पता है? इन आईएएस ने लगाया था चारा घोटाले के बवंडर में पलीता

आईएएस अमित खरे को रत्ती भर भी एहसास नहीं था कि भ्रष्टाचार के जिस बवंडर को उन्होंने 17 साल पहले पलीता लगाया वह लालू प्रसाद को सलाखों तक पहुंचा देगा.जानिए, कैसे हुआ यह सब?

अमित खरे: अंजाने में बड़ा काम

अमित खरे: अंजाने में बड़ा काम

अनवारुल होदा, पटना से

1985 बैच के यह आईएएस अधिकारी 1996 में चाइबासा सिंहभूम के डीएम थे.एक दिन अचानक उन्होंने पाया था कि 1995 के नवम्बर और दिसम्बर में ट्रेजरी से क्रमश:10 करोड़ और 9 करोड़ रुपये निकाल लिये गये थे. तब ट्रेजरी से अचानक इतनी रकम का निकाला जाना संदेह को जन्म दिया था. खरे ने बतौर डीएम इसकी जांच कराने की बात सोची.

आज दुनिया चारा घोटाला और उसके नतीजे पर बहस कर रही है तो कम लोगों को पता है कि इस घोटाले को उजागर करने वालों में अमित खरे का ही हाथ था.

फिलहाल अमित खरे केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर हैं.

हुआ यूं था

27 जनवरी 1996 को चाइबासा ट्रेजरी से निकाली गयी रकम की जांच करवाने की बात खरे ने सोची. और इस क्रम में वह पशुपालन विभाग के कर्मियों के रवैये पर नजर रखने लगे. इस दौरान उन्होंने पाया कि इस महकमे से जुड़े कुछ अधिकारी अचानक गायब हो चुके हैं. अमित खरे 17 साल पुरानी घटना को याद करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया को बताते हैं- “मैंने उन अधिकारियों को बुलावा भेजा पर पता चला कि वे भाग खड़े हुए हैं. तब फिर मेरा संदेह गहरा हो गया”.

खरे जब पशुपालन विभाग के दफ्तर में पहुंच तो पाया कि किसी ने रकम के लेन-देन की फाइल को नष्ट करने की कोशिश की है. वह बताते हैं कि “हमने पाया कि दफ्तर में लगभग 20 लाख रुपये के लेन देन का बिल पड़ा हुआ था, वहां दस लाख रुपये भी थे”.

खरे ने इस दिन होशियारी यह की उन्होंने घटना स्थल की विडियो रिकार्डिंग करवा ली. चूंकि सारे कर्मी भाग चुके थे इसलिए उसके बाद उन्होंने उनको पकड़ने के लिए छापामारी शुरू करवा दी. यह छापामारी दुमका से लेकर रांची तक की गयी.

हालांकि खरे को इस घोटाले की जांच और इन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की कीमत भी चुकानी पड़ी. जल्द ही उन्हें ट्रांस्फर कर दिया गया और एक मृत पड़े बिहार स्टेट लेदर कार्पोरेशन का एमडी बना दिया गया. जहां के कर्मियों को महीने से वेतन तक नहीं मिला था.

आज 17 सालों के बाद अदालती फैसला आ चुका है. और इस मामले में लालू प्रसाद यादव और जगन्नाथ मिश्र के अलावा 43 लोग दोषी करार दिये जा चुके हैं.

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