धर्मनिरपेक्षता पर आघात करने वाले विध्यक में हुआ संशोधन

बिहार विधानसभा ने एक ऐसे संशोधन विध्यक को मंजूरी दे दी है जिसने भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को दशकों से दागदार बना रखा था.mahabodhi-temple

इस विध्यक को मंजूरी मिलने के बाद आजादी के बाद पहली बार अब गैर हिंदू भी बोध गया मंदिर प्रबंधन समिति का अध्यक्ष हो सकेगा.

सेक्युलरिज्म को कलंकित करने वाले एक्ट में बदलाव की तैयारी

अभी तक के प्रावधान के मुताबिक मंदिर प्रबंधन समित का पदेन अध्यक्ष गया का वहीं डीएम हो सकता था जो हिंदू हो. इसलिए पिछले 65 साल में एक बार भी किसी गैर हिंदू को गया का डीएम नहीं बनाया गया था. लेकिन इस संशोधन विध्यक को मंजूरी मिलने के बाद बोध गया मंदिर प्रबंधन समिति का अध्यक्ष बौद्ध, ईसाई, पारसी या मुस्लिम भी हो सकता है. पुराना विध्यक 1949 में बना था.

धर्मनिरपेक्षता पर प्रहार करने वाले इस अधिनियम के विरुद्ध बौद्ध संगठन वर्षों से इसका विरोध करते आ रहे थे. उनकी मांग थी कि चूंकि बोधि मंदिर बौद्धों का धार्मिक स्थल है इसलिए इसका अध्यक्ष सिर्फ हिंदुओं को बनाया जाना ठीक नहीं है.

विध्यक के संशोधन को मंजूरी मिलने से पहले हुई बहस में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कहा कि चूंकि किसी जिले का डीएम सरकार का प्रतिनिधि होता है इसलिए उसे किसी धर्म के नजरीये से देखना उचित नहीं है.

इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने इस संशोधन विध्यक का विरोध करते हुए कहा है कि बौद्ध और हिंदू एक ही सोते की दो धारायें हैं. भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ किसी धर्म का विरोध नहीं है.

इस संशोधन विध्यक को मंजूर किये जाने पर विभिन्न दलित संगठनों ने स्वागत किया है. नेश्नल कंफेड्रेशन ऑफ दिलत आर्ग्नाइजेशन के प्रमुख अशोक भारती ने कहा है कि हम इस फैसले का स्वागत करते हैं लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह संशोधन काफी देर से किया गया है.

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