निलंबन से मुक्त होंगी आईपीएस अनुसूइया!!

वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर तक जो खबरें पहुंच रही हैं उस से इस बात की संभावना प्रबल हुई है कि शेखपूरा की तत्कालीन एसपी अनुसूइया निलंबन से मुक्त हो सकती हैं. पर उनकी इस मुक्ति का सबसे नाकारात्मक असर डीजीपी की छवि पर पड़ सकता है. कैसे? आगे पढ़ें.

भीतरखाने को मानें,तो आईपीएस अनुसूइया रणसिंह साहू निलंबन से मुक्‍त होने जा रहीं हैं. 2006 बैच की अनुसूइया को पिछले साल बिहार सरकार ने सस्‍पेंड कर दिया था. तब वह शेखपुरा की एसपी थीं . अनुसूइया के खिलाफ खनन माफिया से सांठ-गांठ रखने का गंभीर आरोप लगा था . कुछ फोन भी टेप किये गये थे,जिनसे एसपी की मिलीभगत जाहिर हो रही थी.

अनुसूइया को निलंबन-मुक्‍त करने का अंतिम निर्णय हो गया,तो इसके कई मायने निकलेंगे. पुलिस हेडक्‍वार्टर की पालिटिक्‍स व मुखिया अभयानंद की वर्तमान कद-काठी का भी लोग विश्‍लेषण करेंगे. डीजीपी ने अनुसूइया के खिलाफ कार्रवाई कर जीरो टालरेंस की सख्‍ती दिखाने की कोशिश की थी . कहा गया था कि आरोप भी पुख्‍ता हैं. ऐसे में,यह जानना आवश्‍यक होगा कि बगैर विभागीय कार्यवाही के पूर्ण हुए निलंबन-मुक्ति का आधार क्‍या सब बनाया गया .

निलंबन के बाद अनुसूइया ने भी बहुत कुछ बोला था. अनुसूइया के बाद शेखपुरा पहुंचे एसपी बाबू राम 2013 के प्रारंभ में ही कूटाई मामले में फंस गये. वैसे उन्‍होंने अपने कार्यकाल में खनन माफिया की नकेल जिले में कस दी थी. नीतीश कुमार के आदेश पर हुई जांच के बाद दर्ज प्राथमिकी में एसपी पर भी आरोप है . मामले की जांच अब सीआइडी को सौंपी गई है. कूटाई के शिकार को इलाज हेतु एम्‍स,दिल्‍ली भेजा गया है. सरकार ने मुआवजे की घोषणा भी की है.

अनुसूइया रणसिंह के बाद बिहार में निलंबित होने वाले दूसरे आईपीएस छपरा के डीआईजी आलोक कुमार हैं. आलोक के खिलाफ शराब कारोबारी से दस करोड़ रुपये की रिश्‍वत मांगने का गंभीर आरोप है .तीन दलाल पकड़े भी गये. मामले की जांच आर्थिक अपराध यूनिट कर रही है. पूछताछ के लिए हाजिर होने को कहा गया है,लेकिन बहाने कर वे उपस्थित नहीं हो रहे.

ज्ञानेश्वर का अपाध जगत और पुलिस प्रशासन की खबरों पर खासा रसूख रखते हैं. वह दैनिक आज और दैनिक जागरण में अपनी सेवायें दे चुके हैं.

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