धर्मनिरपेक्षता है तो भारत है,धर्मनिरपेक्षता नहीं तो भारत भी नहीं

कंस्टीट्यूशन क्लब में पिछले दिनों बैरिस्टर मोहम्मद यूनुस मेमोरियल समिति के तहत” लोकतांत्रिक भारत में भारतीय मुसलमान ‘के विषय पर एक सम्मेलन का आयोजन किया गया।DSC_0080

कार्यक्रम के आयोजक बैरिस्टर मोहम्मद यूनुस मेमोरियल कमेटी के चेयरमैन मोहम्मद काशिफ यूनुस ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। मोहम्मद यूनुस के बारे में परिचयात्मक कलमात प्रदान किए। काशिफ ने कहा कि मोहम्मद यूनुस द्वारा  बिहार में डेमोक्रेटिक सरकार की अस्थापना हुयी थी,बिहार में लालू और नितीश कुमार बैरिस्टर मोहम्मद यूनुस के हवाले से कार्यक्रम आयोजित करते रहते हैं लेकिन दिल्ली में यह पहला कार्य कर्म है। मुहम्मद मुहम्मद काशिफ यूनुस ने कहा के ग़रीबी के खात्मे  से लेकर पूर्ण प्रजातंत्र के अस्थापित होने तक हम हर महज़ पैर लड़ेंगे।

मणिशंकर अय्यर

सम्मलेन के मुख्या अतिथि कांग्रेस के पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने मोहम्मद यूनुस पर रौशनी डालते हुए कहा कि भारत में मुसलमानों का उतना ही अधिकार है जितना कि बहुसंख्यक समुदाय के लोगों का है,उन्होंने कहा कि आज तक मुसलमानों को वह अधिकार नहीं मिला जिसके वे हक़दार हैं या थे, उन्होंने कहा कि मेरे विचार से मुसलमानों को कम से कम चौदह प्रतिशत सकर में हिस्सा मिलना चाहिए।  मनी शंकर अय्यर ने भारत माता की जय पर कहा कि जो लोग आज यह कहते हैं कि भारत माता की जय कहो उन्हें यह अधिकार किसने दिया।उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व कोई धर्म नहीं हैं उसे 1925 में सावरकर ने बनाया था और हिन्दू नहीं था बल्कि नास्तिक था। उन्होंने कहा कि जहां धर्मनिरपेक्षता है वहां भारत है अगर धर्मनिरपेक्षता नहीं रहा तो भारत भी नहीं रहेगा ।

 

इस मौके पर पर्शिद्ध वकील और आम आदमी पार्टी के संस्थापक व स्वराज अभियान के प्रमुख प्रशांत भूषण ने कहा कि सच्चर कमेटी के अनुसार मुसलमानों की हालत जो निकल कर सामने आई उससे कहीं अधिक आज के हालात हैं। उन्होंने कहा कि आज विभिन्न बहानों से मुसलमानों का शोषण किया जा रहा है और उन्हें पुलिस मशीनरी के दुवार भी आतंकवाद के फर्जी मामलों में फंसाया जा रहा है और बतौर वकील मैं भी देख रहा हूं।

अख्तरुल वासे

इस अवसर पर अल्पसंख्यक भाषा के कमिश्नर भारत सरकार प्रोफेसर अख्तरुल वासे ने कहा कि देशभक्ति का प्रमाणपत्र चाहता हूँ और न देफाई वकील बनना चाहता हूँ, भारत हमारा है  और हमारा ही रहेगा। उन्होंने कहा धर्मनिरपेक्षता केवल यह नहीं है कि हम जब बुरा समय है तो गैर मुस्लिम हमारे काम आईं बल्कि उन पर बुरा समय आया तो हमें भी उनके काम आना चाहिए।उन्होंने कहा कि देश के लिए हमारे बुज़ुर्गों का रुख है कि भारत न दारुलहरब है और न दारुलहज़र है बल्कि दारुल अमन है जिस पर  हम आज भी कायम हैं।

उन्होंने कहा कि जब भी देश के रक्षा की बात आती है तो हम सबसे पहले सिर पर कफन बांधकर मैदान में निकल जाते हैं यह देशभक्ति नहीं है तो और क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि इस देश एक जैसा सिविल कोड की कल्पना ही गलत है क्योंकि यहां दर्जनों धर्मों के लोग रहते। उन्होंने कहा अगर भारत को महान शक्ति बन कर उभारना है तो सबको साथ लेकर चलना होगा इसके बिना महान भारत का सपना देखना बेकार है उन्होंने कहा हम भारत के मालिक हैं इसलिए हम भीख नहीं बल्कि हिस्सेदारी चाहते हैं।

शकीलुज्जमा अंसारी

इस औसर से कांग्रेस के पूर्व प्रांतीय मंत्री शकिलुजजमा अंसारी ने कहा कि बिहार के पहले मुख्यमंत्री बैरिस्टर मोहम्मद यूनुस थे हम ने उनको भुला दिया, हम मौलाना मजहरूल हक, सईद महमूद, अब्दुल क़यूम अंसारी को भी भुला दिया। उन्होंने कहा कि मौलाना मजहरूल हक ने अपने सभी संपत्ति को देश की स्वतंत्रता के लिए झोंक दिया था लेकिन उन्हें भी समय ने भुला दिया जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों को भावनाओं में नहीं आना चाहिए बल्कि होश व हवास से काम लेना चाहिए उन्होंने कहा कि हिंदुत्व मुसलमानों की भावनाओं को भड़का कर उन्हें विभाजित कर रहे हैं।

जॉन दयाल

इस अवसर पर डॉ। जॉन दयाल ने कहा कि पाकिस्तान से हमारे भावनात्मक संबंध है हम पाकिस्तान को अपना भाई मानते हैं, उनहों ने कहा कि ईसाई और मुसलमानों के नेतृत्व बढ़ रही है लेकिन इसमें मुसलमान आगे हैं, उन्होंने कहा कि जिस देश में मुसलमान सुरक्षित नहीं है उस  में ईसाई ,दलित, यहूदी और अन्य धर्म के लोग सुरक्षित रह सकते हैं। उन्होंने कहा एक धर्म या समुदाय से पूरा देश का प्रगति नहीं होसकता बल्कि पूरे देश को साथ लेकर चलना होगा। इस औसर से पर्षद कवि असरार जामई  ने कहा मैं ने यूनुस बीरेसटर को देखा था और उनसे श्रेय मिलता भी था मेरे पिता से उनके अच्छे ताल्लुक़ात थे।

सम्मलेन में मोहम्मद इंतेखाब, श्याम जी त्रिपाठी, अभय मिश्रा, आरिफ हुसैन, युवा कांग्रेस की राबिया किदवई,डॉ शादाब तबस्सुम ने भी बैरिस्टर मोहम्मद यूनुस के हवाले से अपने विचार व्यक्त किए।

 

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