भाजपा के साथ जाकर अपनी विश्‍वसनीयता खो दी है नीतीश ने

समाजवादी राजनीति के मजबूत आधार स्‍तंभ और करीब 30 वर्षों तक संसदीय राजनीति में विधायक, सांसद और मंत्री पद की जिम्‍मेवारियों का निर्वाह करने वाले जगदानंद सिंह कहते हैं कि मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के पास अब कुछ नहीं बचा है। न जमीर, न जमीन। दुबारा भाजपा के साथ जाकर राजनीति में अपनी विश्‍वसनीयता भी खो दी नीतीश ने।

जगदानंद सिंह के साथ वीरेंद्र यादव की बातचीत 

 उन्‍होंने कहा कि विचारधारा की राजनीति राष्‍ट्रीय जनता दल करता है। डॉ लोहिया और कर्पूरी ठाकुर के विचारों के साथ राजद चल रहा है। नीतीश ‘बटोरुआ’ राजनीति करते हैं। न विचार धारा है, न जनाधार। कभी विचार बटोर लेते हैं तो कभी वोट बटोर लेते हैं। ऐसी राजनीति स्‍थायी नहीं होती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार का सफाया हो गया था। राजद व कांग्रेस जहां 211 विधान सभा सीटों पर प्रथम या दूसरे स्‍थान पर थे, वहीं जदयू मात्र 48 सीटों पर पहले या दूसरे स्‍थान पर था। यह परिणाम बताता है कि जनाधार राजद और कांग्रेस के पास था। राजद के वोटों से नीतीश कुमार को ‘संजीवनी’ मिली। इसके बावजूद नीतीश खुद को जनाधार वाला नेता होने की बात करते हैं।

श्री सिंह ने कहा कि महागठबंधन के समझौते के तहत लोकसभा चुनाव के आलोक में राजद को नुकसान उठाना पड़ा। लोकसभा के चुनाव के आधार पर विधान सभा चुनाव में 211 सीटों पर राजद व कांग्रेस का दावा बनता था। इसके बावजूद राजद व कांग्रेस ने 69 सीटों का नुकसान उठाकर नीतीश को विधान सभा चुनाव में 101 सीट दी। लोकसभा चुनाव के आलोक में 46 सीटों के बजाये विधान सभा चुनाव में 101 सीट राजद ने जदयू के लिए छोड़ा। 55 सीटों का फायदा जदयू को हुआ। पूर्व मंत्री ने कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने राजनीतिक नफा-नुकसान को दरकिनार कर सांप्रदायिकता के खिलाफ महागठबंधन बनाया था, लेकिन सत्‍ता के लोभ में नीतीश ने फिर सांप्रदायिक शक्तियों के साथ समझौता कर लिया।

उन्‍होंने कहा कि नीतीश की ‘पलटीमार’ राजनीति से पिछड़ी-अतिपिछड़ी जातियों का भरोसा नीतीश पर से उठ गया है। बनिया जातियों का झुकाव भाजपा की ओर है, लेकिन गैर बनिया पिछड़ी-अतिपिछड़ी जातियों फिर से राजद की ओर लौट रही हैं और राजद से जुड़ रही हैं। कहार, मल्‍लाह, गंगोता, केउट, नोनिया, बिंद जैसी जातियां में राजद का जनाधार तेजी से बढ़ रहा है। नाई, लुहार, बढ़ई जैसी कम आबादी वाली जातियों का भी राजद के प्रति विश्‍वास बढ़ रहा है। नीतीश की ‘पटलीमार’ राजनीति का शिकार बड़ा वर्ग राजद से जुड़ रहा है। सामाजिक न्‍याय की राजनीति करने वालों का बड़ा तलका राजद को ही लोहिया व कर्पूरी का वैचारिक उत्‍तराधिकारी मानता है।

1985 में कैमूर जिले के रामगढ़ विधान सभा से पहली बार निर्वाचित जगदानंद सिंह लगातार 2009 तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व करते रहे, जबकि 2009 में वे बक्‍सर सीट से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। 1962 में युवजन सभा के साथ राजनीति शुरू करने वाले जगदानंद सिंह कहते हैं कि पहले की राजनीति मुद्दों और जनसरोकारों को लेकर ‘लड़ने’ की होती थी, अब राजनीति ‘जीतने’ के लिए हो गयी है। उन्‍होंने कहा कि राजनीति का मूल चरित्र ही बदल गया है। यही कारण है कि राजनीति के हर पड़ाव पर ‘बदलाव’ नजर आ रहा है। बदलाव की दिशा पर हम बहस कर सकते हैं, लेकिन इस बदलाव व बहाव को रोकना मुश्किल दिख रहा है।

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