पटना ब्लास्ट: खुलने लगी एनआईए, मीडिया के झूठ की कलई

पटना ब्लास्ट मामले में एनआईए और कुछ मीडिया घरानों के झूठ की कलई की परतें एक एक कर खुलने लगी हैं.Patna_blast

जिस मेहर आलम को मीडिया आतंकी बता रहा था और उसे मुजफ्फरपुर से एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी के हाथ से फरार होने और फिर कानपुर में गिरफ्तार होने की बात कह रहा था वह सफेद झूठ निकला.

झूठ नम्बर एक

पहला झूठ तो यह कि मेहर आलम को आतंकी बताने वाले मीडिया के बारे में पिछले बुधवार को आतंकी स्वीकार करने से ही एनआईए ने इनकार कर दिया था (स्रोत एनआईए की प्रेसनोट).

झूठ नम्बर दो

इस मामले में दूसरे झूठ का पर्दाफाश किया है दैनिक जागरण के पत्रकार नीलू रंजन ने. नीलू ने अपनी खबर में 8 नवम्बर को लिखा है “पटना धमाकों की जांच कर रही एनआइए की गिरफ्त से फरार कथित आतंकी की गिरफ्तारी की झूठी खबर उड़ाई गई थी. हकीकत यही है कि मुजफ्फरपुर से पिछले बुधवार को फरार मेहर आलम का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है”.
फरारी के 24 घंटे के भीतर कानपुर के पास पनकी में मेहरे को गिरफ्तार ही नहीं किया गया था. वैसे एनआइए उसे आतंकी के बजाय गवाह बता रही है, लेकिन उसके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि खुद एनआइए के पास मदद के लिए आने वाला आलम चकमा देकर क्यों भाग गया?

इस बीच जब मीडिया ने मेहर के फरारी की खबर चलायी तो एनआईए की किरकिरी शुरू हो गयी. इस घटना के कुछ ही देर बाद एनआईए ने अपनी वेबसाइट पर मेहर आलम की फरारी का उल्लेख करते हुए लिखा कि मेहर आतंकी नहीं था, बल्कि वह एक गवाह था जिसे पटना ब्लास्ट के दो दिन पहले बोधगया ब्लास्ट मामाले में एक नोटिस देकर एनआईए के गया दफ्तर में बुलाया गया था.

झूठ नम्बर तीन

पटना ब्लास्ट मामले में मीडिया के बढ़बोलेपन की एक और कलई तब खुली जब कुछ चैनलों ने ब्लास्ट के दूसरे दिन ही घोषणा कर दी कि इस ब्लास्ट में दरभंगा माड्यूल का इस्तेमाल हुआ है. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया और रांची पर एनआईए की निगाहें केंद्रित होती गयीं तो मीडिया के इन्ही ग्रूप ने अपनी जुबान बदलते हुए इस घटना को रांची माडयूल घोषित कर दिया. जांच जैसे जैसे आगे बढेगी मीडिया के एक वर्ग के बढ़बोलेपन की कलई अभी और खुलेगी.

इधर जैगरण ने सुरक्षा एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से लिखा है कि बोधगया और पटना धमाके के मास्टरमाइंड तहसीम अख्तर और हैदर अली के बारे में अहम जानकारी रखने वाला मेहरे आलम कोई सामान्य ‘गवाह’ नहीं है. एनआइए ने खुद स्वीकार किया है कि मेहर आलम को लेकर उसकी टीम मुजफ्फरपुर के मीरपुर गांव में हैदर अली की तलाश में गई थी। टीम ने 29 और 30 अक्टूबर की रात को मीरपुर में आलम के बताए घरों की तलाशी भी ली थी.

आपको बता दें कि एनआईए जांच की संवेदनशीलता और गोपनीयता के मद्देनजर औपचारिक रूप से कभी प्रेस से बात नहीं करती. हां, बहुत अनिवार्य होने पर वह सूचना को प्रेस नोट के बतौर जारी करती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*