तो ऐसे होते हैं ‘ए ग्रेड’ और ‘बी ग्रेड’ के आईएएस

क्या आपको पता है कि आईएएस अफसर भी ‘ए-ग्रेड’ और ‘बी ग्रेड’ के होते हैं ? नहीं पता तो जानिए कि रैंकिंग के लिहाज से भले ही कोई आईएएस ऊपर हो लेकिन वह बी-ग्रेड का भी हो सकता है.bure

नौकरशाही डेस्क

नौकरशाही डॉट इन से कानाफुसी के दौरान एक वरिष्ठ आईएएस ने बताया है कि  नौकरशाही की लॉबी में कुछ अफसरों को बी-ग्रेड आईएएस माना जाता है जबकि कुछ को ए-ग्रेड का. इस ग्रेडिंग में न तो संघ लोक सेवा की कोई भूमिका होती है और न ही कार्मिक विभाग की. इस ग्रेडिंग प्रणाली का फैसला खुद अलग-अलग आईएएस लॉबी कर लेती है.

हो सकता है कि आईएएस परीक्षा की रैंकिंग में भले ही कोई, किसी दूसरे से ऊपर हो लेकिन पद संभाल लेने के बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बैठी आईएएस लॉबी राज्यों में कार्यरत आईएएस अफसरान का बी-ग्रेड का आईएएस ही मानती है.

एक आईएएस अफसर का कहना है कि इस ग्रेडिंग सिस्टम का अपना तरीका है. हो सकता है कि कोई आईएएस अफसर किसी राज्य में प्रिंसिपल सेक्रेट्री रैंक का हो लेकिन वह सिर्फ इसलिए बी-ग्रेड के अफसरों में से हो सकता है क्योंकि वह दिल्ली की पावरफुल लॉबी से दूर है. नौकरशाहों के लिए मशहूबर ऐतिहासिक जिमखाना क्लब में उसका आना जाना कम हो.  पता तो यहां तक चला है कि दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बैठे अफसरान उन्हें भाव तक नहीं देते. इतना ही नहीं राज्यों के ये अफसरान जब किसी मीटिंग या कार्यशाला में दिल्ली पहुंचते हैं तो उन्हें बी-ग्रेड के अफसर जैसा ट्रीट किया जाता है और उन्हें इग्नोर भी किया जाता है.

एक वरिष्ठतम आईएएस अफसर ने बताया कि इस ग्रेडिंग सिस्टम का फैसला इस बात से होता है कि कोई अफसर दिल्ली में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जितना ज्यादा समय व्यतीत करता है उसकी पहुंच और पूछ दोनों ज्यादा होती है. और वह ए-ग्रेड के आईएएस अफसरों में शामिल माना जाता है. हो सकता है कि दिल्ली में बैठे इन अफसरों के पद और पावर काफी कम हों लेकिन आईएएस लॉबी में उसका दखल राज्यों में बैठे आईएएस अफसरों से कहीं ज्यादा होता है. इसलिए दिल्ली में बैठे अफसरान खुद को ए-ग्रेड के मानते हैं जबिक वे राज्यों के अफसरों को बी- ग्रेड में रखते हैं.

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