डीएसपी प्रोमोशन: कहीं खुशी कहीं मातम

बिहार में इंस्पेक्टरों का डीएसपी में प्रमोशन जहां सौ परिवारों में खुशियों की सौगात लाया है वहीं दर्जनों परिवार ऐसे हैं जिन्हें इसका मातम भी है.dsp

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राज्य सरकार ने 6 दिसम्बर को 104 इंस्पेक्टरों को प्रोमोट करते हुए डीएसपी बना दिया है. इंस्पेक्टरों का डीएसपी के बतौर प्रोमोशन एक नियमित प्रक्रिया है जो समान्यत: हर साल किया जाता है लेकिन पिछले पौने तीन सालों से यह रुका पड़ा था. इसका असर कम से कम तीन दर्जन से ज्यादा इंस्पेक्टरों पर पड़ा है जो प्रोमोशन का सपना पाले रिटायर हो गये.

सब इंस्पेक्टर के पद पर बहाली के बाद जूनियर स्तर के पुलिस अधिकारी का सबसे बड़ा सपना डीएसपी बनने का होता है. कुछ तेज तर्रार अधिकारियों को कम समय में प्रोमोशन का लाभ तो मिल जाता है लेकिन टाइम बाउंड प्रमोशन की आस में कई अधइकारी अपने कार्याकल के आखिरी पड़ाव में डीएसपी बनते हैं. लकिन इसबरा ऐसा नहीं हो सका.

2011 के फरवरी के बाद से अब तक यानी पौने तीन सालों से प्रोमोशन नहीं होने के कारण जो इंस्पेक्टर पिछले सितम्बर तक रिटायर कर चुके हैं उन्हें इससे झटका लगा है. उन रिटायर अधिकारियों को बड़ा आर्थिक नुकसान तो उठाना ही पड़ा है साथ ही वे इस एहसास से भी वंचित हो गये कि वे सेवानिवृत्त डीएसपी हैं.इसके अलावा उन्हें पेंशन में भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है. अगर वह कुछ महीनों या दिनों के लिए भी डीएसपी बन गये होते तो इससे उनके बेसिक वेतन के आधार पर पेंशन में भी काफी लाभ हुआ होता.

शुक्रवार को 104 इंस्पेक्टरों के प्रोमोशन के बाद राज्य में डीएसपी की कुल संख्या 405 हो गयी है. दूसरी तरफ बिहार लोक सेवा आयोग से इस वर्ष 36 डीएसपी स्तर के अधिकारियों का चयन हुआ है जो जल्द ही ज्वाइन करने वाले हैं. इसके बावजूद कम से कम 65 डीएसपी के पद अभी भी खाली हैं. राज्य में डीएसपी स्तर के सृजित पदों की संख्या 500 के करीब है.

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