नौकरशाहों के चक्रव्यूह के कारण नहीं मिला पत्रकारों को पेंशन

– दो साल बाद भी बिहार में एक भी पत्रकारों को नहीं मिला पेंशन
-जीतन राम, मांझी सरकार ने शुरू किया था पत्रकार पेंशन बीमा योजना
नौकरशाही ब्यूरो, पटना

नौकरशाहों के चक्रव्यूह के कारण नहीं मिला पत्रकारों को पेंशन

नौकरशाहों के चक्रव्यूह के कारण नहीं मिला पत्रकारों को पेंशन

नौकरशाहों के चक्रव्यूह के कारण बिहार में पत्रकार पेंशन योजना के तहत एक भी पत्रकार को इसका लाभ नहीं मिला. योजना के दो साल बाद भी बिहार में एक भी पत्रकारों को नहीं मिला पेंशन. जीतन राम मांझी के नेतृत्व वाली सरकार ने इस योजना को 2014 में शुरू किया था. पत्रकार पेंशन बीमा योजना में 20 साल वाले पत्रकारों को रखा गया और इसी का परिणाम रहा की एक भी प[उतरकर इससे लाभ नहीं ले सके. यह सवाल गुरुवार को बिहार विधान परिषद में भी गूंजा. इसके बाद बिहार सरकार ने तय किया है की पत्रकार पेंशन योजना में संशोधन होगा. ईपीएफ कटौती से मिलने वाली पेंशन से राज्य सरकार की पेंशन योजना में कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन दूसरी किसी पेंशन योजना का लाभ मिला तो पत्रकार सरकार की योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे पत्रकारों को बीस साल की जगह दस साल की सेवा अवधि पूरी करने का प्रमाण पत्र देना होगा. जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने यह घोषणा गुरुवार को विधान परिषद में की.

 

वह भाजपा के प्रो. नवल किशोर यादव के एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार की ओर से वक्तव्य दे रहे थे. उन्होंने कहा कि पेंशन योजना में संशोधन के लिए राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया था. कमेटी ने अपनी अनुशंसा में ईपीएम कटौती से मिलने वाली पेंशन पाने वाले को सरकार की पेंशन नहीं देने वाले बिन्दु को हटाने की अनुशंसा की है.
भाजपा के एमएलसी नवल किशोर यादव ने बाद में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दो साल से ज्यादा समय हो गये लेकिन एक को भी लाभ नहीं मिला, बताइए एेसी योजना का क्या लाभ? उसी के संसोधन में हमने विधान पर्षद में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दिया था. हमारे प्रस्ताव के बाद सरकार ने उसके खंड तीन के भाग एक को बदल दिया है. बीस साल के अनुभव को कम कर अब दस साल का अनुभव कर दिया है. हमने यह भी कहा है कि पांच हजार के पेंशन को दस हजार कर दिया जाये. हमने जो संसोधन दिया है उसे सरकार ने लगभग मान लिया है.

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