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