जो लालू मुखिया का चुनाव नहीं लड़ सकते उनसे संघी मीडिया व भाजपा इतना भयभीत क्यों हैं?

जब से भारतीय राजनीती में लालू यादव जी का अभ्युदय हुआ है तब से लेकर आज तक कम से कम बिहार में लालू यादव के आस पास ही राजनीती -समाज का केंद्र रहा है |
रंजन यादव
जब लालू राबड़ी सत्ता में थे तो एक भ्रामक प्रचार तंत्र बना कि यह जंगलराज है | सामंतो के लाठी मजदूरी के शरीर पर मारना एक सपना सा हो गया ,गरीब लाचार लोगो को उनके काम के बदले पैसे मिलने लगे और दारोगा बाबू एक आवाज पर FIR दर्ज करने लगे .
इस तरह के तमाम ऐसे काम होने लगे जो सदियों से एक अराजक -असंविधानिक परम्परा का वाहक बने हुए थे | दुसरे शब्दों में कहिये तो कुछ वर्ग विशेष के जंगल राज समाप्त हुए जिसके लिए उन्हें यह सामाजिक न्याय की सत्ता को जंगलराज कहकर कुप्रचारित करने लगे | जंगलराज के इस कुप्रचार में खास वर्ग के सत्तावादी संसथान के अलावे बुद्धिजीवी पत्रकार ,मीडिया और कार्पोरेट ने भी खूब साथ निभाया |
लालू यादव भारतीय संविधान के अनुसार मुखिया भी नही बन सकते, फिर भी विरोधियों को इतना डर ? इतनी चर्चा ? टीवी से लेकर अखबार तक ! हर जगह सिर्फ लालू ही समस्या । लालू के अलावे देश मे सब ठीक है । तो यही बात तो लालू को मजबूत बनाती है । 
 
 
कुछ उदाहरणों से लालू और भारतीय राजनीति को समझने का प्रयास करे ।
 
यह लालू यादव की ही सरकार थी जिसको हटाने के लिए दिल्ली से सेना बुलाने की बात की गई थी । 
बतौर रेल मंत्री
 
भारतीय रेल को लालू यादव जी ने कहा से कहा लाकर खड़ा कर दिए थे । हार्वर्ड तक ने इनके अभिभाषण को सुनना चाहा, और यह समझना चाहा कि रेल इतना फायदे में कैसे रहा ? लेकिन इस देश मे इस व्यक्ति को सम्मान नही मिला । अब तो रेलवे को बेचने की नौबत आ चुकी बै जबकि रेलवे को 25 हजार करोड़ का वार्षिक लाभ देने वाले लालूजी ने ( भक्तों की सोच देखिए कि) चारे घोटाले का पैसा रेल को दे दिया था :
दूसरी तरफ एक रेलमंत्री थे एक कांग्रेस के रेलमंत्री थे, बंसल साहेब नाम था । अपने नाती को वे 1200 करोड़ का ठेका एलॉट कर दिया । देश मे किसी को आपत्ति नही हुई । वर्तमान रेलमंत्री नौटँकी की हद मचा चुका है । हर दिन सिर्फ किराया बढ़ाता है, लेकिन सुबिधा ? देश मे औसतन ट्रेने 7 घण्टे देरी से चल रही है । और तो और चलते चलते किराया बढ़ा दिया जाता है ।
वर्तमान रेल मंत्री की नौटंकी
हरामखोरी की हद तो तब होती है जब आपको रेलवे अब यह कह रहा है कि सब्सिडी छोड़ दीजिए । यह राष्ट्रवाद का नया शिगूफा है । मजे की बात की दल और पार्टी की भक्ति में हम रेल के सरकारी पाप को भूले जा रहे है । इनके पाप के लिए लड़ रहे है । जबकि लड़ना तो इन हरामखोरो से चाहिए था ।
लालू के घर सबीबीआई को मिला क्या, बताओ तो
दिक्कत ठेके के आवंटन को लेकर है । लेकिन इसमें भी पेंच है । स्पष्टता तो इसमें भी नही दिखाया गया है । चारा घोटाले की तरह इसमें भी अफसरशाही का गलत प्रयोग किया गया है । समझने वाली बात है कि Irctc का गठन 1999 में हुआ और 2004 में रेलमंत्री बना, ठेके का स्रोत स्पष्ट होने चाहिए । सीबीआई को बताना चाहिये की लालू जी के घर से सीबीआई को क्या मिला ? पिछली बार भी 22 ठिकाने की गलत न्यूज़ ब्रॉडकास्ट हुई थी । लेकिन किसी ने उसका नाम नही बताया । अब यह तो सिर्फ बदनामी ही हुई न ?
तड़ीपार अमित शाह किसके पैसे से हेलिकॉप्टर उड़ाते हैं
बाई द वे नितिन गडकरी का पेट किन विधियों से इतना बड़ा हुआ इसका रिसर्च कौन करेगा ? एक तड़ीपार आज दिन रात हेलीकाप्टर किस आमदनी से उड़ाता है इसका खबर कौन लेगा ? और irctc का ही मामला है तो कायदे से तो तत्कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेयी को कटघरे में लेने चाहिये । लेकिन इतना औकात किसमे है ?
लालू यादव में तमाम दिक्कत हो सकती है । लेकिन एक बेहतर मंत्री के लिए तो याद कर सकते है न ?
और हमे सिखाया जाता है कि मैं जातिवादी हुँ । बताइये – हाजमोला किसको खाने की जरूरत है ? इतनी गन्दी बाते कौन पचा रहा है ?
 
भारतीय संसद में लालू यादव अपने अलग अन्दाज के लिए जाने जाते रहे है । लोकपाल से लेकर आरक्षण तक के मुद्दे को जितनी बारीकी से लालू यादव समझा दिया करते थे, यह अपने आप मे अनोखा था ।
 
उनके लिए चीन व पाकिस्तान से बड़ा खतरा हैं लालू
फिर लालू यादव संसद में जाने से रोके गए । जातिवादी मरीजों के अंदर उल्लास हुआ । संसद में आडवाणी जैसे लोगो की विरासत निरंकुश हुआ । आप विचार कीजिये की लोकसभा में आज लालू जी होते तो क्या जातिवादी गिरोह इतनी आसानी से कोई भी बात मनवा लेती ? क्या ये लोग बकवास कर लेते ?
मै यह सब क्यो लिख रहा हूँ ? हमे तो देश की न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए । मोर के आँशु से गर्भधारण करती न्यायपालिका का सम्मान ही तो करना चाहिए । मण्डल कमीशन के रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए कुटिल मुस्कान बिखेरते एटॉर्नी जनरल और जज का सम्मान तो करना ही चाहिये ।
कई बातें है जो लालू को महान बनाती है । बाकी जेल – सीबीआई ये सब कौन सी नई बात है ? जितना ज्यादा जेल उतनी ही मजबूती ।
विचारणीय होगा कि न्यूज चैनलों से आज चीन क्यो गायब है ? पाकिस्तान कब धूल में मिलेगा ? इजरायल से ड्रोन कब चलेगा चीन की ओर … विश्व मे भारत का डंका आज क्यो नही बज रहा है ?
मैने कहा था न कि ” चीन और पाकिस्तान से भी बड़ा खतरा लालू यादव जी है”…
 
मैं तो लालू के अग्रज नेतृत्व तेजस्वी यादव से विशेष उम्मीद नही रखता लेकिन कहना चाहूंगा कि तेजस्वी यादव जब अपना इतिहास लिखेगे तो वे नब्बे से शुरू करेंगे । लेकिन मैं कहता हूं उन्हें 70 से लिखना चाहिये । 70 से ही असल जाल है । भगवान जगन्नाथ की
 
महिमा इधर से ही शुरू होती है । आज भी जगन्नाथी लोग अपने जाति चरित्र को सामने ला ही रहे है ।
नब्बे की कहानी मण्डल और मंदिर में सिमट जाती है । आडवाणी की रथ पर नब्बे दम तोड़ देता है । लेकिन 70 में जातिवाद का असल खेल स्पष्ट होता है ।
अफसोस तेजस्वी तो मोदी के 2014 तक सीमित है । मोदी तक सीमित रहेंगे तो आप को खत्म होने ही है ।
आइये 70 वाले कोड को डिकोड करे । बहुत दिलचस्प है 70 वाला युग ।
किन किन पहलुओ को लिखा जाए । इसके लिए तो किताबो की सीरीज लिखनी होगी लेकिन इतना तो मोटे तौर पर समझा जाये कि
यह लालू यादव की ही सरकार थी जिसको हटाने के लिए दिल्ली से सेना बुलाने की बात की गई थी । और यह लालू यादव ही है जिसको संसद में जाने से रोकने के लिए देश का संबिधान बदल दिया जाता है ।
आपको फिर भी सब कुछ सहज लगता है तो मैं क्या कर सकता हूँ ?
 
रंजन यादव सामाजिक कार्यकर्ता हैं

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