भागलपुर:पहला दिन 55 हजार प्रति, भास्कर ने तोड़ा जागरण का वर्चस्व

भागलपुर में प्रकाशन के पहले ही दिन 55 हजार कापियां पाठकों तक पहुंचा कर भास्कर ने अपने राइवल अखबर जागरण का वर्चस्व तोड़ दिया है जबकि हिंदुस्तान तीसरे पायदान पर चला गया है.

भास्कर भागलपुर का पहला अंक

भास्कर भागलपुर का पहला अंक

नौकरशाही न्यूज

24 जुलाई को दैनिक भास्कर ने भागलपुर से अपना पहला अंक प्रकाशित किया. पाठकों तक अपनी पकड़ बनाने के लिए आक्रमक मार्केटिंग पॉलिसी वाले दैनिक भास्कर का यह 59वां संस्करण है.

दैनिक जागरण अब तक 50 हजार प्रतियों के सर्कुलेशन के साथ भागलुपर में नम्बर वन अखबार बना हुआ था जबकि हिंदुस्तान 35 जहार की प्रसार संख्या के साथ दूसरे नम्बर पर था लेकिन भास्कर के आ जाने के बाद इन दोनों अखबारों की नींदें हराम हो गयी हैं.

रणनीति

भास्कर की रणनीति को करीब से जानने वाले बताते हैं कि यह अखबार अपने संस्करण के प्रकाशन के पहले ही दिन टॉप सर्कुलेशन प्राप्त करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ता.

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इसी तरह इससे पहले 19 जनवरी 2014 से पटना से प्रकाशन शुरू होते ही अखबार ने तमाम अखबारों को पीछे छोड़ देने का दावा किया था.

ऐसे में भागलपुर एडिशन के लिए अखबार के पास अपने राइवल्स को टक्कर देने का डेढ़ साल का अनुभव था. अपने इसी अनुभव का इस्तेमाल करने के लिए भास्कर पटना के सम्पादक प्रमोद मुकेश वरिष्ठ पत्रकारों की टीम लेकर भागलपुर संस्करण के संपादक राजेश रंजन की सहायता के लिए दो दिन से जमे हुए हैं. इस टीम में विशेष संवाददाता इंद्रभूषण व मनोज प्रताप की तेजतर्रार जोड़ी शामिल है.

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से अखबार के एक्जेक्युटिव एडिटर जगदीश शर्मा तो पहुंचे ही, बिहार-झारखंड हेड ओम गौड, प्रोजेक्ट हेड अनिल सिंह व शशिभूषण सिंह ने भी अपने अपने अनुभवों का लाभ अखबार के प्रकाशन, वितरण में पहुंचाया.

यह सब जानते हैं कि किसी अखबार के गुणवत्ता का अंतिम फैसला पाठक करते हैं. भागलपुर के पाठक भी अगले कुछ दिनों में भास्कर को हर पहलू से परखेंगे. लेकिन मार्केटिंग की आक्रमक पालिसी और पाठकों को सस्ता और गुणवत्तापूर्ण अखबार मुहैया कराने के विज्ञापनों में माहिर इस अखबार ने जब पटना से प्रकाशन शुरू किया तो उसने एक विज्ञापन जारी किया था- “पटना के अखबार देश में सबसे महंगे क्यों हैं?” इसका अन्य अखबारों पर यह असर पड़ा कि साढ़े चार रुपये में मिलने वाले तमाम हिंदी अखबारों ने अपनी कीमत दो रुपये कम कर दी.

भास्कर ने विज्ञापन और विपणन की इसी नीति के तहत भागलपुर में पांव पसार दिया है. इसका अगला पड़ाव मुजफ्फर और गया है.

हिंदुस्ता व जागरण में दहशत

भागलपुर में भास्कर की लांचिंग अन्य अखबारों के लिए बहुत बड़ी चुनौती ले कर आयी है. इस बात का एहसा जागरण, दैनिक हिंदुस्तान और प्रभात खबर को था. इसी चुनौती से निमटने के लिए हिंदुस्तान ने पटना के अपने वरिष्ठ स्थानीय सम्पादक तीरविजय सिंह, प्रोडक्शन हेड अनिल कुमार, आल इंडिया के सर्कुलेशन हेड विजय सिंह को भागलपुर में डेरा डलवा दिया था. इसी तरह जागरण के बिहार-झारखंड सीजीएम आनंद त्रिपाठी, एसोसिएट एडिटर सतगुरु शरण अवस्थी व जीएम विनोद कुमार दुबे भी भास्कर के आक्रमक विस्तार से उत्पन्न जोखिम और खतरों की काट खोजने भागलपुर पहुंचे हुए हैं.

भास्कर भागलुपर के संपादक राजेश रंजन बताते हैं कि तमाम अखबारों के इन प्रयासों के बावजूद हमने पहले ही दिन, न सिर्फ 55 हजार कापियां लोगों तक पहुंचा दी बल्कि पत्रकारिता के स्तर पर भी हमारी खबरें  पहले ही दिन चर्चा का विषय बन गयी हैं.

आम तौर पर अखबारों की आपसी राइवलरी का सबसे बड़ा लाभ पाठकों को होता है. भास्कर के भागलपुर पहुंचने से वहां के पाठों के पास चार बड़े अखबारों में से चुनने का विक्लप मिल गया है.

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