फर्जी देशभक्तों को डॉ. कफील, बस ड्राइवर सलीम व फडणवीस को बचाने वाले इमरान नहीं सुहाते

63 बच्चों की मौत पर पीएम की चुप्पी व योगी के कृत्रिम आंसू तो फर्जी देशभक्तों को नहीं सालती पर जान बचाने वाले डॉ. कफील, तीर्थयात्रियों की हिफाजत करने वाले सलीम और फडणवीस की रक्षा करने वाले इमरान शेख का नाम सुनते ही उनके शरीर में आग क्यों लग जाती है? बता रहे हैं सेराज अनवर

मुख्यमंत्री आदित्य नाथ का लम्बे अरसे तक संसदीय क्षेत्र रहे गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत पर कई बिंदु से बात हो चुकी है. मगर बीच बहस में जो पहलू छूट गया है, वह इंसानियत, कर्तव्य , संवेदना के मर जाने तथा राष्ट्रीयता का है. इन चीज़ों के मिलने से एक रौशन राष्ट्र का जो निर्माण होता है, असल में वही धार कहीं खो गयी है और इसीलिए जब कामचोर समाज में जब कोई ईमानदार शख़्स अपनी जिम्मेदारियाँ निभाता है तो हम चौंक उठते हैं, उसकी तारीफ़ों का पुल बाँध देते हैं.

हम बात कर रहे हैं डॉक्टर कफ़ील अहमद की. जिन्होंने अपने कर्तव्य का बख़ूबी निर्वाह किया.डॉक्टर कफ़ील ने बेमौत मरते बच्चों को बचाने का जो भी प्रयत्न किया,यह  उनका फ़र्ज़ था.उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया.भारतीय संस्कृति में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है.फ़रिश्ता बन कर नहीं,भगवान बन कर बच्चों को बचाने का उनका प्रयास वाक़ई सराहनीय है. प्रशंसा वाली बात नहीं है. अच्छे कार्यों की सराहना से समाज ऊर्जानवित होता है. दरअसल, आज हम ऐसे समाज का अंग हैं, जहाँ कर्तव्यबोध को नायकत्व मान बैठे हैं.

महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आदित्यनाथ ने एक योगी– संत होने के नाते इंसानियत निभायी या नहीं? एक शासक के बतौर अपने कर्तव्यों का निर्वाह किया या नहीं?संविधान के उस क़सम का किया हुआ, कि मैं शपथ लेता हूँ अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक और  शुद्ध अंत:करण से निर्वहन करूँगा.63 बच्चों की मौत के बाद भी मृतक परिवारों को सांत्वना के दो बोल भी ना बोलना किस कर्तव्य का निर्वहन है.प्रधानमंत्री जी पर ग़ुस्सा नहीं आता. उन्होंने तो उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान ही कह दिया था,कब्रिस्तान बना है तो शमशान बनना चाहिये या नहीं. यह संवेदनशीलता की अति है. उस वक़्त शमशान की जगह अस्पतालों में बेहतर सुविधा की बात की होती तो शायद जश्न आज़ादी की संध्या में हमें इस दर्दनाक हादसा से नहीं गुज़रना पड़ता.हम डिजिटल इंडिया की बात करते हैं.आधुनिक भारत का सपना दिखाते हैं.आज़ादी के सत्तर साल गुज़र गए.

अस्पतालों में हम बुनियादी सुविधा तक मुहैया नहीं करा सके. जब बच्चें आक्सीजन के बेग़ैर मर रहे हों तो भारत को हम कैसे आगे ले जाएगें?मौजूदा भारत में ही उड़ीसा के दाना माँझी को पत्नी का शव अस्पताल में एम्बुलेंस मुहैया नहीं होने से बारह किलोमीटर तक पैदल कंधे पर लाद कर ले जाना पड़ा था.सवाल यह भी है की डॉक्टर कफ़ील ने तो अपना फ़र्ज़ निभाया, उसी अस्पताल के अन्य चिकित्सकों ने भी अपना दायित्व निभाया?

फर्जी राष्ट्रवादियों को कफील, सलीम, इमरान नहीं पचते

बीआरडी कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर राजीव मिश्रा ने आक्सीजन सप्लाई करने वाली फ़र्म द्वारा सौ से अधिक पत्र लिखने के बावजूद पेमेंट रोके रखा.क्या उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि इसका नतीजा क्या हो सकता है? यही फ़र्क़ है डॉक्टर कफ़ील और दूसरों में. मुसलमानों की देशभक्ति को भले ही फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद की कसौटी में कसा जाता रहा हो, मगर जब भी देश संकट में घिरा या किसी पर मुसीबत आयी हो मुसलमान अपने कर्तव्य के निर्वहन में कभी पीछे नहीं रहा. वह चाहे जम्मू कश्मीर में आतंकी घटना के वक़्त जान जोखिम में डाल कर अमरनाथ यात्रियों को बचा रहा होता सलीम हो या फिर मासूम बच्चों की सांसे लौटाने की जद्दोजहद में जुटे डॉक्टर कफ़ील या हेलिकॉप्टर हादसा में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री फडणवीस की जान बचाने वाला इमरान शेख़ या दाना माँझी को 8.9 लाख आर्थिक मदद देने वाले बहरीन के प्रधानमंत्री ख़लीफ़ा सलमान अल खलीद . मुसलमान सबसे आगे खड़ा नज़र आता है.

इस्लाम सबसे पहले इंसानियत की सीख देता है. दीगर बात है की मुसलमान इस सबक़ को आज ख़ुद भूल गए हैं. इसीलिए, डॉक्टर कफ़ील को हम हीरो मान बैठते हैं.अपने दायित्वों के प्रति ईमानदार होना, सच में राष्ट्रीयता है.यह संघ विचारकों के गढ़े राष्ट्रवाद से भिन्न है.असल सवाल है, इंसानियत एवं संवेदना के मर जाने का. उन माताओं- पिताओं की जगह रख कर सोचिए जिन्होंने अपने लाल को खोया है. जब समाज, सभ्यता संवेदनहीन हो जाता है तो विखंडन की कहानी शुरू होती है.

                      लेखक: उर्दू दैनिक फ़ारूक़ी तनज़ीम पटना के

                               स्थानीय सम्पादक हैं 

                  Serajanwar2009@gmail. Com

               09835089114

One comment

  1. Seraj Anwar ne jo sawal kiya hai ki farji desh bhakton ko Dr kafil, tirth yatrion ko bachane wala Salim auur CM Fadnavis ko bachane wala Imran kyun nahi dikhai deta hai ? Jawab sidha hai ki choron ko sare najer aate hain chor. Farji desh bhakti kursi tak Jati hai auur Dr Kafil jaise ground worker ki naukari Jati hai baki log apni jaan de kar bhi Hindustan ki Shaan kayam rakhte hain.

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