तो ऐसे मिटेगी विभिन्न धर्मों के बीच बढ़ती नफरत की खाई!

तो ऐसे मिटेगी विभिन्न धर्मों के बीच बढ़ती नफरत की खाई!

समय गुजरते-गुजरते हमारा समाज मजहब, जाति, रंग और नस्ल आदि के मुद्दों पर अलग-अलग वर्गों में बट गया है। हम, हमेशा खुद को दूसरों से अलग समझते हैं। खुद को और खुद के मजहब को सबसे अच्छा मानते हैं. इसकी वजह से खुद को औरों से अलग और दूसरे से बड़ा मानने लगते हैं। जिसकी वजह से अंतर्धामिक खाई पनपने लगती है. हालांकि यह खाई आपसी मेलजोल साझेदारी के जज्बे से पाटा जा सकता है।

विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच बढ़ती नफरत और पनपती खाई को पाटने के लिए सभी धर्मों के बुद्धीजियों, धर्मगुरुओं और चिंतनशील लोगों के बीच नियमित डॉयलॉग को बढ़ावा देने की जरूरत है.

गीता, कुरआन और बाइबल के संदेश

अल्लाह अपने बनाए इंसानों को साथ-साथ और मोहब्बत से रहते हुए देखना चाहता है। पवित्र कुरआन कहता है कि सारी मानव जाति आदम और हव्वा से शुरू हुई है। यह समझने वाली बात है कि कोई क्यों खुद को दूसरों से, सिर्फ इस बात के लिए अलग समझेगा क्योंकि उसकी पूजा करने की विधि, खानपान का तरीका तथा विरासत दूसरों से अलग है। मजहब से परे सभी पवित्र किताबें भगवत गीता, कुरआन और बाइबल एक सुर में कहती हैं कि सभी को दूसरों से उतना ही प्रेम करना चाहिए जितना वो खुद से करते हैं। हिंदू धर्म की किताबें ‘एकमेव अद्वितीय ब्रह्म सर्व देव नमस्कार: केशव प्रति गच्छति’ पर जोर देती है।

 

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जिसका मतलब है भगवान एक ही है चाहे उसकी किसी आकार रूप की पूजा करें। अंत में उसे ही पहुंचती है इसी प्रकार कुरआन कहता है कि अल्लाह एक है और उसका कोई आकार या रूप नहीं है. अल्लाह अपनी दया सभी जीवों पर बिना किसी भेदभाव के बरसाता है। लेकिन दुर्भाग्य से हम इन पवित्र किताबों को ठीक से समझ नहीं पाते। जिसकी वजह से दुनिया में समाज के इतने टुकड़े हो गए। अगर कोई व्यक्ति बहुत अमीर बन जाता है तो वह बहुत खुश होता है, लेकिन अगर कोई दूसरा व्यक्ति अमीर बन जाए तो उसे यह बात हजम नहीं होती। ऐसा केवल उसकी जलन और घमंड की वजह से होता है। इस समस्या का केवल एक ही हल है हम सभी इंसानों को अपना ही खून समझें और सभी से वैसी ही मोहब्बत करें जैसा हम अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से करते हैं।

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हमें चाहिए कि हम अपने अंदर उच्च आदर्श विकसित करें. अच्छा इंसान ही दूसरे इंसान से अच्छा व्यवहार कर सकता है। हमें चाहिए कि भगवान को खुद में बसा लें और न केवल रूह को पवित्र करें बल्कि समाज की भलाई के लिए भी हमेशा तैयार रहें। अल्लाह दुनिया में अमन मोहब्बत और भाईचारे को बनाने, मजबूत करने और फैलाने की हमारी कोशिश में मदद करता है।

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