ना घर के रहे न घाट के रहे पांडेय जी

ना घर के रहे न घाट के रहे पांडेय जी

शाहबाज़ की रिपोर्ट

बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (Gupteshwar Pandey) को जदयू से टिकट नहीं मिला। राज्य विधान सभा चुनाव के पूर्व उन्होंने VRS लेकर राजनीति में कदम रखा था. पांडेय सुशांत सिंह राजपूत केस को लेकर काफी मुखर रहे थे.

गुप्तेश्वर पांडेय ने बिहार के डीजीपी पद से निर्धारित सेवानिवृति से पहले ही ऐच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर एवं जदयू में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा था. उनके बिहार के बक्सर ज़िले से चुनाव लड़ने की काफी चर्चा थी. मगर जेडीयू द्वारा कल बिहार चुनाव के सभी चरणों के लिए कुल 115 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जिसमें गुप्तेश्वर पांडेय को जगह नहीं मिली। जबकि भाजपा ने बक्सर सीट से परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दिया है.

गुप्तेश्वर पांडेय सुशांत सिंह राजपूत केस में मुंबई पुलिस एवं महाराष्ट्र की शिव सेना-कांग्रेस सरकार पर लगातार लापरवाही का आरोप लगा रहे थे. पांडेय को जदयू से टिकट नहीं मिलने पर महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी इस मसले पर प्रतिक्रिया दी है. अनिल देशमुख ने कहा कि क्योंकि हमने सवाल किया था कि क्या भारतीय जनता पार्टी गुप्तेश्वर पांडेय के लिए प्रचार करेगी, इसी एक सवाल से डर पैदा हुआ और ना बीजेपी और ना ही जदयू ने उन्हें टिकट दिया.

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गुप्तेश्वर पांडेय 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे। उन्होंने 2009 में भी वीआरएस लिया था। बताया जाता है कि वह बक्सर से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे पर टिकट कंर्फ्म नहीं हुआ। बाद में उन्होंने वीआरएस वापस ले लिया। इसके बाद 2020 में उन्होंने दूसरी कोशिश की. दूसरी बार उन्होंने VRS लिया और डीजीपी का पद छोड़कर जदयू में शामिल हो गए. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में जदयू की सदस्यता भी ली। उनके बक्सर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें काफी दिनों से थी। लेकिन बक्सर सीट भाजपा के कहते में चली गयी. बुधवार को भाजपा ने बक्सर सीट के लिए परशुराम चतुर्वेदी को टिकट दे दिया।

जदयू से टिकट नहीं मिलने पर गुप्तेश्वर पांडेय ने फेसबुक पर सफाई दी. उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा, अपने अनेक शुभचिंतकों के फोन से परेशान हूं, मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूं. मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूंगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा. हताश निराश होने की कोई बात नहीं है. धीरज रखें. मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है. मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूंगा. कृपया धीरज रखें और मुझे फोन नहीं करे. बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है.”

हालांकि बिहार के पूर्व डीजीपी को जदयू से टिकट नहीं मिल पाया लेकिन एक और पूर्व आईपीएस सुनील कुमार को जदयू ने टिकट दिया है. सुनील कुमार गोपालगंज के भोरे विधान सभा सीट से जदयू के उम्मीदवार होंगे। वहीं जदयू ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम काण्ड के कारण इस्तीफा देने वाली पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को भी टिकट दिया है. मंजू वर्मा को बेगुसराई के चेरिया बरियारपुर सीट से जदयू से टिकट मिल चूका है.

बिहार विधान सभा चुनाव तीन चरणों में होने है. पहला चरण 28 अक्टूबर, दूसरा 3 नवंबर और आखरी चरण के लिए 7 नवंबर को वोटिंग होगी। चुनाव आयोग द्वारा बिहार चुनाव के नतीजों का ऐलान 10 नवंबर को किया जायेगा।

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