नीतीश-मोदी पर मनोवैज्ञानिक हमला है ‘देश बचाओ भाजपा भगाओ रैली’

यह रैली नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर मनोवैज्ञानिक हमला है. हमले की कमान लालू के हाथ में नहीं, बल्कि तेजस्वी के हाथ में है. तेजस्वी ललकार रहे हैं कि आइए सुमो और गिनिये कि कितने लोग हैं. बाद में नही कहियेगा कि लोग कम थे. इर्शादुल हक, एडिटर नौकरशाही डॉट कॉम

तेजस्वी 25 की रात से ही दावा पर दावा किये जा रहे हैं कि लाखों लोग पहुंच रहे हैं. लाखों पहुंच चुके हैं और लाखों रास्ते में है. अब जबकि रैली शुरू होने की औपचारिकता तय हो गयी है, गांधी मैदान भर चुका है. तेजस्वी उत्साह में कह रहे हैं  ओ माई गॉड इतनी भीड़ की आशा तो मुझे भी नहीं थी. हमने तो 25 लाख लोगों की उम्मीद की थी, यह तो उसे भी पार कर रही है.

जद यू के, राजद गठबंधन बने रहने तक इस रैली का निशान सिर्फ भाजपा थी. लेकिन 27 जुलाई को जब जद यू ने भाजपा के साथ सरकार बना ली और राजद से अलग हो गया तो इस रैली के विरोध की धार की जद में नीतीश भी आ गये. अब इस रैली के माध्यम से तेजस्वी यह बार बार दोहरा रहे हैं कि नीतीश ने बिहार के वोटरों के साथ विश्वासघात किया. इस विश्वासघात का जवाब गांधी मैदान की रैली से देना चाहते हैं तेजस्वी. इस पूरे रैली की कमान तेजस्वी के हाथों में है. लालू सिर्फ संरक्षक की भूमिका में हैं. सारी तैयारी, सारे फैसले तेजस्वी के स्तर पर लिये जा रहे हैं. और हमला का सारा निशान जुनियर और सीनियर मोदी पर तो है ही, नीतीश भी इस निशाने पर हैं.

यह रैली अगर कामयाब होती है तो तेजस्वी का आत्मविश्वास बढ़ेगा. इस कामयाबी का श्रय भी उनको जायेगा. इसलिए तेजस्वी ने इस रैली के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया है. इस रैली से उत्साहित तेजस्वी ने ताबड़तोड़ हमले जारी रखे हैं. इस हमले में आक्रामकता तो है ही, मनोवैज्ञानिक हथियार भी वह इस्तेमाल कर रहे हैं. भले ही इस रैली में सोनिया, राहुल और मायावती नहीं हैं, पर ममता, अखिलेश के साथ साथ पूरा वाम और लगभग तमाम क्षेत्रीय पार्टियां हैं.

बाढ़ का भी जवाब दें तेजस्वी

तेजस्वी इन तमाम पार्टियों के शामिल होने के कारण भी उत्साह में हैं. तेजस्वी को पता है कि रैली की समाप्ति के बाद विरोधी आम तौर पर रैली में मौजूद लोगों की संख्या को ले कर दावे को झूठ करार देते हैं, इसलिए इस झूठ को खारिज करने के लिए तेजस्वी ने रैली से पहले ही सुशील मोदी को आमंत्रित कर दिया है कि वे आयें और देखें कि कितने लोग हैं. रैली की समाप्ति के बाद भाजपा के लोग बाढ़ पीड़ितों की पीड़ा पर जश्न मनाने का आरोप लगायेंगे, ऐसे में तेजस्वी को इसका काट खोजना पड़ेगा. हो सके तो उन्हें रैली में ही अपने लोगों से बाढ़ राहत में डोनेट करने की अपील करके वह एक अच्छा जवाब दे सकते हैं.

About Editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*