भगवा जिहाद: अपने ही बुने जाल में फंस रही हैं तारा शाहदेव

रंजीत कोहली से ब्याह रचाने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप के मामले में राष्ट्रीय शूटर तारा शाहदेव का दांव उलटा पड़ता जा रहा है. यहां पढिये कुछ नयी जानकारी

तारा शाहदेव: इरादे नेक नहीं!

तारा शाहदेव: इरादे नेक नहीं!

इर्शादुल हक, सम्पादक नौकरशाही डॉट इन

सूत्र बताते हैं कि तारा शहदेव और उनके परिवार की नजरें रंजीत कोहली की काली कमाई पर थी. सूत्रों का यहां तक कहना है कि रंजीत कोहली हर महीने तारा शाहदेव को मोटी रकम आदा करते थे.

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जन्मजात सिख है तारा शाहदेव का पति

तारा शाहदेव और रंजीत कोहली उर्फ रकीबुल हसन की शादी भले ही कुछ ही महीने पहले हुई थी लेकिन दोनों एक दूसरे को काफी दिनों से जानते थे. तारा शाहदेव और उनके परिवार को इस बात की पुख्ता जानकारी थी कि रंजीत कोहली सिख मजहब को मानने वाले हैं.  तब भी उन्होंने अपने मजहब के लड़के के बजाये एक सिख से शादी रचाई.  वो भी हिंदू रीति से. इस शादी में झारखंड के बड़े सिख नेता इंदर सिंह नामधारी और कई नौकरशाह भी शरीक हुए थे.

सुबूत का अभाव

इधर झारखंड पुलिस का साफ कहना है कि उसे अब तक कोई ऐसे सुबूत नहीं मिले हैं जिससे यह पुख्ता तौर पर कहा जा सके कि कोहली ने इस्लाम स्वीकार किया था. जहां तक तारा शाहदेव के इस आरोप का सवाल है कि कोहली उर्फ रकीबुल हसन ने उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिए मारा-पीटा, तो उनके इस आरोप में भी अब दम नजर नहीं आ रहा है.

तारा शाहदेव ने हिंदपीड़ी थाने में जो एफआईआर दर्ज की थी उसमें उन्होंने सिर्फ यह बात लिखावाई थी कि उनके खिलाफ प्रताड़ना और मारपीट की जाती है. लेकिन तारा शाहदेव ने बाद में एफआईआर में धर्म परिवर्तन करवाने का दबाव बनाने का आरोप जोड़ा.  इस मामले को भगवा गिरोह के नेताओं ने तूल दिया. अखबारों और चैनलों ने तो नफरत फैलायी ही. अब सवाल यह उठाये जाने लगे हैं कि क्या तारा शाहदेव ने कुछ साम्प्रदायिक शक्तियों के बहकावे में आ कर मजहब बदलवाने का आरोप जोडवाया था?

तारा शाहदेव का यह आरोप भी अब कमजोर पड़ता जा रहा है कि रंजीत की मां ने भी उन्हें मारा पीटा. जबकि रंजीत का कहना है कि उनकी मां अस्सी साल की हैं और बीमार हैं. एक अस्सी साल की बुजर्ग एक राष्ट्री शूटर को कैसे मारपीट सकती है.

काली कमाई का चक्कर

सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि कोहली के चकाचौंध से भरे घर में हर तरह की सुविधा है जिसमें सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं. कोहली के करीबी उन सीसीटीवी फुटेज को भी अदालत में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं जिसमें तारा शाहदेव उनके घर में दिखती हैं और गुस्से और कहा-सुनी के बाद बाद घर से बाहर चली जाती हैं.

अब यह मामला अदालत में है और पुलिस छानबीन कर रही है. लेकिन पिछले चार-छह दिनों में साम्प्रदायिक शक्तियों और मीडिया के एक ग्रूप ने जिस तरह से इस मामले को लव-जिहाद का नाम दिया अब धीरे-धीरे उनकी बोलती बंद होती दिख रही है.

 

अपनी गिरफ्तारी से पहले रंजीत कोहली दिल्ली में थे. सूत्र यहां तक बताते हैं कि कोहली ने अपनी बेगुनाही के सुबूत पूरे दस्तावेज के साथ गृहमंत्रालय को सौंपे हैं. लेकिन यह भी सच है कि कोहली के संबंध झारखंड के रसूखदार नेताओं, नौकरशाहों और न्यायपालिका के लोगों से हैं. खबर तो यह भी है कि कोहली का संबंध बिहार के भी कई बड़े पुलिस अधिकारी से हैं.

लेकिन इस पूरे मामले जो चीजें छन कर सामने आ रही हैं उससे लगता है कि रंजीत कोहली दूध के धुले नहीं हैं. सूत्रों का कहना है कि कोहली कुछ ही सालों में रसूखदार लाबीइस्ट बन कर उभरे थे. एक एनजीओ और अपनी मां के नाम पर एक प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी चलाने की बात भी मीडिया में आ चुकी है. लॉबी और लाइजेनिंग के धंधे में बेशुमार दौलत कमाने की भी खबरें आ रही हैं. कोहली कुछ ही सालों में आलीशान रहनसहन के मालिक बन चुके थे. उनके काफइले में महंगी गाड़ियां हैं. उनकी काली कमाई का आलम तो यहां तक बताया जाता है कि वह जिन रेस्त्रां और होटलों में जाते थे वहां के बैरों के पो बारह हो जाते थे. रांची से सूत्रों का यहां तक कहना है कि बैरों को टिप्स देने के मामले में कोहली का तौर तरीका नवाबों जैसा है.

ऐसे में भले ही कोहली, तारा शाहदेव के आरोपों से बच जायें, अपनी बेशुमार दौलत के हिसाब-किताब में उन पर गाज गिरने की गुंजाईश तो बढ़ती ही जा रही है.

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