नहीं मिला सुबूत, झूठ निकला जैश के आतंकी होने का आरोप, 4 युवकों को छोड़ा, मीडिया की तीखी आलोचना

3 मई को गिरफ्तार किये जाने वाले 13 युवाओं को चीख-चीख कर आतंकी घोषित करने वाले कुछ चैनलों का फिर छीछालेदर हो गया है क्योंकि पुलिस को उनमें से चार को सबूतों के अभाव में छोड़ना पड़ा है. जबकि गिरफ्तारी के दिन ये चैनल उन्हें दिल्ली को दहलाने वाला आतंकी घोषित कर रहे थे.terrorsuspect

सोशिल मीडिया पर अब इस मामले में सवाल पूछे जा रहे हैं कि सभी 13 लोगों को आतंकवादी घोषित करने, देश का दुश्मन करार देने वाले चैनल क्या अब उन युवाओं के घर वालों से और पूरे देश से माफी मांगेंगे.

वसीम अकरम त्यागी ने फेसबुक पर लिखा यहां से मीडिया की जिम्मेदारी शुरु होती बीते तीन दिनों में मीडिया पकड़े गये इन ‘आतंकियों’ को मीडिया ने जज बनकर जैश का खूंखार आतंकी बताया था। क्या मीडिया के धुरंधर रिहा किये गये लोगों के घर जाकर इनसे माफी मांगेगे ? समय है कि मीडिया के धुरंधर बगैर किसी देरी के इनके घर जायें और जाकर उनसे माफी मांगें कि उन्होंने पुलिसया कहानी को बगैर क्रॉस चैक किये प्रासारित किया था। उन पुलिस वालों के खिलाफ भी कार्रावाई होनी चाहिये जिन्होंने इन नौजवानों को वर्दी पर ‘स्टार्स’ बढ़ाने के लालच में गिरफ्तार किया था।

गौरतलबू है कि दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने गाजीआबाद के चांद बाग और देवबंद से 13 युवाओं को जैश मोहम्मद से जुड़े होने और विस्फोटक रखने के इल्जाम में हिरासत में लिया 3 मई को लिया. हिरासत में लेने के तुरत बाद कुछ चैनलों ने इन्हें खूनख्वार आतंकवादी घोषित कर दिया. दूसरे दिन अखबारों ने भी अपनी खबरों में उन्हें आतंकी लिखा.

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