सुस्त धमनियों में नवजीवन का संचार दे गयी परिवर्तन रैली

लालू की परिवर्तन रैली को एक शब्द में समेटते हुए कहा जा सकता है कि यह राजद के लिए नवजीन का संचार दे गयी.lalu

भीड़ जुटी और खूब जुटी. लेकिन 15 मई की तपती दोपहरी में लोगों के हुजूम को देखते हुए लालू ने कहा जिन्होंने रैली की असफलता के ख्वाब देखे थे अच्छा है वह ख्वाब में ही रहें.

भाषण वही थे जो लालू पिछले छह महीनों से कहते रहे थे- हत्या, घोटाला बलात्कार, नरेगा लूट, शिक्षकों का शोषण उन्हें पीटना. हां यह कहना नहीं भूले कि ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या नीतीश राज में हुई. इस एक वाक्य के निहतार्थ गहरे हैं. यह कह कर वह भूमिहार समाज की सहानुभूति बोटरना चाहते थे.

इस रैली में राजद के सारे दिग्गजों ने अपनी बात रखी. सीनियर लीडर रघुवंश प्रसाद, रामकृपाल यावद, रघुनाथ झा अब्दुल बारी सिद्दीकी, गुलाम गौस, रामचंद्र पूर्वे से लेकर जूनियरों को भी मौका मिला.

पढें उन पांच चीजों के बारे में जो इस रैली से राजद हासिल कर सकता है

1.राष्ट्रीय जनता दल की सुस्त पड़ी धमनियों में नई ऊर्जा का संचार होगा.पार्टी नये जोश और उत्साह से आगे बढ़ेगी. जो आने वाले चुनावों में पार्टी को राजनीतिक लाभ दिला सकता है.

2. राजद एक संगठन के रूप में सशक्त होगा. तब जो लोग राजद से किनारा कर चुके थे वह इससे जुड़न चाहेंगे. संभव है जनता दल यू से नाराज चल रहे उसके नेता भी राजद में शामिल होना चाहेंगे.जद यू के कई प्रताडित नेता हैं जो लालू यादव के सम्पर्क में हैं. वे इस बात के इंतजार में हैं कि उचित समय में फैसला लें और राजद से जुडें.

3. 2014 के लोकसभा चुनावों में राजद की सीटें बढ सकती हैं. क्योंकि अभी राजद के मात्र तीन सांसद लोकसभा में हैं जो न्यूनतम है. इसलिए उसकी शक्ति बढेगी लेकिन यह रैली की सफलता पर निर्भर करेगा.

4. राजद में नये नेतृत्व का उदय होगा. भले ही इसमें लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप ही क्यों न हों. वैसे भी राजद ने तेजस्वी यादव को आगे बढ़ा कर इसकी शुरूआत कर दी है. इससे युवाओं की फौज खड़ी करन में मदद मिलेगी. तेजस्वी पिछले दो महीने से राज्य के हरेक जिले के भ्रमण के साथ इसकी शुरूआत कर चुके हैं. और युवाओ में उनके प्रति काफी उत्साह भी देखने को मिला है.

5. राजद कुछ नये एजेंडे, नये विचार के साथ आगे आयेगा. उसकी कोशिश होगी की जनता राजद के पिछले 15 सालों के कार्यकाल की खामियों को भूल जायें.

लेकिन अगर राजद के परिवर्तन रैली में नीतीश के अधिकार रैली जैसी भीड़ नहीं पहुंचती है तो जद यू और भाजपा के रुख राजद के खिलाफ और आक्रमक होंगे. राजद की तीखी आलोचना होगी और उसे हतोत्साहित करने का कोई मौका सत्ता पक्ष के लोग नहीं चूकेंगे. जो राजद के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है.

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