नीतीश की अधिकार यात्रा को “विरोध” और “वेदना” की चुनौती

नीतीश कुमार की अधिकार यात्रा को अब वेदना और विद्रोह से चुनौती मिलने लगी है.

पिछले एक हफ़्ते में नीतीश की रैलियों में जहां आम लोगों के भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है वहीं पूर्णिया में भाजपा के सांसद उदय सिंह ऐन अधिकार रैली के दिन वेदना रैली का आयोजन कर के इस विरोध को और तीव्रता देने में सफल रहे हैं.

पिछले कुछ दिनों में नीतीश कुमार को मधुबनी और सुपौल में आम जनता के आक्रोश से दो चार होना पड़ा. मधुबनी की रैली में नियोजित शिक्षकों ने नीतीश के विरोध में चप्पलें उछालीं तो सुपौल की रैली में पत्थरबाजी भी हुई.

अपने शासनकाल के पिछले सात वर्षों में नीतीश ने आधा दर्जन से ज्यादा यात्रा की है पर जनता की ऐसी प्रतिक्रिया पहले कभी नहीं मिली थी.

इधर सासंद उदय सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र पूर्णिया में वेदना रैली निकाल कर यह स्पष्ट करने की कोशिश की सुशासन की सरकार में नौकरशाह निरंकुश हो गये हैं जिसके कारण जनप्रतिनिधियों को अपमान झेलना पड़ रहा है. उदय सिंह की इस रैली में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

वेदना रैली में उदय सिंह ने कहा कि सभी पंचायत के मुखिया को पंचायत राज प्रतिनिधि से मिलकर अपने अपने पंचायत की समस्या, गरीबों की महत्वपूर्ण समस्या का जिक्र करते हुए श्वेत पत्र तैयार करें और इस श्वेत पत्र को अपने विधायक को सौंप कर उनपर राज्य सरकार तक उनकी समस्या को पहुंचायें.

नीतीश कुमार इन दिनों राज्य भर की यात्रा पर निकले हैं. इस यात्रा का नाम अधिकार यात्रा दिया गया है. सत्ताधारी जद यू ने आगामी चार नवम्बर को पटना में अधिकार रैली का आयोजन किया है जिसमें बिहार को विशेष दर्जा देने की मांग केंद्र सरकार से की जायेगी.

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