बलात्कार के आरोपी आईपीएस को राष्ट्रपति पदक, हंगामा

पुलिसकर्मियों की बहादुरी के लिए राष्ट्रपति पदक इस बार आईपीएस एसआरपी क्ल्लूरी को दिया जाना देश भर में विवादों का कारण बना जा रहा है.कल्लूरी पर बलात्कार का आरोप है. इस पदक को उनसे वापस लेने की मांग उठने लगी है.

कल्लूरी पर पिछले दिनों आरोप लगा था कि उन्होंने एक जनजातीय महिला लेधा बाई का बलात्कार किया था.इतना ही नहीं आरोप है कि उन्होंने अपने जूनियर अधिकारियों को भी उसके साथ बलात्कार करने के लिए उकसाया था.

उस समय जब यह घटना हुई थी तो कल्लूरी छत्तीसगढ़ के सरगूजा जिले के एसपी थे.

इसी तरह का आरोप अंकित गर्ग पर भी लगा था जिन्होंने कथित रूप से एक अन्य जनजातीय महिला सोनी सूरी का शारीरिक शोषण किया था.

विभिन्न सामाजिक संगठनों, मीडिया से जुडे लोगों और बुद्धिजीवियों ने कल्लूरी को राष्ट्रपति पदक दिये जाने के खिलाफ एक अभिया छेड़ दिया है.

इन बुद्धिजीवियों ने जारी एक बयान में कहा है, “ ऐसा लगता है कि इन पुलिस अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा की घटना को अंजाम देने के लिए सरकार ने सम्मानित किया है.क्या हम महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते हिंसा को ऐसा करके रोक सकते हैं?

लेधा बाई एक जनजातीय परिवार से आती हैं और उनकी शादी रमेश नगेसिया से हुई है. नगेसिया सीपीआई (माओवादी) के सदस्य थे.लाधा को पुलिस वालों ने मश्वरा दिया था कि वह अपने पति को आत्मसमर्पण करने के कहें. उन्होंने ऐसा ही किया. लेकिन कल्लूरी के नेतृत्व में पुलिस ने लेधा बाई के सामने ही उनके पति को गोली मार दी. इस घटना के बाद कथित तौर पर कल्लूरी और उनके सहयोगियों ने लेधा का गैंगरेप किया. इतना ही नहीं इस घटना के बाद कल्लूरी का ट्रांस्फर दंतेवाड़ा में कर दिया गाया.वहां भी उनका आतंक उसी तरह कायम रहा.

बताया जाता है कि कल्लूरी का पुलिस विभाग में आतंक है और उनके खिलाफ कोई जुबान तक नहीं खोलता.

इस आरोपी अधिकारी से राष्ट्रपति पदक वापस लेने के लिए सामाजिक संगठनों ने हस्ताक्षर अभियान भी शुरू कर रखा है. इस पर हस्ताक्षर करने वालों में जो लोग शामिल हैं उनमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं-
शबनम हाशमी, सामाजिक कार्यकर्ता, सुधा भारद्वाज, शालिनी गेरा, नंदनी सुंदर हिमांशु कुमार, इंदिरा चक्रवर्ति, बेला भाटिया, कल्पना मेहता, मनीष शर्मा, शेबा जॉर्ज, राम पुन्यानी, मानसी शर्मा,महताब आलम(पत्रकार), मनीषा शेट्टी, संघमित्र मिश्रा, जफर मेहदी(पत्रकार), जॉन दयाल(क्रिश्च्यन काउंसिल), अहमद शोऐब(अकादमिशियन) कविता श्रीवास्तव, नवैद हामिद,एन्नी राजा, एस आर दारापुरी(पूर्व आईपीएस), जुलैखा जबीं(पत्रकार) सुचेता डे, इर्शादुल हक( सम्पादक नौकरशाही डॉट इन) विनय भट्ट, हर्ष डोभल और असद जैदी समेत सैकड़ों बुद्धिजीवी इस अभियान में शामिल हैं.

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