तो फौजी अफसरों के बच्चों को इसलिए अगवा करना चाहते थे दहशतगर्द!

पाकिस्तानी अखबार क़ुदरत ने एक आर्मी अफसर के हवाले से लिखा है कि पेशावर स्कूल के 132 बच्चों की जान लेने वाले दहशतगर्द कहां से आये, कौन थे और उन्हें किसने भेजे थे सारी जानकी मिल गयी है.pak

 

डीजी आईएसपीआर मेजर जनरल आसिम सलीम ने मीडिया को ब्रिफिंग देते हुए कहा कि सात दहशतगर्द स्कूल की चहारदीवारी पर सीढ़ी लगा कर स्कूल में दाखिल हुए. मेजर जनरल आसिम ने यह भी कहा है कि दहशतगर्द काफी मात्रा में खाने-पीने का सामान लेकर आये थे.

आसिम की बात से यह स्पष्ट हो जाता है कि आतंकवादियों का मकसद कुछ और ही था.वे आर्मी अफसरों के बच्चों को हऑस्टेज बना कर बहुत बड़ी डील करने की योजना पर काम कर रहे थे. उस स्कूल में, जहां फौज के बड़े अफसरों और जवानों के 1099 बच्चे पढ़ते हैं, अगर उन्हें हॉस्टेज बना लिया जाता और यह मामला दो-तीन भी खीचता तो, न सिर्फ पूरे पाकिस्तान के लोगों और फौज के ऊपर दबाव बना कर कोई बड़ी डील कराई जाती.

लेकिन दहशतगर्दों ने जैसे ही आर्मी स्कूल में प्रवेश किया उसके 15 मिनट के अंदर क्विक रिस्पॉंस फोर्सेज के जवान वहां पहुंच गये और ऑपरेशन शुरू कर दिया. नतीजा यह हुआ कि दहशतगर्दों की योजना नाकाम हो गयी. मेजर जनरल आसिम ने कहा कि इस ऑपरेशन में 960 बच्चों को सलामत बचाया गया. सुरक्षा दस्तों की कोशिश रही कि कम से कम नुकसान हो. उन्होंने कहा कि दहशतगर्द कौन थे, कहां से आये थे और उनका मकसद क्या थे यह पता चल चुका है. हालांकि मेजर जनरल आसिम ने इस मामले में न तो किसी संगठन का नाम लिया और न ही उनके मकसद के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि दहशतगर्दों का इस्लाम से क्या इंसानियत से भी कोई नाता नहीं है.

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