परवीन अमानुल्लाह: अपरोक्ष निशाने पर नीतीश

नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा देने वाली बिहार की एक मात्र महिला मुस्लिम मंत्री परवीन अमानुल्लाह ने नौकरशाही डॉट इन के सम्पादक इर्शादुल हक को इंटर्व्यू दिया है.उन्होंने अपरोक्ष निशाना नीतीश पर साधा है पढें क्या हैं उनके इरादे-parveen2

परवीन निश्चित तौर पर मंझी हुई राजनेता नहीं हैं. उनकी राजनीतिक उम्र ठीक उतने ही वर्ष की ही है जितने वर्ष से वह मंत्री थीं, यानी लगभग 3 वर्ष. पहली बार जद यू में शामिल हुईं, जीतीं और मंत्री बनीं. वो भी कैबिनेट मंत्री. कैबिनेट में बिहार की वह पहली मुस्लिम महिलां थीं. पर अब नहीं हैं. उनका घराना ब्यूरोक्रेटिक-पॉलिटकल घराना रहा है. पिता सैयद शहाबुद्दीन भारतीय विदेश सेवा के तब अधिकारी हुआ करते थे जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के विदेश मंत्री हुआ कते थे. यह वही शहाबुद्दीन थे जिन्होंने विदेश सेवा की नौकरी छोड़ कर राजनीति में कूदे थे. 1990 के दशक में बाबरी मस्जिद आंदोलन के दौरान एक विवादित नाम थे शहाबुद्दीन. बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी की तरफ से मुसलमानों के पक्ष को रखने में धार्मिक भावनाओं के दोहन करने का आरोप भी उनपर लगे. इधर पति अफजल अमानुल्लाह बिहार के वरिष्ठ आईएएस और होम सेक्रेट्री की महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में हैं.

एक ब्यूरोक्रेटिक घराने में पलीं बढ़ी परवीन का सारा गुस्सा ब्यूरोक्रेसी पर ही है, या यूं कहें कि उनका राजनीतिक निशाना ब्यूरोक्रेसी ही है. पढ़े इस साक्षात्कार में परवीन काफी हद तक खुल कर बोलीं. लेकिन काफी चीजें छुपाने और गोलमोल कह कर गुजरने का भी रवैया अपनाया. पर इस साक्षात्कार से उनके भविष्य के संभावित कदमों की ओर इशारे मिलते हैं

मुख्यमंत्री के मनाने के बावजूद आप न मानीं. अपने इस्तीफे पर कायम हैं?

परवीन- हां अब मैं अपना फैसला वापस नहीं लूंगी.

तो फिर आगे क्या इरादा है?

परवीन- अभी कुछ फाइनल तय नहीं किया है.

बिना तय किये ही इस्तीफा दे दिया. क्या मतलब?

(फोटो प्रभात खबर.कॉम)

(फोटो प्रभात खबर.कॉम)

परवीन- यह सिस्टम काम करने के लायक नहीं था. काफी दिनों से मैं अपने स्तर पर चीजें ठीक करने में लगी थी. काफी हद तक चीजें ठी हुई भी. पर ब्यूरोक्रेसी पूरे सिस्टम पर हावी है. वह अपने तरीके से काम करती है. यही कारण है पूरे सिस्टम की खराबी का. अब आगे क्या करना है, कैसे करना है समय पर बताऊंगी.

सिस्टम गड़बड़ है तो क्या आप उसके खिलाफ लड़ना चाहती हैं?

परवीन- लड़ना तो पड़ेगा. चीजें ठीक होनी चाहिए.

तो क्या इस तरह की लड़ाई को आगे बढ़ाने में आपको दिल्ली( आप के आंदोलन) में चल रहे आंदोलन से प्रेरणा मिल रही है.

परवीन- निश्चित तौर पर दिल्ली में चलने वाले आंदोलन से प्रेरणा मिली है.

तो क्या आप आम आदमी पार्टी के साथ मिल कर या उसमें शामिल होकर काम करेंगी?

परवीन- अभी ऐसा कुछ तय नहीं किया है.

अभी? मतलब कुछ ऐसा कर सकती हैं?

परवीन- जो भी करूंगी उसका आपको पता चल जायेगा.

आपने ऐसे समय में इस्तीफा दिया जब जद यू कई तरही की चुनौतियों में घिरा था. शिवानंद तिवारी पार्टी पर आक्रमण कर रहे हैं. एनके सिंह नीतीश से नाराज चल रहे हैं.

परवीन- मैं उन लोगों के बारे में कुछ नहीं कह सकती. पर मैंने जो फैसला लिया है उसका सही समय यही है.

एक मुस्लिम चेहरा का अचानक मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना. बिहार के मुसलमानों में जद यू के प्रति नाकारात्मक संदेश भेजेगा. इससे जद यू को नुकसान पहुंचेगा. आपको क्या लगता है?

परवीन- देखिए पार्टी या संगठन एक व्यक्ति से नहीं चलता और चलना भी नहीं चाहिए. एक आदमी आखिर इतना क्यों महत्वपूर्ण होना चाहिए कि उसकी वजह से संगठन को नुकसान पहुंचे?

आप नौकरशाही को कोस रही हैं. लेकिन आप उस घर में पली-बढ़ीं और ब्याही गयीं जो खुद नौकरशाह हैं या रहे हैं?

परवीन- मेरे पिता आईएफएस रहे हैं. पति आईएएस हैं. ये दोनों काफी अपराइट आफिसर रहे हैं. लेकिन इन दोनों में से कई फाइलें घर में लाकर थोड़े निपटाते थे. मैं उन्हें जानती हूं पर ब्यूरोक्रेसी को अब समझी हूं.

क्या समाधान है ब्यूरोक्रेसी को ठीक करने का. क्या नुस्खा है आपके पास?

परवीन- इसके लिए मिल कर काम करना होगा.

तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी तो कह रहे हैं कि मिल कर चीजों ठीक कीजिए. आपके सहयोगी मंत्री भीम सिंह, नरेंद्र सिंह भी कुछ ऐसा ही कह रहे हैं. तो फिर आप क्यों नहीं मिल कर काम करना चाहतीं?

परवीन- चुप्पी….

फिर से यही सवाल करने और कुरेदने पर

परवीन- देखिए हमें मुख्यमंत्री से जितना सहयोग मिलना चाहिए था, नहीं मिला. उनकी तरफ से और सहयोग मिलना चाहिए था.

तो क्या मुख्यमंत्री आपके साथ सहयोग नहीं कर रहे थे.

सिर्फ उनके सहयोग करने, कम सहयोग करने या न करने की बात नहीं है. पूरे सिस्टम का मामला है.

आप एक तरफ कहती हैं पूरे सिस्टम की खराबी का मामला है. दूसरी तरफ सिस्टम को ठीक करने और उससे लड़ने का कोई नुस्खा नहीं बता रही हैं, फिर करना क्या चाहती हैं आखिर आप?

परवीन- मैंने अभी कहा कि अभी तय नहीं किया है. पर जल्द ही आपको पता चल जायेगा कि क्या करना है हमें.

आप एक तरफ ब्यूरोक्रेसी के भ्रष्टाचार से लड़ने की बात कह रही हैं. पर कई लोग तो आप पर ही आरोप लगा रहे हैं कि ट्रांस्फर-पोस्टिंग और कई मामलों में आपके करीबी लोग लाखों रुपये रिश्वत लेते रहे हैं!

परवीन- (इस सवाल पर असहज होते हुए) देखिए इस तरह के सवाल का मैं क्या जवाब दूं. जो लोग इस तरह की बात कर रहे हैं वे सबूत दें. उनके खिलाफ कार्रवाई करें. अगर मैं दोषी हूं तो मेरे खिलाफ कानूनी कार्रवाई करें. इससे ज्यादा क्या कह सकती हूं.

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