तो अब केंद्र और बिहार सरकार के बीच छिड़ा विज्ञापन युद्ध

आपने कार्पोरेट घरानों और सियासी पार्टियों के बीच विज्ञापन युद्ध तो देखा होगा पर दो सरकारों के बीच विज्ञापनी आरोप-प्रत्यारोप का नमूना इन दिनों बिहार में देखने को मिल रहा है.nitish

नौकरशाही न्यूज

 

विज्ञापन यदुद्ध सड़क किनारे लगे होर्डिंग्स के बाद यह अखबारों, टीवी और रेडियो तक पहुंच चुका है.

केंद्र की मोदी सरकार जहां अपने विज्ञापनों में 1.25 लाख करोड़ रुपये का पैकेज बिहार के चरणों में समर्पित करने का विज्ञाप कर रही है वहीं अब राज्य की नीतीश सरकार ने विशेषज्ञों से अध्ययन कराने के बाद दावा कर रही है कि मोदी सरकार ने बिहारियों के साथ छल किया है.

विज्ञापन में बिहार सरकार का सूचना एंव जनसम्पर्क विभाग मोदी सरकार की कलई खोलने के अंदाज में एक पेज का विज्ञापन अखबारों को जारी किया है. इसमें कुछ ऐसे स्केच बने हैं जिसे देखने से यह समझा जा सकता है कि मोदी सरकार ने 1.25 करोड़ रुपये दिये हैं उन पैसों को मतपेटी में डालते हुए दिखाया गया है. इसका यह अर्थ जाता है कि मोदी सरकार पैसे के बल पर लोगों का वोट लेना चाहती है. जबकि अगले स्केच में दिखाया गया है कि 1.25 लाख करोड़ दर असल वास्तव में मात्र दस हजार करोड़ है.

विज्ञापन में नीचे लिखा है कि 1.25 लाख करोड़ की जिस राशि को देने का दावा केंद्र सरकार ने किया है उसमें से 1.08 लाख करोड़ तो पहले से ही बिहार की योजनाओं के लिए खर्च हो रहे हैं. जबकि बिहार सरकार को महज अतिरिक्त दस हजार करोड़ रुपये देने की बात कही गयी है. इस विज्ञापन में एक आंकड़ा दिया गया है जिसमें स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, ग्रामीण विकास समेत 12 सैक्टर का उल्लेख कया गया है.

इसमें बताया गया है कि ये तमाम पैकेज दर असल मोदी सरकार की रिपैकेजिंग मात्र है. विज्ञापन के अंत में लिखा है कि इसे बिहार पर कृपा के रूप में प्रचारित किया जा रहा है जबकि यह परिकथा जैसा है.

एहसान फरामोशी का आरोप

उधर जब नीतीश सरकार यह विज्ञापन जब अखबारों को जारी कर रही थी उसी दिन भाजपा नेता सुशील मोदी ने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाये. मोदी ने फेसबुक पर लिखा नीतीश कुमार को चुनौती है कि वे बतायें प्रधानमंत्री द्वारा बिहार के लिए घोषित विशेष मेगा पैकेज में पुरानी योजनाएं कौन-कौन सी है? दरअसल बिहार को मिले अब तक सबसे बड़े पैकेज के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताने की जगह एहसानफरामोश नीतीश कुमार और लालू यादव बिहार के विकास पर क्षुद्र राजनीति कर रहे हैं.

आने वाले दिनों में बिहार की सियासत और गिरेगी. ऐसा लगने लगा है.

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