बिहार में चार-चार साल से बीरबल की खिचड़ी की तरह चल रही नियुक्तियों के खिलाफ हल्ला बोल

बिहार में तो नीतीशे कुमार हैं, लेकिन आवाम की ज़िंदगी में बहार की बात तो छोड़िए सामान्य हालात भी नहीं है। सारी योजनाएँ, घोषणाएँ और बहाली की प्रकिया टाय- टाय फिस्स हो गयी है। बिहार की स्कूली शिक्षा के बारे में सब जगज़ाहिर है। आप लगातार दो वर्षो में हुए इंटर टॉपर स्कैंडल को भी अभी तक नहीं भूले होंगे।

अजय आनंद 

ख़ैर। अब उच्च शिक्षा की सूरते हाल पर गौर फ़रमाइए।बिहार के विश्विद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक नहीं है। किसी-किसी कॉलेज में एक- दो अध्यापक बचें हैं।

 

पटना विश्वविद्यालय भी अंतिम साँसें ले रहीं हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पटना विश्वविद्यालय के जन्मशताब्दी वर्ष पर वहाँ गए थे, लेकिन अभी तक वहाँ की व्यवस्था में कुछ सुधार नहीं हुआ है। हालात यह हो गयी है कि बिहार की यूनिवर्सिटी बस डिग्री देने वाली मशीन बनकर रह गई है।

 

आम बच्चे जिनकी सामाजिक आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है वे गाइड और कुंजी पढ़ने के लिए अभिशप्त हैं। बिहार से युवाओं का पलायन सिर्फ़ रोजगार के लिए नहीं, उच्च शिक्षा के लिए भी हो रहा है। जिससे बिहार की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

बिहार में बहाली या बीरबल की खिचड़ी

राज्य में 1996 के बाद, नवम्बर 2014 में व्यापक पैमाने पर सहायक प्रोफेसर की बहाली आयी। पिछले पाँच साल से यह प्रक्रिया ऐसी चल ही रही है, मानो बीरबल की खिचड़ी पक रही हो। 2014 -15 के आस-पास ही उड़ीसा, यू.पी, W. B, आंध्रप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल में बहाली आयी थी। सभी जगह बहाली प्रक्रिया पूरी कर लीं गयीं है।

 

बीपीएससी की हालत

W. B व हिमाचल प्रदेश में इस बीच एक और बहाली प्रक्रिया पूरी कर ली गयी। दो महीने पहले W.B में फिर से आवेदन मँगवाया गया है। अब फिर से गौर करते हैं बीपीएसी की टाल मटोल प्रवृत्ति पर। बिहार में जब हिंदी का इंटरव्यू( जून 2018) चल रहा था उसी समय गुजरात PCS के तहत सहायक प्रोफेसर का भी साक्षात्कार हो रहा था और MPPSC में Assistant Professor के लिए लिखित परीक्षा सम्पन्न हुयी थी।

बीपीएससी में बहाली हो- उपेंद्र कुशवाहा

दोनों जगह सभी विषयों का रिजल्ट ही नहीं निकला बल्कि लोग जॉइन भी कर रहे हैं। यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि दोनों जगह लिखित परीक्षा होने बावजूद रिजल्ट काफ़ी तेज़ी के प्रकाशित हुआ, लेकिन बिहार में सिर्फ़ इंटरव्यू होने के बावजूद रिजल्ट भी नहीं आया है। जूलॉजी का साक्षात्कार हुए डेढ़ साल हो गए हैं।

 

हिंदी एक साल से प्रकिया में है।  संस्कृत, वाणिज्य, समाजशास्त्र और राजनीति जैसे विषयों की लंबी फेहरिस्त है। सवाल यह उठता है अन्य राज्य में भी PCS के माध्यम से बहाली हो रही है। वहाँ तेज़ गति से कैसे प्रक्रिया पूरी होती है?

बीपीएसी और बिहार सरकार के टालमटोल रवैया पर दबाव बनाने के लिए  अब तो  19.11.18 को 11 बजे बीपीएसी मेन गेट पर शांतिपूर्वक धरना प्रदर्शन का कार्यक्रम है।  इसका मकसद सरकार पर दबाव बनाना है.

अजय आनंद, दिल्ली विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*