तारा शाहदेव मामले का जिन्न बाहर, उन्मादी मीडिया हुआ अपमानित

अदालत की एक कार्वाई के बाद तारा शाहदेव और कथित रकीबुल हसन मामले में साम्प्रदायिक उन्माद फैलान की कोशिश में लगे चैनलों और अखबारों को अपमान का घूट पीना पड़ा है.

तारा शाहदेव

तारा शाहदेव

नौकरशाही डेस्क

रंजीत कोहली जिसे मीडिया के एक हिस्से ने लगातार ‘रकीबुल हसन’ के नाम से प्रचारित किया थ  , अब उस के खिलाफ तारा शाहदेव का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का केस नहीं चलेगा.

तारा शाहदेव मामला:लव जिहाद रटने वाले अखबारों ने बदला सुर

 

गौरतल है कि पिछले अगस्त महीने में नेशनल शूटर तारा शाहदेव  और रंजीत सिंह कोहली की शादी को कुछ मीडिया ने ‘लव जिहाद’ घोषित करते हुए इसे साम्प्रदायिक रंग देने की पूरी कोशिश की. लेकिन  रांची के सीजेएम अदालत ने  इन आरोपों को शुक्रवार को सिरे से खारिज करते हुए इस मामले को महज दहेज प्रताड़ना का मामला पाया है.

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रंजीत कोहली- मुस्लिम होने का सुबूत नहीं

मुख्य न्यायिक दंडादिकारी नीरज कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने शुक्रवार को  तय किया कि तारा शाहदेव और रंजीत कोहली के मामले में सिर्फ दहेज प्रताड़ना का केस चलेगा.

इस मामले को लव-जिहाद की रट लगाने वाले अखबारों, टीवी चैनलों और कुछ उन्मादी संगठनों की किरकिरी तो तब और हो गयी जब इस मामले की जांच के बाद जांच अफसर ने पाया कि रंजीत कोहली का किसी भी दस्तावेज में ‘रकीबुल हसन’ नाम नहीं है.

नौकरशाही डॉट इन अपनी खोजी रिपोर्टों के जरिये यह उद्भेदन करता रहा कि इस मामले में कैसे कुछ साम्प्रदायिक संगठन और कुछ मीडिया से जुड़े पत्रकार झूठी खबरें फैलाते रहे. नौकरशाही डॉट इन की  लीक से हट कर लगातार आ रही खबरों से झुल्लाये अनेक पत्रकारों ने तब काफी आलोचना भी की, जबकि हमारे हजारों पाठकों का स्नेह हमे मिलता रहा.

नौकरशाही डॉट इन की रिपोर्ट पर लगी मुहर

नौकरशाही डॉट इन ने लगातार इस मामले को उठाया और अपनी रिपोर्ट में बताया कि इस मामले की हकीकत क्या है. लेकिन मेनस्ट्रीम मीडिया का एक हिस्सा इसे लविजहाद घोषित करता रहा. इस के कारण पूरे झारखंड में साम्प्रदायिक तनाव की हालत बनी रही. कुछ अखबारों और टीवी चैनलों की इस गैरजिम्मेदाराना रिपोर्टिंग से दो समुदायों की बीच काफी हद तक वैमनस्य भी बढ़ गया.

लेकिन इस मामले को जब अदालत में लाया गया और जब इसकी जांच कर रहे आईओ हरिश चंद्र सिंह ने जांच के बाद  चार्रिजशीट  अदालत को सौंपी तो सारा नजारा ही बदल गया. रंजीत कोहली के वकील  अविनाश पांडेय ने रांची में अखबारों के नुमाइंदों को बताया है कि आईओ हरीश चंद्र सिंह की तरफ से  अदालत को सौंपी गयी चार्जशीट में तारा शाहदेव को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने या जबरन धर्म परिवर्तन कराने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है.

इतना ही नहीं अनुसंधान के क्रम में जो भी दस्तवेज पुलिस को हाथ  लगे हैं उनमें रंजीत सिंह कोहली का नाम सिर्फ रंजीत सिंह कोहली ही  पाया गया है. जब कि यह याद दिलाने की बात है कि उस समय कुछ अखबारों ने यह झूठी खबर फैलायी कि निकाह के दस्तवाजे में रंजीत सिंह कोहली का नाम रकीबुल हसन है.

जबकि इस मामले के प्रकाश में आने के बाद से ही आपके लोक प्रिय न्यूज वेबसाइट नौकरशाही डॉट इन  अपनी खोजी रिपोर्टों को जरिये यह उद्भेदन करता रहा कि इस मामले में कैसे कुछ साम्प्रदायिक संगठन और कुछ मीडिया से जुड़े पत्रकार झूठी खबरें फैलाते रहे. नौकरशाही डॉट इन की  लीक से हट कर लगातार आ रही खबरों से झुल्लाये अनेक पत्रकारों ने तब काफी आलोचना भी की, जबकि हमारे हजारों पाठकों का स्नेह हमे मिलता रहा. कई बार तो कुछ लोगों ने हमारे सम्पादक के खिलाफ भद्दी टिप्पणी भी हमें भेजी. लेकिन नौकरशाही डॉट इन सच लिखने के अपने मिशन पर डटा रहा.

सुबूत के तौर पर  हम नौकरशाही डॉट इन की उन तमाम खबरों के लिंक को यहां दे रहे हैं ताकि हमारे पाठक उन्हें फिर से देख-पढ़ सकें.

 

नौकरशाही डॉन इन ने शुरू से ही इस मामले पर बारीक नजर रखी और इस नतीजे पर पहुंचा कि रंजीत कोहली ने अपनी पत्नी तारा शाहदेव को प्रताड़ित किया. और कुछ नहीं. इसलिए उसके खिलाफ प्रताड़ना का केस बनना चाहिए.

सनद रहे कि अब, जबकि रांची की अदालत ने इस मामले में जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप को सही नहीं पाया है ऐसे में उन अखबारों और न्यूज चैनलों को जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उनकी वैमनस्यपूर्ण खबरों से झारखंड समेत पूरे देश के लोगों गुमाराह किया गया.

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