दलित के घर खाना आत्मियता व जुड़ाव का प्रतीक: एपी पाठक

दलित के घर खाना आत्मियता और जुड़ाव का प्रतीक: एपी पाठक

बाबु धाम ट्रस्ट के संस्थापक और भारत सरकार में ऊंचे पदों को सुशोभित करनेवाले एपी पाठक चंपापुर गोनौली में दलित राजेश के घर खाना खाया।

ज्ञातव्य हो कि दलित राजेश वहीं व्यक्ति है जिसको अन्य 14 लोगों के साथ एपी पाठक जी ने कर्नाटक से बंधनमुक्त कराया था।

दलित राजेश की बहुत श्रद्धा थी कि एपी पाठक उसके दरवाजे पर आएं और उसके घर खाना खाएं। उसके इस निमंत्रण पर एपी पाठक दिल्ली से चलकर दिनांक 26/05 को चंपारण आए और उसी दिन अपने दल बल और ट्रस्ट कार्यकर्ताओ के साथ दलित राजेश के घर पहुंचे और पुरे दल बल के साथ खाना खाया व वर वधु को आर्शीवाद और शगुन के तौर पर कुछ राशि दिया साथ ही एपी पाठक सबसे गले मिले और बातचीत किया। मिडिया से मुखातिव होते हुए एपी पाठक ने कहा कि दलित हमारे परिवार और समाज के हैं और उनके साथ उनके घर भोजन करना प्रेम और सामाजिक जुड़ाव का प्रतिक है।

उन्होनें मिडिया को बताया कि जीवन पर्यन्त उन्होंने दलितों के बीच और उनके अधिकार और विकास के लिए काम किया हैं। चाहें नौकरी में हो या समाज सेवा में। दलितों के विकास हेतु उनके गरीबी उन्मूलन हेतु चलाए जा रहे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अपने बाबु धाम ट्रस्ट के माध्यम से धरातल पर सम्यक रूप से उतारने में बहुत काम किया। साथ ही पिछले एक दशकों से अधिक समय से अपने ट्रस्ट के माध्यम से गरीबों की सेवा किया और उनके मजबूती के लिए चंपारण के अलग अलग जगहों पर दौरा कर काम किया।

हजारों दलितों के घर खाना,अनाज ,सब्जी, दवाई और सेनेटाईजर अपने ट्रस्ट के माध्यम से कोरोना काल में उनके बीच वितरीत किया। अपने हृदय से एपी पाठक ने दलितों के बीच उद्गार पैदा किया और दलितों से मिले प्रेम से अभिभूत महसूस किया ।

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