बिहार में अप्रासंगिक होते जा रहे हैं मंत्री

बिहार का प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचा काफी तेजी से बदल रहा है। नौकरशाह हावी होते जा रहे हैं, जबकि मंत्रियों की भूमिका सीमित होती जा रही है। अब नीतिगत फैसलों के लिए आयोजित होने वाली बैठकों में मंत्री के बजाये प्रशासनिक अधिकारी ही शामिल हो रहे हैं।sachiv

नौकरशाही ब्‍यूरो

 

अपनी बदली हुई भूमिका में नौकरशाही भी राजनीति की भाषा बोलने लगी है। कल मुख्‍य सचिव अंजनी कुमार सिंह और मुख्‍यमंत्री के सचिव चंचल कुमार ने नीति आयोग के उपाध्‍यक्ष अरविंद पनगढि़या और सीइओ सुधाश्री खुल्‍लर से मुलाकात की। दोनों अधिकारियों ने नीति आयोग के अधिकारियों से अलग-अगल मुलाकात की और बिहार की मांगों को उनके सामने रखा। इन अधिकारियों ने वही बात दुहरायी जो बातें सीएम नी‍तीश कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी के समक्ष रखी थी। इन अधिकारियों ने वहां प्रशासनिक भाषा के बजाय राजनीतिक भाषा का ही इस्‍तेमाल किया।

 

उधर गोवाहटी में ऊर्जा मंत्रियों की बैठक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बुलायी थी। इस बैठक में भी ऊर्जा सचिव प्रत्‍यय अमृत ही हावी रहे। बैठक में ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव की भूमिका सीमित ही रही। इस पूरी बैठक में प्रत्‍यय अमृत अपनी सक्रियता से विभाग की उपलब्धियों का श्रेय ले गए। अब सीएम की समीक्षा बैठक में मंत्रियों की भूमिका फिलर बनक रह गयी है। नौकरशाही के ताकतवर होने का फायदा राज्‍य को कितना मिलता है, यह समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि मंत्रियों की भूमिका सीमित होते जाना शुभ संकेत नहीं है।

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