डिग्रियां प्रदान करने वाली शिक्षा से नहीं चरित्र-निर्माण की शिक्षा से देश बनेगा : न्यायमूर्ति

पटना- डिग्रियां प्रदान करने वाली शिक्षा से देश उन्नति के मार्ग पर नही बढ सकता। चरित्र-निर्माण करने वाली शिक्षा उसमें जोड़ा जाना आवश्यक है। इसके अभाव में कोई भी गुण लाभकारी होने के स्थान पर अनिष्ट कारी हो जाता है। आज युवा-पीढी को लालसा की महत्त्वाकांक्षा की अंधकार मय मार्ग पर जिस प्रकार दौड़ाया जा रहा है, वह अत्यंत विनाशकारी है। निष्ठावान और चरित्रवान गुणी युवाओं को तैयार करने का लक्ष्य शिक्षा-संस्थानों का होना चाहिए।IMG_4244

यह विचार आज यहां, बेउर,पटना स्थित इंडियन इंस्टिच्युट औफ़ हेल्थ एजुकेशन ऐंड रिसर्च के 27वें शैक्षणिक-सत्र का उद्घातन करते हुए, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेन्द्र प्रसाद ने व्यक्त किये। श्री प्रसाद ने कहा कि, साक्षरता शिक्षा नहीं है। चरित्र-निर्माण की शिक्षा हीं शिक्षा हो सकती है। छात्र-छात्राओं को निष्ठापूर्वक अपनी शिक्षा ग्रहण करते हुए, स्वय को चरित्रवान और मनुष्य बनने का प्रयास करना चाहिए।

समारोह के मुख्य अतिथि और नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रास बिहारी सिंह ने कहा कि, किसी भी संस्थान का नाम-यश, उसके छात्र-छात्राओं के कार्यों और समाज में उनकी सेवा और सफ़लता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि, देश का युवावर्ग कुल आबादी का 60 प्रतिशत है,जो वास्तव में इस देश की शक्ति है। किंतु दुर्भाग्यs से इनमें से केवल 23 प्रतिशत युवा हीं उच्च सिक्षा के लिए आगे आते हैं। बिहार प्रांत में यह प्रतिशत और भी कम मात्र 13 है। उन्होंने छात्र-समुदाय से अपनी भूमिका को ठीक से समझने तथा राष्ट्रहित में अपना योगदान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

मगध विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो सीताराम सिंह ने कहा कि संस्थानों का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण-शिक्षा प्रदान कर समाजोपयोगी तथा जीवन में सफ़ल बनाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ थोड़े से लोगों के कारण बिहार की वदनामी हुई है। इस कलंक को मिटाने के लिए, हमें हीं आगे आना होगा। बिहार ने राष्ट्र के निर्माण में बड़ी भूमिका दर्ज करायी है। उन्होंने विकलांगों के पुनर्वास तथा स्वास्थ्य-सेवाओं में तकनीकी- शिक्षा के क्षेत्र में, इस संस्थान के कार्यों की सराहना करते हुए, विश्वविद्यालय की ओर से हर संभव सहयोग करने का आश्वासन दिया।

सभा की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक-प्रमुख डा अनिल सुलभ ने विगत 27 वर्षों के संस्थान की उपलब्धियों और संघर्षों की चर्चा की तथा बताया कि यह विकलांगता और अर्द्धचिकित्सकीय सेवाओं में प्रशिक्षण प्रदान करनेवाला देश का पहला मान्यता प्राप्त संस्थान है। अपने निष्ठापूर्ण शैक्षणिक-कार्यक्रमों तथा स्वास्थ्य व पुनर्वास शिविरों के मध्यम से इसने पीड़ित मानवता की जिस प्रकार सेवा की है, वह एक इतिहास है।

इस अवसर पर बाल संरक्षण आयोग की पूर्व अध्यक्ष निशा झा, प्राइवेट स्कूल एवं चिल्ड्रेन वेलफ़ेयर एसोसियेशन बिहार के अध्यक्ष डी के सिंह तथा आनंद मोहन झा ने भी अपने विचार व्यक्त किये। अतिथियों का स्वागत डा तपसी ढेंक ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन सुबेदार मेजर एस के झा ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में संस्थान मे शिक्षक एवं छात्रगण उपस्थित थे।

 

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