देखिए! यह लॉ बनाम लाठी की नई बहस है

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ब्रह्मेश्वर मुखिया की शवयात्रा के दौरान मचे उत्पात पर तीन महीने बाद मुंह खोला है. उन्होंने कहा रणवीर सेना के प्रमुख ब्रह्मेश्वर मुखिया की शवयात्रा के दौरान स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए लिया गया निर्णय उचित था.राकेश प्रवीर लॉ बनाम लाठी की इस नई बहस पर कुछ सवाल खड़े करते हैं.

यानी पुलिस ने उत्पातियों पर कोई कार्रवाई नहीं की वह ठीक थी. मुख्यमंत्री ने जनता दरबार में पत्रकारों के एक सवाल के जबाव में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा निर्णय नहीं होता तो जो कुछ होता वह कल्पना से परे होता. हमने कहा था कि सब्र का बांध न टूटे उसपर नजर रखी जाए.

इसी तरह की बातें राज्य के डीजीपी अभयानंद ने दिल्ली में राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की बैठक में कहीं थी. उन्होंने कहा था कि दंगा रोकने के बजाय उसकी वीडियोग्राफी किया जाना चाहिए. उनके बयान की आलोचना हुई थी.

मगर अभयानंद के नेतृत्व में पुलिस की कार्यशैली का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, डीजीपी ने दिल्ली में ‘लॉ वर्सेज लाठी’ पर अपना प्रस्तुतीकरण दिया और पेशेवर पक्ष को रखा.

अन्य पुलिस प्रमुखों के साथ अपने अनुभव साझा किए. इसका बहुत अर्थ निकालने की दरकार नहीं है. मुख्यमंत्री ने डीजीपी के निर्णय को उचित करार दे कर कहीं न कहीं एक नई बहस की शुरुआत की है. सबको याद है कि दो जून को बह्मेश्वर मुखिया की शवयात्रा के दौरान भोजपुर के जिला मुख्यालय आरा से लेकर राजधानी पटना पूरी तरह से उपद्रवियों के कब्जे में था.

सड़क पर आगजनी और तोड़फोड का तांडव मचा हुआ था. सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया. पूरा दिन राजधानी पटना दहशत में रहा. पुलिस प्रशासन हाथ बांधे सब कुछ देख रहा था. इसको मुख्यमंत्री ने उचित ठहराते हुए यह भी कहा कि संयम बरतने का आदेश उनकी ओर से दिया गया था.

दिल्ली में दिए अपने बयान से बिहार पुलिस के प्रमुख फिलहाल सूर्खियों में हैं. उन्होंने वहां कहा कि प्रदर्शनकारियों को हंगामा और तोड़फोड़ करने से रोकने के बजाय उनके खिलाफ मामले दर्ज करने पर ध्यान देना बेहतर होगा.

यह रणनीति बिहार पुलिस के महानिदेशक अभयानंद ने यहां पुलिस बल के महानिदेशकों और महानिरीक्षकों की सालाना बैठक में जाहिर की. गौरतलब हो कि बिहार कैडर के 1977 बैच के आईपीएस अधिकारी आनंद ने पिछले साल सितंबर में पुलिस प्रमुख का जिम्मा संभाला था. उन्होंने बैठक में कहा कि जून में ब्रह्मेश्वर सिंह की हत्या के दौरान उन्होंने अपने पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनकी विडियोग्रफी करने का आदेश दिया था। यह सुन कर यहां विज्ञान भवन के सभागार में मौजूद पुलिस अधिकारी हतप्रभ रह गए और अभयानंद से उनके फैसले को लेकर सवाल करने लगे. आम राय यह थी कि पुलिस की पहली कार्रवाई संपत्ति का विनाश रोकना होनी चाहिए थी. बिहार पुलिस महानिदेशक के जवाब ने लोगों को और चौंका दिया. उन्होंने कहा कि ‘जो कुछ नष्ट हुआ, वह सरकारी संपत्ति थी. कुछ वाहन और कुछ इमारतें.’

अब अभयानंद ने अपने आदेश को सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी कर लिया है. उन्होंने बताया कि विडियोग्राफी के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज किए. हालांकि वहां बैठे लोग इससे संतुष्ट नहीं लग रहे थे. अभयानंद का भाषण खत्म होने के बाद केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल के एक सीनियर अधिकारी ने चुटकी ली कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए सीआरपीएफ को सहयोग दे रहे बिहार पुलिस के अधिकारी और जवान इस विचार पर अमल नहीं करेंगे. अधिकारी के इतना कहते ही पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा था.

मालूम हो कि हाल के दिनों में भी पटना में डीजीपी अभयानंद ने एक ऐसा ही विवादास्पद बयान देकर प्रतिपक्षी दलों को टिप्पणी करने का मौका दिया था.

राकेश प्रवीर पिछले दो दशक से बिहार की पत्रकारिता के जरिए राजनीति के हर रंग को देखने समझने वाले पत्रकारों में शुमार हैं.लम्बे समय तक दैनिक आज में रहकर अपनी योग्यता का लोह मनवाया. पटना में दैनिक हिन्दुस्तान में सेवायें दी.फिलवक्त लखनऊ में डीएनए अखबार के राजनीतिक सम्पादक की हैसियत से काम कर रहे हैं.

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