बिहार में 100 डॉयल करें, ना बाबा ना

दिल्ली की लड़की अपनी अस्मत की हिफाज़त लिए 100 नंबर डायल करने का साहस बटोर रही थी,तभी हैवानों के ज़ुल्म के चलते वह पुलिस को फोन नहीं मिला पाई.लेकिन दुर्भाग्यवश बिहार में कोई 100 नंबर डायल करे भी तो उसे मदद नहीं मिलने वाली.यकीन न हो तो डायल कर के देखिए.नौकरशाही डॉट इन के उत्तर बिहार ब्यूरो चीफ पंकज कुमार की पड़ताल के नतीजे बताते हैं कि आप 100 नंबर पर भरोसा नहीं कर सकते.जानते हैं क्यों.

सबसे पहले उत्तर बिहार के मोतिहारी में चलते हैं. यहां हजार कोशिश के बावजूद यह नम्बर नहीं लगेगा. हमारी तहकीकात से पता चला कि यहां यह नंबर सालों से बंद पड़ा है. हां, टेलिफोन विभाग के मुताबिक ‘अस्थाई’रूप से.

पुलिस अधिकारी कहते हैं कि टेलिफोन विभाग को नंबर चालू करने के लिए कई बार अनुरोध भेजा गया है.लेकिन बड़ा सवाल है कि आम लोगों के घरेलू मामलों में भी अपनी ताकत दिखाने वाली पुलिस की शक्ति भी नंबर चालू करवाने में सफल क्यों नहीं हो पा रही?

मुजफ्फरपुर का हाल देखिए पहुंचते हैं. यहां भी लोगों से पुलिस से जोड़ने के लिए शुरू किए गए इस आसान सा दिखने वाले 100 नंबर का मिलना कठिन है. मुजफ्फरपुर के पड़ोसी जिले दरभंगा में भी इस नंबर पर कोई पीड़ित मदद मांगने में अपना समय न गंवाए तो ज्यादा बेहतर है. क्योंकि आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे प्रत्युष राज बताते हैं कि यहां 100 नंबर डायल करने पर फैक्स का टोन सुनाई पड़ता है.

सीतामढ़ी-इधर मुजफ्फरपुर के एक और पड़ोसी जिले सीतामढ़ी के एसपी से हमने सवाल किया कि आपके जिले में 100 नंबर क्यों काम नहीं कर रहा? तो पुलिस के आला अधिकारी के कामकाज का तरीका ही सामने आ गया. एसपी ने बताया कि “जानकारी ही नहीं है कि सीतामढ़ी में यह नंबर पर लोग कॉल नहीं कर पा रहे”. हालांकि वह मामले की गंभीरता को देर से समझते हुए अब ठीक करने का आश्वासन दे रहे हैं.

समस्तीपुर में 100 नंबर पर नौकरशाही डॉट इन के संवाददाता को कॉल करने पर आउट ऑफ आर्डर होने की जानकारी मिली.

उम्मीद बंधी और टूट गई

हालांकि मधुबनी में 100 नंबर मिलाने पर हमें थोड़ी खुशी मिली. क्योंकि नंबर डायल करते ही हमें रिंग सुनाई देने लगी. लेकिन यह भ्रम भी कुछ सेकेंड में टूट गया, क्योंकि घंटी होने के वाबजूद हमारा कॉल रिसीव करने वाला कोई नहीं था.

बेतिया के नगर पुलिस स्टेशन में एक सिपाही की तैनाती इसी काम के लिए की गई है.लेकिन व्यवस्था की हकीकत देखिए यहां पूरे एक साल से इस नंबर की सेवा बंद है.हमनें जब उनसे यह जानना चाहा कि अब तक यहां कितने फोन कॉल आए हैं तो उनके पास कोई रिकॉर्ड नहीं था.

नाकामयाबी पर दलील

राज्य के आला अधिकारी इस गड़बड़ी को गंभीरते से नहीं ले रहे. हालांकि पूरे देश में पुलिस से संपर्क करने के लिए लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर एक सामान(100) नंबर की व्यवस्था की गई थी.इसके तहत अलग-अलग एरिया में सेंट्रलाइज्ड सूचना पहुंच सकती है.यह नम्बर इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि 10 अंको का मोबाइल नंबर याद रखना कितना कठिन है.लेकिन 100 तो याद रहने वाला नम्बर है.

ये सब जानते हैं कि बिहार के बाहर से आने वाले पर्यटक कहां से थानों का नम्बर मांगते फिरेंगे.या अपने मोबाइल में कितने पुलिस अधिकारियों के नंबर सेव करते रहेंगे?

नौकरशाही डॉट इन का सुझाव

हम आपको एक सुझाव देते हैं.गूगल में जाइए और अंग्रेजी में टाइप कीजिए.‘बिहार डीजीपी मोबाइल’ इसके जरिए आप पहले रिजल्ट पर क्लिक करके डीजीपी के ऑफिस और मोबाइल का नंबर ले सकते हैं. और डीजीपी का नंबर आपको हर जिले में बदलना भी नहीं होगा.शायद आम लोगों की परेशानी सीधे डीजीपी तक पहुंचने के बाद 100 नंबर की जरूरत का अहसास बिहार पुलिस को हो.

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