बुन्देलखंड में आन्दोलन का रूप ले रहा है महिला शिक्षा अधिकार

मुकुंद सर्वदे,बुंदेलखंड से

बुंदेलखंड के ललितपुर, झाँसी, हमीरपुर, और जालौन आदि जिलों में असाक्षर महिलाओं कि संख्या ७० प्रतिशत से ९४ प्रतिशत के बीच है. ये आंकड़े चौकाने वालें हैं, पर जब आप इन क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे तो आप को जिस बात पर सुखद आश्चर्य होगा वह है यहाँ की महिलाओं, खासकर बालिकाओं में पढने के प्रति उनका जज्बा.

हमें चाहिए कलम किताबें …..

इन दिनों उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के 13 जिलों वाले बुंदेलखंड इलाके में बुंदेलखंड शिक्षा अभियान के तहत “महिला शिक्षा अधिकार यात्रा” जारी है. इस यात्रा को उरई में राष्ट्रीय महिला फेडरेशन की महासचिव ऐनी राजा ने हरी झंडी दिखा कर शुरुआत की. इस अवसर पर नैकडोर के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक भारती भी मौजूद थे.

इस यात्रा के प्रति महिलाओं के जोश और जज्बे से जहाँ शिक्षा के प्रति उनकी जागरूकता को समझी जा सकती है वहीँ शिक्षा के मामले में अबतक के सरकारी प्रयासों की कमी के प्रति उनके अन्दर आक्रोश को भी महसूस किया जा सकता है.

(नैकडोर) द्वारा ‘महिला शिक्षा अधिकार यात्रा’ के जरिये महिलाओं और बालिकाओं में शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा रहा है.
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की छात्र सुषमा के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाएं जालौन के उरई में “हमें भी दो कलम किताबें हम भी पढने जाएँगी” का नारा लगाती हैं तो यह पता चलता है कि इस क्षेत्र में अगर जागरूकता बढ़ायी जाये तो महिलाओं को पढ़ाई के प्रति संवेदनशील बनाया जा सकता है.

सुषमा के साथ इस यात्रा अभियान में केसरिया कोल भी शामिल हैं. कोल चित्रकूट कि रहने वाली आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो इस क्षेत्र की दर्जनों महिलाओं के साथ इस यात्रा में शामिल हैं.

कोल महिलाओं को समझती हैं कि कैसे शिक्षा उन्हें अपने अधिकारों के प्रति संवेदनशील और नेतृत्व क्षमता का विकास कर सकता है. इस अभियान में जालौन कि २९ वर्षीय कल्पना भी शामिल हैं जिनके साथ जिले की दो दर्जन से अधिक महिलाएं शामिल हुई हैं. इन महिलाओं का मानना है कि इस से पहले इस तरह के प्रयास हुए होते तो उन्हें और अधिक लाभ हुआ होता.इस अभियान ने उनकी आँखें खोल दी हैं.

इस यात्रा में शामिल ममता कहती हैं, ‘हमारे पुरुष हमारी बातें नहीं समझते उन्हें केवल अपनी फिक्र रहती है, वे बच्चों को भी भूल जाते हैं. महिला के शिक्षित होने से वह मजबूर नहीं रहेगी’.

ममता का कहना है कि इस तरह कि यात्रा बुन्देलखंड से बहार भी चलाने की ज़रुरत है.

नैकडोर ने यह शिक्षा अधिकार यात्रा उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश के १३ जिलों- जालौन, हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट, महोबा, ललितपुर, झाँसी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर दतिया और दमोह में चलाई जा रही है.

बुंदेलखंड के ये जिले शिक्षा के मामले में सबे पिछड़े हैं. २००१ के जनगणना के आंकड़ो के मुताबिक

३८.४३ लाख कुल महिला आबादी में २५.०९ लाख महिलाएं असाक्षर हैं. इन जिलों में अशाक्षरता की दर ६९ प्रतिशत से लेकर ९४ प्रतिशत तक है.

इस शिक्षा अधिकार यात्रा का मकसद बालिका शिक्षा के प्रति जागरूकता लाना और महिलाओं में नेतृतव क्षमता का विकास करना है.

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