नीतीश की सियासत में आमिर{ सुबहानी} की इमारत

नीतीश कुमार के राजनीतिक उदय की सबसे बड़ी प्रशासनिक पहचानों में से एक आमिर सुबहानी अब गृह सचिव नहीं रहे.मांझी ने उन्हें सामान्य प्रशासन में भेज दिया है. इस बीच कई इमारतें ढ़हीं पर आमिर की इमारत कायम रही.

नीतीश और आमिर:एहसान के बदले एहसान

नीतीश और आमिर:एहसान के बदले एहसान

इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन

टॉप लेवल की नौकरशाही पर लगतार चार वर्षों तक जमे रहना एक उदाहण ही है. वरना नौकरशाही में ऐसे भी नमूने हैं कि कई अफसर हर दूसरे साल किसी और पद पर नजर आते हैं.

जानने वालों को पता है कि आमिर सुबहानी नीतीश से उन दिनों करीब आये जब नीतीश, लालू शासन के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे. सुबहानी की नीतीश से हुई इस कुरबत का खामयाजा भी लालू ने आमिर को दिया और उन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में शरण लेना पड़ा.

यू मिला फल

लेकिन उन्हें कोई दो तीन सालों में ही बदले निजाम का फायदा मिला और आमिर नीतीश की आंखों के तारा बन गये, जैसे ही नीतीश ने  2005 के नवम्बर के आखिरी सप्ताह में सत्ता संभाली, दो महीने के अंदर यानी मार्च 2006 में आमिर पटना बुला लिये गये और कम्फेड के चेयरमैन बना दिये गये. चार महीने में तरक्की पा कर सुबहानी ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल पर पहुंच गये. 2008 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव के रास्ते 2009 के अक्टूबर में गृह सचिव की बागदोड़ संभाल ली. लगातार चार सालों तक यहां रहने के बाद सुबहानी अब सामान्य प्रशासन विभाग में भेजे गये हैं.

गृह सचिव का पद न सिर्फ महत्वपूर्ण माना जाता है बल्कि लॉ एन ऑर्डर जैसे संवेदनशील मुद्दे की जिम्मेदारी भी ऐसे ही नौकरशाहों को सौंपी जाती है जो विश्वस्नीय हो. नीतीश ने तभी तो आमिर को चुना. 2010 में जब नीतीश दोबारा मुख्यमंत्री बने तो कई नौकरशाह यहां से वहां किये गये पर आमिर की इमारत तब भी कायम रही.

आलोचना

बतौर गृह सचिव आमिर सुबहानी का दौर मिला जुला रहा है. कई बार उन्हें प्रशंसा मिली तो कई बार तीखी आलोचना के शिकार हुए. लेकिन फारबिसगंज गोली कांड ने आमिर की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया. यहां पर खुद नीतीश सरकार कटघरे में खड़ी हुई. भाजपा के एक एमएले के ऊपर आरोप लगा कि उनके इशारों पर पुलिस ने फारबिसगंज के पिछड़े मुसलमानों की औरतों और बच्चों के ऊपर न सिर्फ गोलियां चलाई बल्कि बेरहम पुलिस ने घायलों के सीनों को रौंदा. इसकी वीडियो सोशल मीडिया और यूट्यूब पर वाइरल भी हुई. इस गोली कांड की जांच खुद सुबहानी की देख रेख में हुई. मुसलमानों की नजर में आमिर की भूमिका काफी मशकूक हुई. वह मुसलमानों के निशाने पर आये और मुसलमानों ने उन्हें एहसान फरामोश तक कह दिया. आरोप यहां तक लगाये गये कि अपनी सरकार और प्रशासन को बचाने में आमिर सुबहानी ने गलती रिपोर्ट दी.

प्रशंसा

ऐसे ही कई मामलों मैं सुबहानी की काफी आलोचना हुई. लेकिन यह तय है कि सुबहानी नीतीश की आंखों के अब भी तारा बने हुए हैं. अगर आमिर का ट्रांस्फर तकनीकी कारणों से नहीं हुआ होता तो उनके खूंटे को उखाड़ना आसान नहीं होता. वह चार साल की मियाद पूरी कर चुके हैं.यही कारण है कि वे सामान्य प्रशासन के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की जिम्मेदारी के लिए चुने गये हैं. वह पद भी अहम माना जाता है. आमिर की नौकरशाही के गलियारे में जहां तक छवि का मामला है तो खुद अंदर से कई वरिष्ठ नौकरशाह उनके कार्यक्लापों के प्रशंसक भी हैं. वरिष्ठ आईएएस अफसर विजय प्रकाश उनमें से एक हैं.  कृषि आयुक्त विजय प्रकाश कहते हैं कि आमिर सुबहानी की ईमानदारी और निष्ठा तो सराहनीय है ही उनकी प्रशसनिक दक्ष्ता भी काबिले तारीफ है. गृहसचिव के बतौर उनकी भूमिका पर विजय प्रकाश कहते हैं कि उन्होंने काफी संवेदनशाली मामलों जैसे पटना ब्लास्ट, रावण दहन या फिर मधुबनी गोलीकांड में  एक अच्छे प्रशासक की भूमिका निभाई है. यही कारण है कि सरकार भी उन पर भरोसा करती रही है.

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