परिवर्तन रैली में पत्रकार पर पुलिस का हमला

गांधी मैदान में परिवर्तन रैली में पुलिस ने पत्रकार प्रणय प्रियंवद को रोका, घसीटा और हमला भी बोला अगर रैली में शामलि लोग उनकी जान नहीं बचाते क्या होता कोई नहीं जानता.

इसी पुलिस अधिकारी ने हमला बोला था

इसी पुलिस अधिकारी ने हमला बोला था

पुलिस की इस कार्रवाई को कई पत्रकारों ने स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करार दिया है.

गांधी मैदान में 15 मई को परिवर्तन रैली में एक पुलिस अधिकारी ने पत्रकार प्रणय प्रियंवद को आयोजन के बीच में टोका- कहां इधर से उधर जा रहे हैं। जवाब हुआ – कैसेट देने जाना है…खबर चलेगी। मैं प्रेस से हूं। आर्यन टीवी से। कहां है आई कार्ड ये सवाल किया पुलिस अधिकारी ने। लीजिए देख लीजिए पत्रकार ने दिया जवाब। कार्ड देखने के बाद पुलिस अधिकारी ने कहा आप तो जनसंपर्क विभाग में काम करते हैं। आप पत्रकार नहीं हैं। पत्रकार ने कहा-सरकार का विभाग है सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, वही पत्रकारों के लिए परिचय पत्र जारी करता है।

इसे एग्रीडेशन कार्ड कहते हैं। ये वही है। पर वे मानने को तैयार ही नहीं… पुलिस अधिकारी ने कहा- हटाओ इसे यहां से। चार-पांच डंटाधारी पुलिस वाले घेर लेते हैं झट से जैसे अपराधी को घेरती है पुलिस। पुलिस अधिकारी पत्रकार को पकड़े रहते हैं। फिर कहते हैं- मारो…. मारो….। पत्रकार चिल्लाता है- प्रेस पर पुलिस का हमला है ये….। पुलिस वालों ने पत्रकार के साथ हाथापाई शुरू कर दी।
रैली में पहुंचे कई लोग ये सब देख रहे थे। लोगों को पुलिसिया बर्बरता देख गुस्सा आ गया। बैरिकेटिंग के अंदर से रैली में पहुंचे लोग पत्रकार की तरफ लपकते हैं बचाने के लिए । बाकी कई लोग नीतीश कुमार मुर्दाबाद के नारे लगाते हैं। तभी एक दूसरा पुलिस अधिकारी पहुंचता है स्थिति संभालने। बीच बचाव करने। पहले वाला अधिकारी कहता है— लाठी चार्ज करवा देंगे… लाठी चार्ज करवा देंगे.

प्रणय आर्यन टीवी में पत्रकार हैं

प्रणय आर्यन टीवी में पत्रकार हैं

पत्रकार बार-बार पूछता है- ये बताएं कि सरकार की ओर से कौन सा विभाग पत्रकारों के लिए कार्ड जारी करता है ? पर रंगदार पुलिस अधिकारी नहीं दे पाते हैं इसका जवाब। मतलब तो यही हुआ ना कि पुलिस नहीं चाहती रही कि रैली की खबर का सही करवेज हो। प्रेस का दो आई कार्ड जैसे बेमानी हो गया। एक पीआरडी का और दूसरा आर्यन टीवी का।
पत्रकार तो निहत्थे लोग हैं…पर जनता की ताकत से इनकी कलम को लाठी और गोली से ज्यादा ताकत मिलती है। इसी ताकत ने प्रणय प्रियंवद की जान बचा दी।

दो चश्मदीदों ने जो कैमरा के सामने कहा-

‘ हमने देखा कि प्रणय प्रिंबद ने आई कार्ड दिखाया. उसके बाद पुलिस ने बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया. उनको धक्का दे बाहर निकाल रहे थे. यहां तक कि मारपीट पर उतारू हो गए. हमलोगों ने काफी हो हल्ला किया.– चंद्रशेखर आजाद, डेहरी आन सोन
‘ प्रणय जी अपने आई कार्ड को दिखा रहे थे इतन में उन पर पुलिस वाले ने थप्पड़ चला दिया एक प्रेस वाले पर पुलिस दल-बल क के साथ आक्रमण करने की कोशिश की…हम कार्यकर्ता अगर उनका सपोर्ट नहीं करते तो वह यहां गांधी मैदान में नहीं बल्कि हॉस्पीटल में नजर आते…सरकार में इस तरह से पुलिस का मन बढ़ा हुआ है कि आम लोंगों को जीने में कठिनाई हो रही है ’.– कमलेश कुमार, दानापुर रोड.

इस घटना के बाद राज्य सरकार के मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि सरकार इस मामले की जांच करा रही है. दोषी पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. पर सवाल है कि क्या सचमुच कुछ करेगी. इस बीच पुलिस के इस व्यवहार के खिलाफ आईएएनएस न्यूज एजेंसी के पत्रकार इमारन खान ने स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करार देते हुए कहा है कि यह एक गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार के इशारे पर यह सब किया गया है तो यह और भी खतरनाक है. उन्होंने पुलिस के इस व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है. इस बीच बिहार प्रेस फ्रीडम मूवमेंट ने भी सरकार से मांग की है कि दोषी पुलिस वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए.

प्रणय प्रियंवद के बारे में

प्रणय प्रियंवद 1992 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. कई सालों तक बतौर फ्रीलांसर इन्होंने जनसत्ता, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण के लिए लिखा। दैनिक जागरण भागलपुर और गोड्डा में लगभग साढ़े चार वर्षों तक कार्य किया। प्रभात खबर धनबाद और पटना में कार्य किया। फोकस टीवी और हमार टीवी के लिए दो वर्षों तक पटना में रिपोर्टिंग की। पिछले लगभग तीन वर्षों से पटना में पत्रकारिता कर रहे हैं। सरकार की नीतियों, विभिन्न योजनाओं, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसे मुद्दों पर इनकी कई एक्सक्लूसिव खबरें चर्चित हुई हैं। वह कवि भी हैं और प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े हैं।

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