दलितों के उत्‍पीड़न से जुड़े कानून और बनेंगे कठोर

अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को और अधिक संरक्षण देने के लिए अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम 2015 कल गणतंत्र दिवस से लागू हो जाएगा। 

 
अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक 2015 लोकसभा ने पिछले वर्ष चार अगस्त को तथा राज्यसभा से 21 दिसम्बर को पारित हो गया था। राष्ट्रपति ने विधेयक पर 31 दिसम्बर को हस्ताक्षर किए और गत एक जनवरी को इसे अधिसूचित कर दिया गया। इसके जरिए अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 में सेशाधन किया गया है।
इस कानून के तहत इन समुदायों के लोगों का सिर मुडाना, मूछें काटना, चप्पलों की माला पहनाना, इन वर्ग के लोगों को सिंचाई तथा वन अधिकारों से वंचित करना, इस वर्ग की महिलाओं को देवदासी बनाना, सर पर मैला ढोने की अनुमति देना, उनका सामाजिक बहिष्कार करना, इन वर्गों के उम्मीदवारों को चुनाव में नामांकन भरने से रोकना आदि को अपराध माना गया है।

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