नवादा : अहीरों की लठैती में लहराता है भूमिहार का भगवा

नवादा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र 1977 से 2004 अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। 2008 के परिसीमन के बाद इसे सामान्य सीट बनाया गया। 2009 में पहली बार हुए चुनाव में भाजपा के भोला सिंह निर्वाचित हुए थे, जबकि 2014 में भी भाजपा के ही गिरिराज सिंह निर्वाचित हुए। नवादा के बारे में बताया जाता है कि एकाध को छोड़कर सभी बाहरी सांसद निर्वाचित हुए। 1999 में निर्वाचित संजय पासवान दरभंगा से नवादा आये थे और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री भी बने थे। भोला सिंह और गिरिराज सिंह भी नवादा संसदीय क्षेत्र के निवासी नहीं हैं। बताया जा रहा है कि स्थानीय लोग इस बार स्थानीयता को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन प्रभावी बन पायेगा, इसकी गुंजाईश काफी कम है।
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वीरेंद्र यादव के साथ लोकसभा का रणक्षेत्र – 6
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सांसद — गिरीराज सिंह — भाजपा — भूमिहार
विधान सभा क्षेत्र — विधायक — पार्टी — जाति
बरबीघा — सुदर्शन कुमार — कांग्रेस — भूमिहार
रजौली — प्रकाश वीर — राजद — पासी
हिसुआ — अनिल सिंह — भाजपा — भूमिहार
नवादा — राजवल्लभ प्रसाद — राजद — यादव
गोविंदपुर — पूर्णिया यादव — कांग्रेस — यादव
वारसलीगंज — अरुणा देवी — भाजपा — भूमिहार
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2014 में वोट का गणित
गिरिराज सिंह — भाजपा — भूमिहार — 390248 (45फीसदी)
राजवल्लभ प्रसाद — राजद — यादव — 250091 (29 फीसदी)
कौशल यादव — जदयू — यादव — 168217 (19 फीसदी)
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सामाजिक बनावट
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नवादा की सामाजिक बनावट में यादव व भूमिहार जाति का वोट लगभग बराबर 3-3 लाख है। इतना ही वोट दलितों के होने का अनुमान है। राजपूत की आबादी औसत से कम ही है। राजपूत की वोट संख्या 80-90 हजार होने की उम्मीद है। शहरी इलाकों में बनियों की आबादी काफी है। ग्रामीण क्षेत्रों में अतिपिछड़ी जातियों की आबादी काफी मानी जाती है। नये और युवा मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले युवा मतदाता पढ़ाई के लिए जिला मुख्यालय या पटना की उन्मुख हो रहा है। इसका असर भी मतदान पर पड़ता है। फिर पहचान के लिए वोटर आईडी के इस्तेमाल के कारण युवाओं में भी मतदाता बनने की होड़़ है, लेकिन वही उत्साह वोट देने में नहीं दिखता है। मुसलमानों की आबादी भी यादवों के समान हर गांव में मिल जाएगी, लेकिन कहीं-कहीं मुसलमानों की बड़ी बस्ती भी है। मुसलमान का वोट भी ढाई लाख के करीब होगा। कुशवाहा भी डेढ़ लाख के आसपास होंगे।
कौशल और राजवल्लभ फैक्टर
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नवादा जिले की स्थानीय राजनीति में कौशल यादव व राजवल्लभ यादव महत्व\पूर्ण फैक्टर हैं। दोनों राजनीति के दो किनारा हैं। हर छोटे-बड़ी राजनीतिक कार्यक्रमों में दो खेमा स्पष्ट रूप से दिखता है। दोनों एक-दूसरे पर 20 साबित पड़ने की कोशिश करते हैं। इसका असर लोकसभा चुनाव पर भी पड़ता है। 2009 के चुनाव में भाजपा के भोला सिंह, लोजपा के वीणा देवी और कांग्रेस की सुनीला देवी तीनों भूमिहार उम्मीदवार थे। उस समय राजद का लोजपा के साथ गठबंधन था। किसी पार्टी ने कौशल यादव और राजवल्लभ यादव को टिकट नहीं दिया। वैसी स्थिति में दोनों निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में आ गये। इनकी लड़ाई चुनाव जीतने की नहीं थी, बल्कि दोनों इस होड़ में थे कि कौन ज्यादा वोट लाते हैं। 2014 में कौशल यादव जदयू के उम्मीदवार हो गये और राजवल्लभ यादव राजद के उम्मीदवार हो गये। इस चुनाव में राजवल्लभ को 29 फीसदी और कौशल को 19 फीसदी वोट मिला। गौरतलब है कि दोनों राजनीतिक परिवार के हैं। दोनों जिले की राजनीति में अपना दखल रखना चाहते हैं।
भूमिहार की चांदी
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बिहार में भूमिहारों की राजनीतिक ताकत कुछ इलाकों में स्पष्ट रूप से दिखती है। उसमें प्रमुख रूप से चार लोकसभा सीट है। बेगूसराय, मुंगेर, नवादा और जहानाबाद। इसमें गंगा के दोनों हिस्से शामिल हैं। अभी चार भूमिहार सांसद इन्हीं चार लोकसभा क्षेत्रों हैं। चारों भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से आपस में जुड़े हुए हैं। बेगूसराय से मुंगेर की, मुंगेर से नवादा और नवादा से जहानाबाद की प्रशा‍सनिक सीमा जुड़ी हुई है। भूमिहार बसावट भी उसी रूप में है और माना जाता है कि इन चार क्षेत्रों में भूमिहारों की आबादी सर्वाधिक है।
कौन-कौन हैं दावेदार
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वर्तमान सासंद गिरिराज सिंह ने घोषणा कर दी है कि वे नवादा से चुनाव लड़ेंगे। यानी वे नये विकल्प पर विचार नहीं कर रहे हैं। लेकिन पार्टी के दो भूमिहार विधायक हिसुआ के अनिल सिंह और वारसलीगंज की अरुणा देवी गिरिराज सिंह की विदाई की कहानी गढ़ रहे हैं। वे दोनों अपने आप को नवादा का प्रबल दावेदार मान रहे हैं और माहौल बनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। गिरिराज सिंह की विफलता भी गिना रहे हैं। उधर माना जा रहा है कि इस बार राजद-कांग्रेस गठबंधन में यह सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। राजद के प्रबल दावेदार राजवल्लभ यादव अभी जेल में बंद है। इसका असर भी टिकट व सीट के बंटवारे पर पड़ेगा। जदयू के पूर्व विधायक कौशल यादव ने बातचीत में कहा कि वे जदयू के साथ हैं। लेकिन उनकी पत्नी पूर्णिमा यादव कांग्रेस की गोविंदपुर से विधायक हैं। यदि महागठबंधन में कांग्रेस पूर्णिमा यादव को उम्मीदवार बनाती है तो इसका असर भी दिख सकता है। हालांकि बरबीघा के विधायक सुदर्शन कुमार भी नवादा पर संभावना तलाश सकते हैं। उनके समर्थक भी मानते हैं कि नवादा भूमिहार प्रभाव वाला क्षेत्र है और वैसे वे कांग्रेस के बेहतर उम्मीदवार साबित हो सकते हैं। अभी चुनाव में गठबंधन और सीटों का स्वरूप तय नहीं है, लेकिन संभावना की जमीन तय की जाने लगी है और जमने-पछाड़ने की कवायद तेज हो गयी है।

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