नालंदा में चंद्रशेखर आजाद और बाल गंगाधर तिलक की जयंती मनी

  बिहारशरीफ,  23 जुलाई  । सोमवार को स्थानीय मध्य विद्यालय ,ककड़िया के प्रांगण में विद्यालय के चेतना सत्र में आधुनिक भारत के निर्माता बाल गंगाधर तिलक की 162 वीं जयंती और महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की 112 वीं जयंती प्रधानाध्यापक शिवेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में मनाई गयी। बच्चों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुति दी। बच्चों के देशभक्ति गीत ‘‘मेरा रंग दे बसंती चोला‘‘ ने अनोखा जोश भरा। प्रतिभाशाली बच्चों को कलम और कॉपी देकर सम्मानित किया गया।
संवादाता-संजय कुमार
विद्यालय परिवार के शिक्षक नेता राकेश बिहारी शर्मा ने भारतीय क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद और बालगंगाधर तिलक के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ कराया। उन्होंने मौके पर कहा कि चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे। उन्होंने ब्रिटिश सेना का जमकर मुकाबला किया। मातृभूमि के लिए उनके त्याग और बलिदान से राष्ट्र के युवाओं को नई ऊर्जा मिली और देश की आजादी का नया इतिहास लिखा गया। वही लोममान्य बालगंगाधर तिलक में बचपन से देशप्रेम की भावना कूटकूट कर भरी थी। ‘‘स्वराज्य हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है इसे लेकर रहूंगा‘‘ के नारे के साथ अंग्रेजी शासन की क्रूरता का विरोध किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा में इन महापुरुषों के आदर्श का पालन करना चाहिए।  विश्व प्रसिद्ध महान शिक्षाविद, महान गणितज्ञ, भारतीय क्रांति के जनक बाल गंगाधर तिलक भारत के द्वितीय शिवाजी तथा स्वतन्त्रता संग्राम के सिद्ध महात्मा थे। तिलक जी में अभिमन्यु की तरह सहज प्रतिभा तथा संघर्ष के लिए साहस का असीम भंडार था। अपनी नि:स्वार्थ देश भक्ति अदम्य साहस, उग्र राष्ट्रवाद की त्रिमूर्ति लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिनचन्द्र पाल स्वतंत्र भारत के महान निर्माता थे। ये आधुनिक भारत का निर्माता, एक भारतीय राष्ट्रवादी शिक्षक, भारतीय क्रांति के जनक हिन्दुस्तान के एक प्रमुख नेता, महान गणितज्ञ शिक्षक, समाज सुधारक, “स्वराज मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है” के उद्घोषक, निर्भीक सम्पादक और स्वतन्त्रता सेनानी थे। तिलक जी अंग्रेजी शिक्षा के घोर आलोचक थे और मानते थे कि यह भारतीय सभ्यता के प्रति अनादर सिखाती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की रक्षा में इन महापुरुषों के आदर्श का पालन करना चाहिए।
प्रधानाचार्य शिवेन्द्र कुमार ने अपने अध्यक्षीय भाषण में तिलक के बारे में बताते हुए कहा कि स्वराज की अलख जगाने वाले बाल गंगाधर तिलक आजादी की लड़ाई के प्रमुख ध्वजवाहकों में से एक थे।
शिक्षक जितेन्द्र कुमार ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने अंग्रेजों को नाकों चने चबा दिए। उनके फौलादी इरादों, हिम्मत और अदम्य साहस से अंग्रेज थर्राते थे। जज के नाम पूंछने पर चंद्रशेखर ने अपना नाम आजाद, पिता का नाम स्वतंत्र और निवास स्थान जेलखाना बताकर आजादी के मतवाले बन गए।
शिक्षिका पूजा कुमारी ने मौके पर कहा कि लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने अपने क्रांतिकारी विचारों से अंग्रेजी हुकूमत को निशाने पर लिया। ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया। देश के युवाओं में राष्ट्रीय भावना जाग्रत की।
इस मौके पर बालसंसद के प्रधानमंत्री शुभम प्रकाश शर्मा, शिक्षक सुरेश प्रसाद रजक, शिक्षक अनुज कुमार, प्रशांत कुमार, आरती कुमारी, गुड़िया कुमारी, चाँदनी कुमारी, मुस्कान कुमारी, सौरभ कुमार, पिंटू कुमार आदि ने सम्बोधित किया। इस अवसर पर सैकड़ों छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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