दीवार गिराने में आईएएस दुर्गा का हाथ नहीं: वक्फ बोर्ड

यूपी सरकार कह रही है कि आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार तोड़वाने के लिए निलंबित किया गया है, लेकिन उसका यह झूठ भी उतनी ही बार बेनकाब हो रहा है.durga

टाइम्स न्यूज नेटवर्क के पुरुषार्थ अराधक ने अपनी खबर में लिखा है कि यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड से जुड़ी एक कमिटी ने गांव का दौरा करने के बाद कहा है कि दीवार गिराने में आईएएस अधिकारी दुर्गा की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने गांव वालों को सिर्फ सही प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी थी। कमिटी ने उल्टे दुर्गा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने तो वक्फ बोर्ड की कब्जा कर ली गईं जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने का अभियान चलाया था, जिसकी वजह से भू और रेत माफिया ने उन्हें सस्पेंड करा दिया।

हजरत सैयर भूरेशाह कमिटी के सेक्रेटरी कादिर खान ने बताया कि उन्होंने गांव का दौरा किया और काफी सारे लोगों व बुजुर्गों से बात की। उन्होंने बताया, ‘गांव के कुछ लोग कमिटी से जुड़े हैं। हमें पता चला है कि दुर्गा सिर्फ स्थिति की समीक्षा करने के लिए गई थीं। निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार ढहाए जाने से उनका कोई लेना-देना नहीं है।’ कमिटी ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी रिपोर्ट भेजी है और दुर्गा को जल्द से जल्द बहाल करने की मांग की है। सरकार के दावे को खारिज करते हुए कादिर खान का कहना है कि गांव में तनाव जैसे हालात भी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वोटों के लिए कुछ पार्टियां लोगों को उकसा रही हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि शांति बनी रहेगी।

भूमाफिया है निलंबन के पीछे

कादिर खान ने आरोप लगाया कि दुर्गा की कार्रवाइयों से तंग रेत और भू-माफिया ने ही उनका निलंबन करवाया है। उन्होंने कहा, ‘माफिया कुछ स्थानीय नेताओं के सहयोग से दुर्गा के विरोध में भावनाओं को भड़का रहे हैं और समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं से उनकी शिकायत की गई। उनके खिलाफ एसएमएस कैंपेन भी चलाया गया।’

कमिटी के एक दूसरे सदस्य अब्दुल कलाम ने कहा, ‘दुर्गा अपने सीनियरों के आदेशों का पालन कर रही थीं। दीवार गिराने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। कुछ स्थानीय लोगों ने ही दीवार गिराई है। ग्रेटर नोएडा की तत्कालीन एसडीएम ने सिर्फ उन लोगों से सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए कहा था। स्थानीय लोगों से मस्जिद बनाने के लिए उचित प्रक्रिया का पालन भर करने के लिए कहा गया था।’ कलाम ने कहा कि वह दुर्गा को निजी तौर पर भी जानते हैं और दावे से कह सकते हैं कि थोड़े ही समय में वह ईमानदार ऑफिसरों के लिए रोल मॉडल व रेत और भू-माफिया के लिए खतरा बन चुकी हैं।’ उन्होंने दुर्गा को बहादुर अधिकारी करार देते हुए कहा कि क्षेत्र के पुरुष अधिकारी भी माफिया से टकराने की हिम्मत नहीं जुटा पाए, लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया।

कमिटी का कहना है कि दुर्गा ने भू-माफिया पर नकेल कसते हुए जिले में वक्फ बोर्ड की 70 बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम चला रही थीं, जिनकी कीमत करोडों में होगी। कुछ जमीन तो बुद्धा इंटरनैशनल सर्किट के पास है। कादिर खान का कहना है कि इन जमीनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए हमने स्थानीय पुलिस-प्रशासन से शिकायत करने के साथ ही कैबिनेट मंत्री आजम खान और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सामने भी अपनी बात रखी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि वक्फ बोर्ड ने जब ज्यादा दबाव बनाया तो कार्रवाई के नाम पर दनकौर थाने में 17 जुलाई 2012 को सिर्फ एक एफआईआर दर्ज कर ली गई। कादिर खान बताते हैं जब दुर्गा ग्रेटर नोएडा की एसडीएम बनकर आईं तब कार्रवाई शुरू हुई।

साभार टाइम्स न्यूज नेटवर्क

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