देशव्यापी समस्या बन गई है आईएएस-आईपीएस की कमी

आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की कमी अब देशव्यापी समस्या का रूप ले चुकी है जिसके कारण प्रशासनिक व्यवस्था गंभीर चुनौतियों का शिकार है. इस समय देश भर में लगभग 3 हजार नौकरशाहों के पद रक्त पड़े हैं.हालत यह है कि एक-एक अधिकारी को कई पदों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है.

नतीजा यह है कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था चरमराने नगी है.

यह संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है. हालत यह है कि सैकड़ों महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं जिसका नतीजा यह है कि एक साथ कई विभागों के काम अधूरे पड़े रह जाते हैं या कई बार बुरी तरह बाधित भी हो रहे हैं.

बिहार

हालांकि पिछले नवम्बिबर में बिहार प्रशासनिक सेवा के 38 अधिकारियों का भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयन कर लिया गया, इसके बाद राज्य में आईएएस अधइकारियों की कमी एक गंभीर समस्या है. राज्य में स्वीकृत 326 आईएएस अधिकारियों के पद के विरुद्ध इनकी संख्या 238 ही है.यानी अब भी बिहार में 88 आईएएस अधिकारियों की कमी है.दूसरी तरफ बिहार से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का कोटा चालीस फीसद है.पर बिहार के कोटे से महज 12-13 प्रतिशत अधिकारी ही केंद्री प्रतिनियुक्ति पर हैं.

झारखंड

मिसाल के तौर पर झार खंड में एक जूनियर आईएएस अधिकारी जो सचिवालय में किसी विभाग में है, वही किसी जिले की जिम्मेदारी भी निभा रहा है, नतीजतन इसका व्यापक असर भी देखने को मिल रहा है. झारखंड में आईएएस कैडर के 208 पद हैं जबिक यहां आईएएस अधिकारियों की संख्या महज 114 रह गई है. इन 114 अधिकारियों में से 16 ऐसे हैं जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गये हैं.

झारखंड के एक पूर्व वरिष्डीठ पुलिस अदिकारी कहते हैं , “यह जानते हुए कि एक आईपीएस अधिकारी, एसपी के बतौर काम करने के योग्य नहीं है, तो भी उसे उस पद पर रखना विवशता है क्योंकि राज्य में अधिकारियों की भारी किल्लत है.कई बार स्थिति ऐसी हो जाती है कि अधिकारियों की कमी के कारण कानून व्यवस्था कायम रखने काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है”.

मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में पुलिस अधिकारियों की कमी का असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ने लगा है. अधिकारियों की कमी के कारण सख्त जरूरत पड़ने पर भी उन्हें छुट्टी पर जाने का मौका नहीं मिल पाता. राज्य में आईपीएस अधिकारियों के 291 सृजित पद है, जबकि यहां मात्र 238 आईपीएस अधिकारी ही कार्यरत हैं.हालांकि देखने में अधिकारियों की कमी कोई ज्यादा नहीं है पर यह कमी काम में असंतुलन के लिए काफी है.

पुलिस मुख्यालय में आईजी प्रशासन अरविंद कुमार कहते हैं, हमारे पास एसपी और एसएसपी स्तर के अधिकारियों की कमी है और हमरे पास अधिकारियों को पदस्थापित करने का ज्यादा विकल्प नहीं है. आम तौर पर दस प्रतिशत अधिकारी छुट्टी पर रहते ही है लेकिन यह कमी भी बड़ी कठिनाई खड़ी कर देती है.

पंजाब

पंजाब के मुख्य सचिव राकेश सिंह कहते हैं अगर अधिकारियों की कमी के कारण आप एक अधिकारी को कई जिम्मेदारी देते हैं तो इसका नतीजा यह होता है कि वह अधिकारी किसी एक काम पर एकाग्र हो कर काम नहीं कर पाता. राज्य में आईएएस के 221 और आईपीएस के 172 पद हैं. जबकि राज्य में मात्र 180 आईएएस और 142 आईपीएस अधिकारी ही कार्यरत हैं. एक अधिकारी तीन तीन विभागों की जिम्मेदारी देख रहे हैं. अनिरुध तिवारी उन अधिकारियों में से एक हैं जो अकेले तीन विभागों के सचिव का काम देख रहे हैं.

चंढ़ीगढ़

केंद्र शासित चंड़ीगढ़ में एक ऐसे अधिकारी भी हैं जिनके ऊपर 10 विभागों के काम की जिम्मेदारी है. केंद्र शासित होने की वजह से चंड़ीगढ़ को हरियाणा और पंजाब कैड़र के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति होती है, जहां पहले से ही अधिकारियों की कमी है.

हरियाणा

इसी तरह हरियाणा की हालत यह है कि यहां आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की कमी के कारण राज्य प्रशासनिक अधिकारियों से काम चलाना पड़ रहा है.यहां 205 आईएएस अधिकारियों के पदों के बदले महज 163 अधिकारी ही हैं, उनमें भी 20 ऐसे हैं जो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं. यहां आइपीएस अधिकारियों के 137 पद हैं जबकि राज्य में केवल 102 अधिकारी ही मौजूद हैं.

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