ब्रह्मेश्वर मुखिया के इस कथित हत्यारे की दास्तान आप को भी दंग कर देगी

आखिर यह इनामी फौजी कौन है जो एक दशक तक आतंक और खौफ का पर्याय रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया मर्डर का आरोपी है और जिसने चार सालों तक पुलिस को पानी पिलाये रखा?

गिरफ्त में आया नंदलाल उर्फ फौजी

गिरफ्त में आया नंदलाल उर्फ फौजी

विनायक विजेता

पुलिस ने पचास हजार का इनामी और ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में आरोपित अपराधी नंद गोपाल पांडेय उर्फ फौजी को जमुई से गिरफ्तार कर लिया।

फौजी वहां नाम और अपनी पहचान बदल कर एक ठेकेदार के साथ रह रहा था। भोजपुर के एसपी छत्रनील सिंह ने बताया कि फौजी इतना शातिर है कि वह मोबाइल का भी कम उपयोग करता है और कुछ विश्वस्त और चुनिंदा लोगों से बात करता है। वह जिससे बात करता था उसकी भनक पुलिस को लग गई।

जमुई में था ठिकाना

भोजपुर पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर सौरव कुमार को फौजी का पता लगाने के लिए जमुई भेजा गया जहां वह पांच दिन रुकने के बाद फौजी के ठीकाने का पता लगा लिया। इसके बाद गुरुवार को जमुई पुलिस की मदद से फौजी को गिरफ्तार कर लिया गया।

मूल रुप से रोहतास जिला के विक्रमगंज थाना अंतर्गत जोगिया गांव का निवासी फौजी एक पूर्व बाहुबली विधायक और एक पूर्व विधान पार्षद का विश्वस्त शूटर माना जाता रहा है। फौजी पर पांडव गिरोह के अशोक सिंह व बबलू सिंह की गढ़वा में हत्या के आरोप सहित 22 अन्य संगीन मामले दर्ज हैं जिसमें अधिकांश में वह जमानत ले चुका है।

nandlal.fauji

प्रतिबंधित रणवीर सेना के संस्थापक ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्या मामले में भी उसने सीबीआई कोर्ट से अंतरिम जमानत ले ली थी।

एक पूर्व विधायक का था शूटर

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि सरकार द्वारा पचास हजार रुपये के इनामी अपराधी को आखिर जमानत कैसे मिल गई। फौजी वर्ष 1999 में तब सुर्खियों में आया था जब विक्रमगंज पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद उसने पुलिस को दिए अपने सनसनीखेज बयान में अपने और एक पूर्व विधायक एवं उनके छोटे भाई के अपराधों की पूरी गाथा सुनाई थी।

अपने इस बयान में फौजी ने श्रीनगर से दर्जनोंं एके-47 रायफल मंगाने सहित इन रायफलों के वितरण का भी राज खोलते हुए उन सबों के नाम गिनाए थे जिनके पास यह रायफल पहुंचा। भोजपुर में किसी मामले में वांछित नहीं रहने के कारण भोजपुर पुलिस फौजी को रोहतास पुलिस के हवाले कर रही है जहां के डेहरी थाना में फौजी पर बैंक डकैती का मामला दर्ज है। ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद पुलिस ने फौजी का पता लगाने की काफी कोशिश की पर तब वह पकड़ा नहीं जा सका था।

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