नवाज़ शरीफ; खाक में मिला ज़र्रा फिर से सितारा बन गया

pml-n-nawaz-sharifइर्शादुल हक नवाज शरीफ से लंदन में मिले तब वह निर्वासित जीवन बिता रहे थे.वह कहते हैं कि इतिहास पूछेगा कि खाक में मिला जर्रा आकाश का सितारा कैसे बनता है तो लोग नवाज शरीफ की मिसाल देंगे.

नवाज शरीफ पाकिस्तान के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं.

यह वही नवाजशरीफ हैं जो 1999 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे. लेकिन श्रीलंका से वापस पाकिस्तान आ रहे फौज के तत्कालीन प्रमुख ने अपने मातहतों को यह हुक्म दिया कि मियां नवाजशरीफ को उनके बंगले के अंदर घेर कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाये क्योंकि उन्होंने सेना प्रमुख परवेज मुशर्फ को कथित तौर पर बर्खास्त कर के उनकी हत्या की साजिश करने की कोशिश की थी. फौजी जनरलों ने परवेज मुशर्फ के हुक्म की तामील की और अभी परवेज मुशर्फ श्रीलंका-पाकिस्तान की फिजा में हवाई जहाज पर ही थे तब तक नवाज शरीफ को गिरफ्तार किये जा चुके थे.

इसके बाद मुशर्रफ ने पाकिस्तान की सत्ता संभाल ली. फिर नवाज के खिलाफ फांसी की सजा सुनाई गयी. देखते-देखते पाकिस्तान का वजीर ए आजम एक कमजोर कैदी और बेबस इंसान बन चुके थे.
लेकिन सऊदी अरब और दीगर अरब मुल्कों के बीच बचाव के कारण उऩ्हें फांसी नहीं दी गई और विदेशी सरकारों के प्रयास के बाद उन्हें परिवार समेत सऊदी अरब निर्वासित कर दिया गया.वह अपने परिवार के एक-एक बच्चे समेत जिसमें कुल 40 लोग शामिल थे, सऊदी अरब चले गये और यह वादा भी किया कि वह परवेज मुशर्रफ के खिलाफ कोई बात न तो बोलेंगे और न ही उनके खिलाफ किसी साजिश का हिस्सा होंगे. वह आठ सालों तक अरब और ब्रिटेन में जिंदगी गुजारते रहे. इस दौरान वह कई बार बीबीसी के लंदन स्थित बुश हाउस दफ्तर भी आये. यह 2006 की बात है. तब इन पंक्तियों का लेखक वहीं था. उस समय मैंने उन से कोई इंटर्व्यू तो नहीं किया पर साहब सलाम जरूर हुआ.

वक्त ने करवट बदली. सन 2007 आया और वह फिर पाकिस्तान आये.

वह आये तो चुनाव में हिस्सा लेने थे पर इसी दौरान बे नजीर भुट्टों भी पाकिस्तान वापस आईं और उनकी हत्या कर दी गयी. उनकी हत्या के बाद हुए चुनाव में सहानुभूति की लहर में बेनजीर की पार्टी जीती और सत्ता उनके पति आसिफ अली जरदारी के हाथों में चली गयी. नवाज शरीफ को कोई खास कामयाबी नहीं मिली.

इस दौरान परवेज मुशर्रफ सत्ता से बे दखल हुए. और उन्हें पाकिस्तान छोड़ना पड़ा.आज 14 सालों बाद नवाज शरीफ पाकिस्तान की स्त्ता संभाल रहे हैं और परवेज मुशर्रफ सलाखों में कैद हैं.इतिहास का चक्र कैसे घूमता है, ऐसी मिसालें इतिहास में अकसर नहीं मिलतीं.

नवाज शरीफ का राजनीतिक सफर

नवाज शरीफ की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी. वह एक कारोबारी घराने से ताअल्लुक रखते थे. पर 1976 मैं तत्कालीन सरकार ने उनके स्टील के कारोबार का राष्ट्रीयकरण कर दिया तो उन्होंने राजनीति में किस्मत आजमाने की कोशिश शुरू की.

1981 में नवाजशरीफ देश के सबसे बड़े राज्य पंजाब के वित्तमंत्री बनाये गये. और फिर 1985 में वह पंजाब के मुख्यमंत्री बने. पाकिस्तान की राजनीति में पंजाब का वही महत्व है जो भारत की राजनीति में उत्तरप्रदेश का है. बल्कि उससे भी ज्यादा.

लेकिन नवाजशरीफ बहुत दिनों तक पंजाब के मुख्यमंत्री नहीं रह पाये. राष्ट्रपति जनरल जियाउल हक की सरकार ने उन्हें 1988 बर्ख्स्त कर दिया.

इसके बाद पाकिस्तान में कई अहम घटनायें हुईं. जनरल जियाउल हक की विमान हादसे में मौत हो गयी. फिर 1990 में चुनाव हुए और नवाज शरीफ पहली बार देश के प्रदानमंत्री बने. लेकिन सेना के दबाव के बाद उन्हें 1993 में इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन कुछ ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सरकार को बहाल कर दिया.

1997 में नवाज शरीफ फिर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने. इस बार भारत के साथ कारगिल संघर्ष हुआ. पर इसमें राजनीतिक नेतृत्व के बजाय पाकिस्तानी फौज की भूमिका थी. परवेज मुशर्रफ पर कारगिल घुसपैठ के आरोप लगे.

आज फिर 2013 का चुनाव नवाज़ शरीफ़ के लिए फिर से सत्ता का सिंहसन लेकर आया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*