‘बुडबक हो का रे… बिना मुंहे धोले कैइसे खा लें’

जमानत पर रिहाई के बाद लालू प्रसाद अपने पुराने अंदाज में वापस लौट चुके हैं, यहां पढ़ें कि अपने आज सुबह 7 बजे विनायक विजेता ने उनके आवास पर क्या नजारा देखाlalu

बुधवार को सुबह लगभग 7:30 का समय। पूरा पटना कुहासे के आगोश में। धुंध ऐसी की पांच कदम आगे भी दिखायी देना मुश्किल। इस कुहासे ने सर्कुलर मार्ग को भी अपने आगोश में लपेट रखा था। पर रांची जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद मंगलवार की देर रात पटना पहुंचे राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद से मिलने और उनको अपनी एक झलक दिखाने के लिए कार्यकर्ताओं की भीड़ सुबह से ही उनके 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर जमा थी।

आवास के अंदर पोर्टिकों में अलाव जलाकर बैठे लालू प्रसाद के चेहरे पर सफर और सभाओं की थकान साफ दिख रही थी। कार्यकर्ताओं से बात करते-करते कुर्सी पर ही झपकी भी लेते रहे पर ज्योंहि झपकी टूटती बातों का सिलसिला चालू हो जाता।

बात के क्रम में जेल में बिताए अपने अनुभवों को साझा करना नहीं भूलते ।

जेल में मायूसी

बातों ही बातों में उन्होंने कहा कि ‘इ समय तक त जेल में ठर्इंचा भर फल अऊर खाए-पीए के समान आ जाता था, सब जेल में बंद गरीब गुरबा में बांट देते थे। आ रहे थे त बड़ा दुखी था सब।’
तभी सामने बैठे एक कार्यकर्ता ने उनकी हां में हां मिलाते हुए कहा कि ‘हां सर, इ सब बतवा अखबार में पढ़ते थे।’

बुधवार की सुबह राजद सुप्रीमों से मिलने आने वालों में कुछ लोग लालू प्रसाद के लिए अपने घर से दही, चुरा लाई और मक्खन भी लेकर आए थे।

एक कार्यकर्ता ने उनसे मक्खन खाने की जिद भी की। इसपर उन्होंने कहा कि ‘बुरबक हो, अभी मुंहे नहीं धोए हैं त कइसे खा लें।’

इसी बीच लालू सवाल करते हैं कि भाजपा को कौन वोट देगा और सवर्ण वोट किधर जाएगा। कुछ कार्यकर्ता कहते हैं कि नीतीश से छिटकल सवर्ण और भूमिहार का ज्यादा वोट भाजपा में जाएगा तभी वहां मौजूद इसी जाति से आने वाले और साभ्रान्त दिख रहे एक सज्जन भड़क उठे। उन्होंने कह डाला कि ‘मैं भी तो इसी जाति से हूं आप कैसे कह रहें हैं कि इस जाति का वोट भाजपा में जाएगा? हां इ तय है कि जिस पार्टी का जहां जैसा उम्मीदवार होगा वोट भी उसी अनुरुप डलेगा।’

इधर कार्यकर्ताओं में बहस चलती रही उधर लालू झपकी लेते रहें। जब उन्होंने देखा कि बहस का दौर लंबा खिंच रहा है तो उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने-अपने घर लौटने और पार्टी को मजबूत बनाने की अपील कर डाली।

कुछ कार्यकर्ता ढोल-बाजे के साथ आए थे जब वो जाने लगे तो लालू यह कहना नहीं भूले कि ‘अरे बजाते जइहसन।’
लालू प्रसाद का आदेश मिलते ही 10 सर्कुलर रोड ढोल नगाड़ों की आवाज से गुंजने लगा।

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