‘टीम प्रशांत’ ने फंसाया नीतीश को !

रहीमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाए।

टूटे पर ना जुटै, जुटै गांठ पड़ी जाए।unnamed

राजनीति की गांठ और गांठ की पीड़ा से अभी नीतीश कुमार और लालू यादव उबर भी नहीं पाए थे कि ‘रहीम के दोहे’ ने दोनों के बीच बन रहे विश्‍वास को तार-तार कर दिया। भाजपा के हमले को झेल रहे लालू-नीतीश भाजपा से मुकाबले के बजाय खुद के बचाव में उतर आए। दोहे की व्‍याख्‍या करने लगे और ‘भुजंग’ को भाजपा से जोड़ दिया।

वीरेंद्र यादव

जरूर पढ़ें क्या ही नीतीश का ट्विटर विवाद

लेकिन सवाल यह है कि नीतीश कुमार के ट्विट को लेकर उठा विवाद प्रायोजित है या स्‍वाभाविक। क्‍या नीतीश कुमार के लिए कंपेन में जुटे ‘टीम प्रशांत’ ने हड़बड़ी में विवादस्‍पद ट्विट डाला है या प्रायोजित ढंग से। सवाल और उसके उत्‍तर बता रहे हैं कि यह सारा ट्विट करीब एक घंटे में डाला गया है यानी पूर्व में प्राप्‍त ट्विट का उत्‍तर पहले से तैयार कर लिया ग‍या था, सिर्फ मंगलवार को अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नीतीश कुमार के एकाउंट से उसे पोस्‍ट किया गया है। करीब एक घंटे ‘आस्‍क नीतीश’ कार्यक्रम में 45 सवालों पर रिट्विट किया गया है। सभी के सभी पोस्‍ट अंग्रेजी व रोमन में हैं, सिर्फ विवादास्‍पद दोहे को छोड़कर।

 

सिर्फ दोहा हिंदी में

इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि यह हड़बड़ी का नतीजा है। या इस दोहे के असर से नीतीश कुमार अनभिज्ञ रहे होंगे। जिस पोस्‍ट के साथ दोहा डाला गया है, उसका अंग्रेजी उत्‍तर पर्याप्‍त है। इसके बावजूद हिंदी में रहीम का दोहा पोस्‍ट अकारण नहीं होगा। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मीडिया में नरेंद्र मोदी की यात्रा को मिल रहे कवरेज को अंडरप्‍ले करने के लिए भी यह अभियान हो सकता है। लेकिन इस पर ज्‍यादा भरोसा नहीं किया जा सकता है। क्‍योंकि नीतीश कुमार लालू यादव पर इतना तीखा प्रहार नहीं कर सकते हैं कि लालू व उनके समर्थकों को आहत कर जाए।

 

बिहार की समझ नहीं कंपेन टीम को

दरअसल नीतीश कुमार की कंपेन टीम में जुटे शीर्षस्‍थ कंपेनरों को न बिहार की समझ है और न बिहारी सामाजिक यर्थाथ की। टीम में शामिल लगभग सभी लोग परंपरागत रूप से लालू यादव की शैली के मजाक उड़ाने वाली पृष्‍ठभूमि से आते हैं। यही वजह है कि नीतीश के ट्विट कंपेन को भी हल्‍के अंदाज में लिया और नीतीश को बड़ी फजीहत में डाल दी। हालांकि इस विवाद की आयु लंबी नहीं होगी। एकाध दिन बाद नया मुद्दा आएगा और विवाद ढक जाएगा। लेकिन विवाद से लगे घाव को लालू व नीतीश दोनों लंबे समय तक सहलाते रहेंगे।

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