पटना ब्लास्ट का असल गुनाहगार कौन, सिमी या आईएम?

बिहार पुलिस ने पटना बम विस्फोट पर इंडियन मुजाहिदीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है.जबकि छत्तीसगढ़ पुलिस का दावा है कि इसके पीछ सिमी का हाथ है. आखिर कौन है इसका गुनाहगार?simi

छ्त्तीसगढ और बिहार पुलिस के अलग-अलग दावे से भ्रम की स्थिति होने लगी है. क्योंकि गांधी मैदान थाना में बतौर सूचक थानाध्यक्ष राज बिन्दु प्रसाद ने प्राथमिकी में आइएम के प्रतिबंधित संगठन होने का हवाला दिया है और तहसीन उर्फ अख्तर उर्फ मोनू व हैदर को नामजद किया है.

इसबीच आतंकवाद की जांच करने वाली एजेंसी एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने भी इस विस्फोट में (आईएम) इंडियन मुजाहिदीन का ही नाम लिया गया है. लेकिन इस बीच बुधवार को छत्तीसगढ पुलिस के डीजीपी रामनिवास ने दावा किया कि पटना ब्लास्ट में सिमी यानी स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट का हाथ है. इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि एनआईए और बिहार पुलिस जिस हैदर अली को आईएम का सदस्य बता रहे हैं, उसे छत्तीसगढ पुलिस सिमी का सदस्य बता रही है.

एनआईए और छत्तीसगढ़ पुलिस के अलग अलग बयानों से यह साफ होता जा रहा है कि दोनों एजेंसियों में न सिर्फ तालमेल की कमी है बल्कि एक दूसरे के ऊपर तोहमत भी लगाने लगे हैं.

पिछले दिनों एनआईए ने छत्तीसगढ़ पुलिस की मीडिया में अपनी बात कहने पर ऐतराज जताया था. तो दूसरे ही दिन छत्तीसगढ के डीजीपी ने बाजाब्ता पत्रकारों को बुला कर कई ऐसी सूचनायें सार्वजनिक की जो एनआईए और बिहार पुलिस के अनुसंधान और दावे के बिल्कुल बरअक्स है. इस संवेदनशील मामले पर अलग अलग जांच एजेंसियों की अलग अलग राय सामने आने से न सिर्फ इनमें आपसी तालमेल की कमी उजागर होने लगी है बल्कि इनके बीच अहम के टकराव भी दिखने लगे हैं.

दर असल पिछले दिनों एनआईए के एक सूत्र ने आरोप है कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने जांचकर्ताओं की रायपुर में उपस्थिति की खबर मीडिया को दे दी जिससे इंडियन मुजाहिदीन के संचालकों को वहां से भागने में मदद मिल गयी.

एनडीटीवी.कॉम के अनुसार एनआईए के सूत्रों का आरोप है कि रायपुर पुलिस ने एनआईए की गतिविधियों की सूचना मीडिया को दे दी जिसके कारण आईएम के संचालकों को इसकी सूचना मिल गयी और वे वहां से निकल भागने में कामयाब रहे.

लेकिन एनआईए के इस बयान को छत्तीसगढ़ पुलिस ने नागवार माना और दूसरे ही दिन यानी बुधवार को पुलिस महानिदेशक रामनिवास ने पत्रकारों को बुला कर जो बातें कहीं वह एनआईए के अनुसंधान थ्यूरी के बिल्कुल उलट हैं. रामनिवास ने कहा कि छत्तीसगढ पुलिस ने कुछ ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जिससे पता चलता है कि पटना और बोध गया ब्लास्ट में सिमी का हाथ है. रामनिवास ने कहा कि रायपुर से गिरफ्तार उमेर सिद्दीकी सिमी का कार्यकर्ता है और उससे जो जानकारी मिली है उससे पता चलता है कि उस विस्फोट में उसकी संलिप्तता थी. छत्तीसगढ पुलिस का दावा इसलिए भी एनआईए के विपरीत है क्योंकि डीजीपी रामनिवास के अनुसार पिछले सप्ताह सिमी के सदस्यों के साथ गिरफ्तार उमेर सिद्दीकी ने सात जुलाई को बोधगया मंदिर में हुए धमाकों में मास्टरमाइंड की भूमिका निभाई थी.

हैदर अली, सिमी का या आईएम का?

वहीं दूसरी तरफ एनआईए ने इस हफ्ते के शुरू में एनआईए के पांच आप्रेटिव्स के नाम और फोटो सार्वजनिक किये हैं जो इंडियन मुजाहिदीन यानी आईएम के सदस्य बताये गये हैं. एनआईए ने इनके सर पर 5 लाख से 10 लाख रुपये का इनाम भी रखा है. इनमें तहसीन अख्तर, हैदर अली, नुमान अंसारी, तौफीक अंसारी और अब्दुल्लाह के नाम शामिल हैं. इसमें चौंकाने वाली बात यत यह है कि जिस हैदर अली को एनआईए आईएम का सद्सय बता रही है, उसे छत्तीसगढ़ पुलिस सिमी का सदस्य बता कर एनआईए की जानकारियों को एक तरह से चैलेंज कर दिया है.

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