बिहार को हांकने वाले नौकरशाह दिल्ली से सीखें

कम लोगों को पता है कि आर्यन टीव के सीईओ अनिल कुमार खूब लिखते और पढ़ते हैं. वह बिल्डर एसोसिएशन के प्रेसिडें हैं और बिल्डिंग बायलाज पर जम कर लिखते-बोलते हैं.  वह तर्कपूर्ण तरीके से नौकरशाहों को सीखने की बात कह रहे हैं.

अनिल कुमार आर्यन टीवी के सीओ हैं

अनिल कुमार आर्यन टीवी के सीओ हैं

बिहार को हांकने वाले नौकरशाहों व राजनेताओं को दिल्ली से सबक लेने की सख्‍त जरुरत है । बिहार में जहां बिल्डिंग इंडस्‍ट्री को चौपट करने के लिए अचल संपत्ति के भूतल और तल क्षेत्र अनुपात फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) को कम करने की कवायद होती रही है,वहीं दिल्‍ली में कल 26 नवंबर को महत्‍वपूर्ण कदम लेते हुए शहरी विकास मंत्रालय ने एफएआर को बढ़ाने को मंजूरी दे दी है ।

मंजूरी के पहले शहरी विकास मंत्रालय ने दिल्‍ली की आवासीय जरुरतों का ख्‍याल किया व उपलब्‍धता देखी । इसके अनुरूप जनता की जरुरतों का ध्‍यान रखते हुए एफएआर में इजाफा किया गया ।

इसका सीधा फायदा भी दिल्‍ली में फ्लैट चाहने वालों को मिलेगा ।
दिल्‍ली मे शहरी विकास मंत्रालय ने 750 से 1000 वर्गमीटर क्षेत्रफल प्लाट का एफएआर मौजूदा सीमा से पचास प्रतिशत बढ़ा दिया है। इसी प्रकार एक हजार वर्गमीटर से अधिक प्लाट का एफएआर मौजूदा सीमा से 80 प्रतिशत बढ़ाया गया है ।

ठीक इसके उलट बिहार में जरुरतों का सरकार कभी ख्‍याल नहीं करती । पटना में आवासीय विस्‍तार को क्षेत्र भी कम है,फिर भी सरकार अव्‍यावहारिक फार्मूले को लागू करने पर आमादा रहती है ।
सोचने की बात है कि सड़कों से अतिक्रमण हटाने की जिम्‍मेवार किसकी है । दिल्‍ली में अतिक्रमण हटाने लोग नहीं जाते. सरकार की व्‍यवस्‍था जाती है । लेकिन बिहार में अतिक्रमण करने वालों को प्रश्रय मिलता है । फिर जिसने अतिक्रमण नहीं किया,नुकसान वे प्‍लाटधारक उठाते हैं ।

नगर निगम सड़क को कम चौड़ा बता एफएआर को कम कर देता है । अब सोचें,अतिक्रमण नहीं करने वाले लोगों को फायदा नहीं नुकसान झेलना पड़ा ।

इस स्थिति में पटना कैसे सुधरेगा । कोई कायदा-कानून तब तक जबर्दस्‍ती नहीं थोपा जा सकता,जब तक सड़क को अतिक्रमण मुक्‍त कराने का जिम्‍मा व्‍यवस्‍था ग्रहण न करे ।

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