नवादा: सांसद के साथ छह विधायकों में तीन भूमिहार

दो यादव नेताओं का राजनीतिक अखाड़ा बन गया है नवादा। कौशल यादव और राजवल्लभ यादव की लड़ाई में भूमिहारों की चांदी होती रही है। 2009 से पहले यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। 2009 और 2014 में यहां से भाजपा के भूमिहार सांसद क्रमश: भोला सिंह और गिरिराज सिंह निर्वाचित हुए। 2019 में यह सीट भाजपा की सहयोगी लोजपा के खाते में गयी है और मुंगेर की सांसद वीणा सिंह इस बार नवादा से प्रत्याशी हैं। नवीनतम मतदाता सूची के अनुसार, नवादा संसदीय क्षेत्र में 18 लाख 92 हजार 17 वोटर हैं। यही नवादा के अगले सांसद का चुनाव करेंगे। नवादा लोकसभा के तहत आने वाले बरबीघा विधान सभा क्षेत्र में वोटरों की संख्या 2 लाख 15 हजार 424, रजौली में 3 लाख 21 हजार 848, हिसुआ में 3 लाख 64 हजार 108, नवादा 3 लाख 49 हजार 783, गोविंदपुर में 3 लाख 9 हजार 753 और वारसलीगंज में 3 लाख 41 हजार 101 वोटर हैं।

वीरेंद्र यादव के साथ लोकसभा का जनक्षेत्र- 4 


वरिष्ठ पत्रकार वीरेंद्र यादव की पुस्तक ‘राजनीति की जाति’ के अनुसार, नवादा में सबसे अधिक वोटर यादव जाति के 16.69 प्रतिशत हैं। भूमिहार जाति के वोटर 12.60 प्रतिशत, मुसलमान 9.27 प्रतिशत, कोईरी 6.45 प्रतिशत, मुसहर 7.69 प्रतिशत, कुर्मी 3.38 प्रतिशत, रविदास 3.38 प्रतिशत और पासवान वोटरों की संख्या 3.45 प्रतिशत है। सभी लोकसभा क्षेत्रों के जातिवार वोटरों की संख्या और प्रतिशत ‘राजनीति की जाति’ नामक पुस्तक में उपलब्ध है। 


लोकसभा के विधायकों का जातिवार विश्‍लेषण से पता चलता है कि बरबीघा से कांग्रेस के सुदर्शन कुमार (भूमिहार), रजौली से राजद के प्रकाश वीर (पासी), हिसुआ से भाजपा के अनिल सिंह (भूमिहार), गोविंदपुर से कांग्रेस की पूर्णिमा यादव (यादव) और वारिसलीगंज से भाजपा की अरुणा देवी (भूमिहार) विधायक हैं। संसदीय क्षेत्र की छह सीटों में से तीन पर भूमिहार विधायक हैं। नवादा से राजद के विधायक राजवल्लभ यादव की सदस्यता समाप्त होने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है।
बरबीघा के विधायक सुदर्शन कुमार के दादा राजो सिंह थे, जो कई बार‍ लोकसभा और विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए थे। सुदर्शन के माता-पिता दोनों विधायक थे। कांग्रेस विधायक पूर्णिमा यादव के सास-ससुर के साथ ही पति कौशल यादव विधायक रह चुके हैं।
नवादा लोकसभा क्षेत्र केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के टिकट कटने के बाद से चर्चा में है। नवादा एकमात्र सीट है, जिसका भाजपा ने सांसद की इच्छा के विरुद्ध टिकट काटा है। उन्हें बेगूसराय से चुनाव लड़ने के लिए भेजा गया है, लेकिन अभी उन्होंने कोई फैसला नहीं किया है। इस सीट पर अभी महागठबंधन की ओर से पार्टी और उम्मीदवार का चयन नहीं हुआ है। इस बीच नवादा कौशल यादव और राजवल्लभ यादव की राजनीतिक वर्चस्व का गवाह बनेगा। हालांकि इन दोनों की लड़ाई का लाभ लोजपा को मिलने की संभावना है।

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